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कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन! कांग्रेस में डिप्टी सीएम और कैबिनेट को लेकर खींचतान तेज

by Live Times 29 May 2026, 6:15 PM IST (Updated 30 May 2026, 12:57 PM IST)
29 May 2026, 6:15 PM IST (Updated 30 May 2026, 12:57 PM IST)
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन! कांग्रेस में डिप्टी सीएम और कैबिनेट को लेकर नई खींचतान तेज

Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो चुका है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली पहुंचे, जहां दिनभर कांग्रेस हाईकमान के साथ नई सरकार और शक्ति संतुलन को लेकर बैठकों का दौर चलता रहा. अब लगभग साफ माना जा रहा है कि डीके शिवकुमार कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री होंगे. हालांकि इसके साथ ही कांग्रेस के भीतर कैबिनेट गठन, डिप्टी सीएम पद और राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर नई खींचतान भी तेज हो गई है.

नई सरकार के गठन पर चर्चा

दरअसल कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की पूरी पटकथा अब दिल्ली दरबार में लिखी जा रही है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के एक दिन बाद सिद्धारमैया ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. सूत्रों के मुताबिक इन बैठकों में नेतृत्व परिवर्तन, नई सरकार के गठन और कैबिनेट विस्तार पर लंबी चर्चा हुई.

इससे पहले बेंगलुरु स्थित अपने सरकारी आवास पर सिद्धारमैया ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ बैठक कर इस्तीफे की जानकारी दी थी और बताया था कि पार्टी आलाकमान ने डीके शिवकुमार को अगला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है. इसके बाद सिद्धारमैया ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया, जिसे शुक्रवार सुबह स्वीकार कर लिया गया.

हालांकि नई सरकार के गठन तक वह कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे. सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान सिद्धारमैया ने सिर्फ सत्ता हस्तांतरण ही नहीं, बल्कि नई सरकार में अपने प्रभाव को बनाए रखने की कोशिश भी की. बताया जा रहा है कि उन्होंने राज्यसभा और विधान परिषद नियुक्तियों के लिए अपने पसंदीदा नेताओं की सूची हाईकमान को सौंपी है. साथ ही मंत्रालयों के बंटवारे और अपने करीबी नेताओं को अहम जिम्मेदारी देने की मांग भी रखी है.

बेटे के लिए महत्वपूर्ण मंत्रालय की पैरवी

इसी बीच सिद्धारमैया ने अपने बेटे और विधान परिषद सदस्य यतींद्र सिद्धारमैया के लिए नई कैबिनेट में महत्वपूर्ण मंत्रालय की पैरवी भी की है. चिकित्सा शिक्षा, उद्योग, पिछड़ा वर्ग कल्याण और जल संसाधन जैसे विभागों पर चर्चा होने की बात कही जा रही है. उधर डीके शिवकुमार ने भी दिल्ली में पार्टी आलाकमान से मुलाकात कर नई सरकार के स्वरूप और शक्ति संतुलन पर चर्चा की.

सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की एक अहम बैठक भी हुई, जिसमें वरिष्ठ नेता केजे जॉर्ज मौजूद रहे. बैठक में कैबिनेट विस्तार और मंत्रालयों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा हुई. सूत्रों की मानें तो डीके शिवकुमार अगले हफ्ते नए मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. कांग्रेस इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए चार डिप्टी सीएम बनाने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है.

डिप्टी सीएम के पांच दावेदार

हालांकि पार्टी के भीतर पांच बड़े नेता इस पद के दावेदार बताए जा रहे हैं. इनमें प्रियंक खड़गे, जी परमेश्वर, एमबी पाटिल, केजे जॉर्ज और ज़मीर अहमद के नाम प्रमुख हैं. चर्चा यह भी है कि नई कैबिनेट में करीब 10 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि कई नए चेहरों को मौका मिलेगा. दरअसल 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान की चर्चा रही थी. उस समय ‘ढाई-ढाई साल’ के फॉर्मूले की खबरें सामने आई थीं, हालांकि कांग्रेस ने इसे कभी आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया. अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि वही फॉर्मूला लागू किया जा रहा है. कांग्रेस अब ओबीसी और वोक्कालिगा सामाजिक समीकरणों के बीच संतुलन साधते हुए 2028 विधानसभा चुनावों की रणनीति पर भी काम कर रही है.

वहीं सत्ता परिवर्तन के साथ कांग्रेस के भीतर राजनीतिक विरासत और परिवारवाद की चर्चा भी तेज हो गई है. सिद्धारमैया जहां अपने बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए अहम मंत्रालय की पैरवी करते दिख रहे हैं, वहीं डीके शिवकुमार के भाई और सांसद डीके सुरेश को भी भविष्य में बड़ी भूमिका मिलने की चर्चा है. इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियंक खड़गे के लिए डिप्टी सीएम पद की चर्चाओं ने भी परिवारवाद के आरोपों को फिर हवा दे दी है.

डीके के सामने कई चुनौतियां

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि डीके शिवकुमार के लिए सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सरकार चलाना नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग शक्ति केंद्रों को संतुलित रखना होगा. सिद्धारमैया खेमे का प्रभाव, डिप्टी सीएम पद के कई दावेदार, कैबिनेट में हिस्सेदारी की मांग और नेताओं के परिवारों की बढ़ती राजनीतिक भूमिका आने वाले समय में उनके लिए बड़ा दबाव बन सकती है. यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के बाद भी डीके शिवकुमार के सामने असली चुनौती सत्ता और संगठन के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी.

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खुशबू सिंह की रिपोर्ट

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