Home राष्ट्रीय स्वतंत्रता सेनानी के पोते ने संजोकर रखा महात्मा गांधी का कीमती समान! उन्होंने बताया- मुझे बचपन से ही ऐसे कार्यों में रुचि

स्वतंत्रता सेनानी के पोते ने संजोकर रखा महात्मा गांधी का कीमती समान! उन्होंने बताया- मुझे बचपन से ही ऐसे कार्यों में रुचि

by Sachin Kumar 13 August 2024, 6:50 PM IST (Updated 1 September 2025, 6:04 PM IST)
13 August 2024, 6:50 PM IST (Updated 1 September 2025, 6:04 PM IST)
Mahatma Gandhi grandson freedom fighter preserved valuable belongings interested works childhood

Freedom Movement : स्वतंत्रता सेना के पोते ने आजादी के बाद देश के फ्रीडम फाइटर के नाम पर जारी किए डाक टिकटों का संग्रह करके रखा है. उन्होंने बताया कि इसमें सबसे महत्वपूर्ण गांधी जी का चश्मा है.

13 August, 2024

Freedom Movement : इंदौर निवासी आलोक खादीवाला ने स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित 1 हजाह से अधिक डाक टिकट और महात्मा गांधी द्वारा दिया गया एक जोड़ी चश्मे का संग्रह रखा है. खादीवाला बचपन से ही डाक टिकटों को इकट्ठा करके उन्हें संभाल कर रखते रहे हैं. स्वतंत्रता दिवस के मौके से पहले उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा कि मुझे देश के स्वतंत्रता आंदोलन और उस समय के नायकों पर जारी किए गए डाक टिकट संग्रह करने में काफी रुचि रही है. बता दें कि उनके दादा कन्हैयालाल खादीवाला एक स्वतंत्रता सेनानी थे.

आजादी के बाद सरकार ने जारी किए डाक टिकट

देश को आजादी मिलने के बाद भारत सरकार ने जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं के महत्वपूर्ण योगदान लिए उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किए था. इसके अलावा भारत के पहले स्वतंत्रता आंदोलन 1857 की क्रांति में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की महत्वपूर्ण भूमिका के लिए भी टिकट जारी किया. वहीं, महात्मा गांधी का टिकट और सिक्के तो भारत सरकार के अलावा संयुक्त राष्ट्र, यूके, यूएस, जर्मनी और इंडोनेशिया ने भी जारी किए.

महात्मा गांधी का संभालकर रखा चश्मा

वहीं, आलोक खादीवाला के संग्रह में ऐसे कई दुर्लभ टिकट और सिक्के हैं. वह बताते हैं कि इनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण वस्तु महात्मा गांधी का चश्मा है. उन्होंने कहा कि साल 1947 में आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सांप्रदायिक दंगों को शांत करने के लिए मेरे दादा को राजस्थान के अजमेर जिले में भेजा था. वहां शांति बहाल होने के बाद जब मेरे दादा इसकी सूचना देने के लिए दिल्ली गए तो वहां पर बापू ने अपना चश्मा मेरे दादा को उपहार में दे दिया था. आलोक खादीवाला कहते हैं कि डाक टिकट इकट्ठा करके रखना उनका जुनून है.

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