City of Embroidery: लखनऊ की चिकनकारी वाले कुर्ते आज-कल काफी ट्रेंड में हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस कढ़ाई का भी अपना एक अलग इतिहास है. ऐसे में आज ये जानें कि इस शहर को सिट ऑफ एमरॉयड्री क्यों कहा जाता है?
30 January, 2026
जब बात तहजीब, नजाकत और बेहतरीन कारीगरी की आती है, तो दिमाग में सबसे पहला नाम लखनऊ का आता है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सिर्फ अपने कबाबों के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि सदियों से ये शहर अपनी बारीक और खूबसूरत कलाकारी के लिए भी पूरी दुनिया में डंका बजा रहा है. अगर आप भी सोच रहे हैं कि लखनऊ को ‘सिटी ऑफ एम्ब्रॉयडरी’ क्यों कहा जाता है, तो आज आपके लिए इसका जवाब लेकर आए हैं.

लखनऊ की धड़कन
लखनऊ को ‘सिटी ऑफ एम्ब्रॉयडरी’ का खिताब दिलाने के पीछे सबसे बड़ी वजह है, चिकनकारी आर्ट. ये एक ऐसी कला है जो मुगल काल में फली-फूली और नवाबों के टाइम में इसने अपनी पहचान बनाई. कहा जाता है कि नूरजहां को ये कला बहुत पसंद थी और उन्होंने ही इसे बढ़ावा दिया. ये सिर्फ कपड़े पर धागे का काम नहीं है, बल्कि लखनऊ की सांस्कृतिक गहराई का प्रतीक है.
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खासियत
चिकनकारी की सबसे बड़ी खूबी इसकी बारीकी है. लाइटवेट कपड़ों जैसे मलमल, कॉटन और सिल्क पर सफेद धागे से की जाने वाली ये हाथ की कढ़ाई बहुत प्यारी लगती है. इसमें ‘शैडो वर्क’, ‘मुरी’, ‘जाली’ और ‘फंदा’ जैसी कई टेक्निक शामिल हैं, जो एक सिंपल से दिखने वाले कपड़े को भी मास्टरपीस बना देती हैं. लखनऊ के कारीगरों के हाथों में वो जादू है कि उनके बनाए फ्लोरल मोटिफ्स बिल्कुल असली जैसे लगते हैं. लखनऊ आज न सिर्फ भारत में बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर हैंडीक्राफ्ट का एक बड़ा हब है. यहां की चिकनकारी का एक्सपोर्ट पूरी दुनिया में होता है. दिलचस्प बात ये है कि इस कला को जिंदा रखने में महिलाओं का बहुत बड़ा योगदान है. लखनऊ में हजारों महिलाएं इस काम से जुड़ी हुई हैं. इस काम के ज़रिए वो अपना घर चलाती हैं.

कुछ मजेदार फैक्ट्स
नवाबों के जमाने में शुरू हुई ये आर्ट आज भी अपने डिजाइन्स में वो रॉयल टच बरकरार रखे हुए है. हाथ से की जाने वाली एक सिंपल कुर्ती को तैयार होने में कभी-कभी कई हफ्ते लग जाते हैं. बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक, बड़े-बड़े डिजाइनर्स और सेलिब्रिटीज लखनऊ के चिकनकारी सूट और साड़ियों के दीवाने हैं. इसके अलावा लखनऊ की चिकनकारी को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन का दर्जा मिला हुआ है, जो इसकी प्योरिटी और पहचान की गारंटी देता है. यानी लखनऊ को ‘सिटी ऑफ एम्ब्रॉयडरी’ कहना बिल्कुल सही है, क्योंकि यहां की गलियों में आज भी सुई-धागे से खूबसूरत काम किया जाता है. यहां के लोग सदियों पुरानी परंपरा को संजोए हुए है. ये भी कहा जा सकता है कि ये शहर सिर्फ इतिहास नहीं बताता, बल्कि उसे अपने हुनर से हर दिन नया बनाता है.
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