Akhilesh Yadav: देश में विपक्ष का सूपड़ा साफ होते देख अखिलेश यादव ने एक बार फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने का राग अलापा है.
Akhilesh Yadav: देश में विपक्ष का सूपड़ा साफ होते देख अखिलेश यादव ने एक बार फिर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाने का राग अलापा है. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मतपत्र (बैलेट पेपर) से चुनाव कराने की मांग दोहराई है. उन्होंने अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मतपत्र से वोटिंग होती है, इसलिए भारत में भी यही व्यवस्था होनी चाहिए. विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम पर उठाए जा रहे सवालों के बीच यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने हमें ईवीएम से हराया है, हम भाजपा को ईवीएम से ही फिर हराकर सत्ता से बेदखल करेंगे. उनका यह बयान ब्रिटेन के हालिया स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को मिली कड़ी शिकस्त के बाद आया है.
लड़ना होगा चुनाव माफिया के खिलाफ
आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों पर टिप्पणी करते हुए यादव ने घोषणा की कि हमें एक बहुस्तरीय चुनाव माफिया के खिलाफ लड़ना चाहिए. लोकतंत्र, संविधान और संवैधानिक निकायों की विश्वसनीयता को बचाने के लिए प्रतिबद्ध सभी लोगों को सहयोग करना चाहिए. ये वे लोग हैं जो संघर्ष पैदा करते हैं और भूमिगत ‘संगीसथियों’ की विचारधारा का पालन करते हैं. सपा प्रमुख ने भाजपा पर पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा जितना पैसा चुनाव में खर्च करती है, उतना कोई नहीं कर सकता. मैंने कई बार कहा है कि जनता अंततः उन्हें हरा देगी. आज आपको ये इसलिए बता रहे हैं क्योंकि जब हम बंगाल गए थे तो वहां उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भेजा गया था, चुनाव के बाद पहली बार केंद्रीय बलों को 15 दिन की छुट्टी दी गई है.
बीजेपी को बताया सांप्रदायिकतावादी
भाजपा पर निशाना साधते हुए यादव ने दावा किया कि पार्टी के गठन के बारे में बहुत से लोग जानते हैं. उन्होंने कहा कि भाजपा की स्थापना के समय उसके भीतर इस बात को लेकर बहस चल रही थी कि वह धर्मनिरपेक्ष होगी या समाजवादी. उन्होंने कहा कि बीजेपी के गठन के दौरान अध्यक्षीय भाषण और पारित प्रस्ताव में यह घोषणा की गई थी कि पार्टी समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष रास्ते पर चलेगी. यह केवल एक दिखावा था. वास्तव में यह सांप्रदायिकतावादी और पूंजीवादी बन गया. उन्होंने खुद को समाजवादी दिखाने के लिए सबसे पहले जेपी (जयप्रकाश नारायण) की तस्वीर को मंच पर उतारा.
जनता पर बढ़ा बोझ
तेल कंपनियों के हालिया घाटे का जिक्र करते हुए यादव ने कहा कि बताया गया कि तेल निगमों और सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों को घाटा हो रहा है. इसका मतलब यह हो सकता है कि वे उस घाटे को कवर करने के लिए आपकी जेब से पैसा निकालने की तैयारी कर रहे हैं. उदाहरण के लिए उन्होंने गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ा दी है, तो उस नुकसान की लागत कौन उठाएगा? कहा कि जनता ही इसे भरेगी, क्योंकि सरकार मुनाफे में कटौती नहीं करना चाहती है. आखिरकार, इन मुनाफे को जारी रखने की अनुमति कौन दे रहा है?
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News Source: PTI
