Year Ender 2025: उत्तर प्रदेश में दुकानों, ढाबों पर मालिकों के नाम लिखने के आदेश, ‘आई लव मोहम्मद’ को लेकर पुलिस की गिरफ्तारियां जैसे मुद्दे सुर्खियों में छाए रहे.
Year Ender 2025: उत्तर प्रदेश में दुकानों, ढाबों पर मालिकों के नाम लिखने के आदेश, ‘आई लव मोहम्मद’ को लेकर पुलिस की गिरफ्तारियां और वक्फ संपत्ति पंजीकरण जैसे मुद्दे सुर्खियों में छाए रहे. उत्तर प्रदेश सरकार मस्जिदों और मदरसों के लिए कानून बनाने में लगी रही. जुलाई-अगस्त के दौरान कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित ढाबों का निरीक्षण कर रहे हिंदू कार्यकर्ताओं ने विवाद खड़ा कर दिया, जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर ढाबा मालिकों को गुंडों ने उनकी धर्म की पहचान जानने के लिए उनकी पैंट उतारने पर मजबूर किया. समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद एस टी हसन ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों के लिए पहचान पत्र प्रदर्शित करने के नियम की निंदा की. अप्रैल में परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 लागू किया गया. इसके बाद सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का पंजीकरण उम्मीद पोर्टल पर किया गया.
मेरठ में सड़क पर नमाज न पढ़ने की चेतावनी बनी विवाद की वजह
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनकी कुल संख्या लगभग 1.27 लाख है. इनमें से लगभग 1.19 लाख सुन्नी वक्फ बोर्ड की और लगभग 8,000 शिया वक्फ बोर्ड की हैं. दिसंबर तक लगभग 70 प्रतिशत सुन्नी वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण हो चुका था और लगभग 6,500 शिया वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर दर्ज किया गया था. 30 मई को उत्तर प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसका उद्देश्य मदरसा शिक्षा बोर्ड से संबद्ध मान्यता प्राप्त मदरसों के पाठ्यक्रम, नियुक्ति और अन्य प्रणालियों में व्यापक सुधारों के लिए सुझाव देना था. साल के अंत तक भी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था. मार्च में मेरठ पुलिस द्वारा सड़कों पर नमाज़ पढ़ने वाले लोगों के खिलाफ पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने सहित सख्त कार्रवाई की चेतावनी के बाद विवाद खड़ा हो गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीटीआई पॉडकास्ट में इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि मेरठ अधिकारियों ने सही बात कही है. सड़कें आवागमन के लिए होती हैं. आपत्ति करने वालों को हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए.
‘आई लव मोहम्मद’ नारे ने बटोरीं सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2024 के उस फैसले के बाद, जिसमें उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा कामिल और फाजिल पाठ्यक्रम प्रदान करना यूजीसी अधिनियम के विपरीत बताते हुए असंवैधानिक घोषित किया गया था, 2025 में कामिल और फाजिल पाठ्यक्रम कर रहे लगभग 32,000 छात्रों का भविष्य भी अनिश्चित बना रहा. मई में शिक्षक संघ मदरिस अरबिया उत्तर प्रदेश ने इन छात्रों को लखनऊ स्थित उर्दू, अरबी और फारसी भाषा विश्वविद्यालय से संबद्ध करने के निर्देश देने हेतु सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, लेकिन यह मुद्दा अनसुलझा रहा. सितंबर में कानपुर में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के अवसर पर ‘आई लव मोहम्मद’ के बैनरों ने पूरे राज्य में सुर्खियां बटोरीं. बरेली में 26 सितंबर को शुक्रवार की नमाज के बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इत्तेहाद-ए-मिल्लत परिषद के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान और कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया. तौकीर रजा खान की गिरफ्तारी पर विपक्ष ने काफी हल्ला मचाया. सुन्नी वक्फ बोर्ड के इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन द्वारा अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण में देरी भी खबरों में बनी रही, जबकि सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद राम मंदिर का निर्माण औपचारिक रूप से पूरा हो चुका था.
शम्सी जामा मस्जिद-नीलकंठ महादेव मंदिर बने चर्चा का विषय
शाही जामा मस्जिद हरिहर मंदिर होने के दावों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद के कारण सुर्खियों में बनी रही. 23 मार्च को मस्जिद प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जफर अली को नवंबर 2024 में मस्जिद सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के संबंध में गिरफ्तार किया गया था. 1 अगस्त को उनकी रिहाई और उसके बाद निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए किए गए रोड शो के कारण उनके और उनके समर्थकों के खिलाफ नए मामले दर्ज किए गए. बुदाउन में शम्सी जामा मस्जिद-नीलकंठ महादेव मंदिर मामले में भी इसी तरह के विवाद सामने आए, जहां स्थानीय अदालत में क्षेत्राधिकार संबंधी मुद्दे लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं. पिछली सुनवाई 25 नवंबर को हुई थी, और अगली सुनवाई 15 जनवरी को निर्धारित है. होली से पहले तत्कालीन संभल सीओ अनुज चौधरी द्वारा शुक्रवार की नमाज की आवृत्ति की तुलना होली से करने पर एक और विवाद खड़ा हो गया, जो काफी चर्चा में बना रहा.
बारा इमामबाड़ा सम्मेलन ने भी लोगों का खींचा ध्यान
साल के अंत में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उस समय विवादों में घिर गए जब उन्होंने एक सम्मान समारोह में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का बुर्का हटा दिया. समाजवादी पार्टी की नेता सुमैय्या राणा ने 17 दिसंबर को लखनऊ में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और नीतीश कुमार तथा उनका समर्थन करने वाले उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. वर्ष का समापन 28 दिसंबर को लखनऊ में अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के वार्षिक सम्मेलन के साथ हुआ. सम्मेलन में वक्फ सुधारों पर चर्चा हुई, समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन का विरोध किया गया, सच्चर समिति की तर्ज पर शिया मुसलमानों के लिए एक अलग आयोग की मांग की गई और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचारों की निंदा की गई. बैठक में हिजाब के अधिकार, यूसीसी पर पुनर्विचार, मॉब लिंचिंग के खिलाफ सख्त कानून और विधानसभाओं में शिया प्रतिनिधित्व बढ़ाने से संबंधित मांगें भी उठाई गईं. बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना सैयद सईम मेहदी की अध्यक्षता में बारा इमामबाड़ा में आयोजित सम्मेलन में भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश और नेपाल के उलेमाओं और विद्वानों ने भाग लिया. यह कार्यक्रम भी चर्चा में रहा.
ये भी पढ़ेंः पहलगाम हमले से लाल किला धमाके तक, 2025 की इन आतंकी घटनाओं ने देश को झकझोरा
