Home Latest News & Updates 142 साल बाद महिला क्रिकेटरों ने रचा इतिहास! लॉर्ड्स पर जीता पहला टेस्ट मैच; पुरुषों को लगे थे 54 साल

142 साल बाद महिला क्रिकेटरों ने रचा इतिहास! लॉर्ड्स पर जीता पहला टेस्ट मैच; पुरुषों को लगे थे 54 साल

by Sachin Kumar 13 July 2026, 9:52 PM IST (Updated 13 July 2026, 9:53 PM IST)
13 July 2026, 9:52 PM IST (Updated 13 July 2026, 9:53 PM IST)
Indian team won first Test match Lords

IND vs ENG Test Match: ऐतिहासिक मैदान लॉर्ड्स पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है. लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में महिला क्रिकेट टीम ने मेजबानी इंग्लैंड को 270 रनों से हरा दिया और हर एक क्रिकेट प्रेमी को हैरान कर दिया. इस जीत के साथ ही टीम इंडिया ने इतिहास के पन्नों में अपने आपको अमर कर लिया. भारत की इस जीत में बल्लेबाज यास्तिका भाटिया और तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ की अहम भूमिका रही. साथ ही दोनों क्रिकेटरों ने ऐतिहासिक ऑनर्स बोर्ड पर अपना नाम दर्ज करके गौरव हासिल कर लिया है. वहीं, पुरुष क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ निराशाजनक प्रदर्शन दिखाया. हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान श्रेयस अय्यर पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं. साथ ही लगातार दो सीरीज में हार के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने समीक्षा बैठक बुलाने की बात कही गई है और इस मीटिंग में किन जगहों पर गलतियों हुई हैं उसको लेकर चर्चा हो सकती है. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर टीम के सेलेक्शन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि आईपीएल को ध्यान में रखकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीम बनाई गई है. इसी बीच पुरुषों की हार के बाद महिला क्रिकेटर्स ने देश का मान बढ़ा लिया है और कई बड़ी उपलब्धियों को भी हासिल कर लिया है.

Indian team won first Test match Lords

यास्तिका भाटिया ने खेली कमाल की पारी

21 से 23 जुलाई 1884 के बीच लॉर्ड्स के मैदान पर इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया था. इस मैच में इंग्लैंड ने एक पारी और 5 रनों से ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया था. दूसरी तरफ उस मैच के करीब 142 साल बाद महिला टेस्ट क्रिकेट का पहला मुकाबला खेला गया, जिसमें इंग्लिश टीम को हार का सामना करना पड़ा. इस मैच में भारत की तरफ से यास्तिका भाटिया ने तूफानी अंदाज में शतकीय पारी खेली और क्रांति गौड़ ने पांच विकेट लेकर इतिहास रच दिया. आपको बताते चलें कि इंग्लैंड ने टॉस जीतने के बाद पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया. इसके बाद भारतीय टीम ने पहली पारी में 285 रन बनाए. इस दौरान स्मृति मंधाना ने 83 और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 58 रनों की पारी खेली. इसके बाद इंग्लिश टीम जब मैदान पर बल्लेबाजी करने के लिए उतरी तो भारतीय टीम ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 170 रनों पर ऑलआउट कर दिया और 115 रनों की बढ़त हासिल कर ली.

वहीं, पहली पारी में क्रांति गौड़ ने 37 रन देकर पांच विकेट चटकाने का काम किया और अपना नाम हॉल ऑफ फेम में दर्ज करा लिया. वह लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट मैच में पांच विकेट लेने वाली पहली गेंदबाज बन गई हैं. इसी कड़ी में सायली सातघरे और स्नेह राणा दो-दो विकेट लिए और दीप्ति शर्मा को एक विकेट पर खुश रहना पड़ा.

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शतक लगाकर रच दिया इतिहास

इंग्लैंड के खिलाफ दूसरी पारी में भारतीय टीम के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करके दिखाया. इस दौरान विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने शतकीय पारी खेली. इसके साथ ही यास्तिका लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट मैच में शतक लगाने वाली पहली महिला क्रिकेटर्स बन गई हैं. उन्होंने 113 रन बनाए और इस दौरान 14 चौके लगाने का भी काम किया. इसके अलावा स्मृति मंधाना ने भी दूसरी पारी में 70 रनों की पारी खेली. वहीं, ऋचा घोष ने अर्धशतक लगा दिया. भारतीय टीम ने दूसरी पारी में 7 विकेट के नुकसान पर 341 रनों पर अपनी पारी घोषित कर दी और इंग्लैंड को 457 रनों का लक्ष्य दिया. दूसरी पारी में भी भारतीय टीम के गेंदबाजों ने बहुत सटीक गेंदबाजी की और इंग्लिश टीम कम कर पर ही सिमटा दिया. इस दौरान स्पिनर स्नेह राणा ने 42 रन देकर चार विकेट चटकाए. वहीं, सायली सातघरे, क्रांति गौड़ और दीप्ति शर्मा ने 2-2 विकेट लेने का काम किया.

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यास्तिका ने दिया स्मृति को क्रेडिट

यास्तिका भाटिया ने अपने घुटने की चोट से उभरने के बाद मैदान पर शानदार वापसी की है. उन्होंने इस वापसी का श्रेय स्मृति मंधाना को दिया. साल 2017 में मंधाना भी इसी तरह चोटिल हुई थी और अब इसका अनुभव यास्तिका को भी मिला. इसके बाद वह तेजी से अपने चोट को कवर करने लगीं. लॉर्ड्स पर तीसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद यास्तिका ने कहा कि मैंने चोट लगने के बाद स्मृति मंधाना से बात की थी. उन्होंने मेरी ओर देखकर कहा कि यह चोट तुम्हारी करियर का एक टर्निंग प्वाइंट साबित होगी. उन्होंने आगे कहा कि चोटिल होने के बाद स्मृति ने मेरा मनोबल बढ़ाया. साथ ही रीहैब और क्रिकेट की दुनिया से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला. साथ ही इस समय का इस्तेमाल मैंने सही तरीका से किया तो मुझे वापसी करने में ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा. बता दें कि यास्तिका ने अभी तक चार टेस्ट मैचों की सात पारियों में 223 रन बनाए हैं. इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 113 रन रहा है. साथ ही उन्होंने ने 28 वनडे मैचों में 24.67 के औसत से 666 रन बनाए हैं. वनडे में उनका बेस्ट स्कोर 64 रन है.

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पूर्व क्रिकेटरों ने बांधे तारीफों के पुल

यास्तिका की यह शतकीय पारी के बाद कई पूर्व क्रिकेटर्स ने तारीफों के पुल बांधे हैं. पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन ने कहा कि यास्तिका इस यादगार पारी के लिए बहु-बहुत बधाई. उम्मीद करता हूं कि आप आगे भी इस तरह अपने बल्ले से शतक लगाती रहेंगी. पूर्व क्रिकेटर इयान बिशन ने कहा कि यास्तिका लॉर्ड्स के मैदान पर शानदार उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने अपने करियर का पहला शतक जड़ा है और वह क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स पर. साथ ही इस टेस्ट मैच में यास्तिका की पारी शानदार रही.

Indian team won first Test match Lords

कमेंटेटेर हर्षा भोगले ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि जैसे ही क्रिकेट सिर्फ ताकत का खेल नहीं रह जाता है और तकनीक के साथ कौशल का खेल बन जाता है तो भारतीय टीम अपने अलग रूप में दिखती है. इस टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करके दिखाया है और उन्होंने इंग्लैंड की टीम पर हावी होकर क्रिकेट खेला. वहीं, पूर्व क्रिकेटर रवि शास्त्री ने कहा कि यास्तिका और क्रांति आप दोनों ने कमाल कर दिया है. क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर आपका स्वागत है. अब यह उपलब्धि आपके साथ जिंदगी भर रहेगी. हर भारतीय महिला क्रिकेटर जो इस मैदान पर खेलने का सपना देखती है उसके लिए यह एक प्रेरणा के रूप में काम करेगा.

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भारतीय क्रिकेटर कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने यास्तिका और क्रांति को बधाई दी. बोर्ड ने एक्स अकाउंट पर लिखा कि एक सपना लेकर मैदान पर उतरी और इतिहास रचकर मैदान पर से लौटी. यास्तिका भाटिया का वो खास लम्हा, जब वह लॉर्ड्स में महिला क्रिकेट की पहली शतकवीर बनी.

54 साल बाद मिली थी पुरुषों को कामयाबी

भारतीय पुरुष टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर अपना पहला टेस्ट मैच 25 से 28 जून 1932 को खेला था. इस दौरान भारतीय टीम को 158 रनों से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. इसके बाद 1982 तक टीम को लगातार 9 और टेस्ट मैच में हार का सामना करना पड़ा. लॉर्ड्स के मैदान पर लगातार 10 टेस्ट मैच में हार के बाद भारत को 11वें टेस्ट मैच में साल 1986 में 54 साल बाद जीत हासिल हुई. उस वक्त भारतीय टीम की कप्तानी कपिल देव संभाल रहे थे. कपिल देव को इस मुकाबले में प्लेयर ऑफ द मैच के लिए भी चुना गया था. 5 से 10 जून, 1986 के बीच खेले गए टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने 5 विकेट से जीत हासिल की थी. उन्होंने पहली पारी में 67 रन देकर एक विकेट हासिल किया और दूसरी पारी में 52 रन देकर चार विकेट चटकाने का काम किया था. वहीं, दिलीप वेंगसरकर ने पहली पारी में शानदार शतकीय पारी खेली थी. इस दौरान उन्होंने 126 रन बनाए थे और इस जीत के बाद भारतीय टीम ने इतिहास रच दिया था.

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लॉर्ड्स को क्यों माना जाता है ऐतिहासिक ग्राउंड?

क्रिकेट की दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित मैदान इंग्लैंड के लंदन में स्थित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड है. इसको दुनिया भर में ‘होम ऑफ क्रिकेट’ कहा जाता है. मौजूदा लॉर्ड्स मैदान का उद्घाटन 1814 में हुआ था और इसकी स्थापना क्रिकेट प्रेमी थॉमस लॉर्ड ने की थी. इसके बाद मैदान का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा गया. बताया जाता है कि लॉर्ड्स का इतिहास इससे भी पुराना है. थॉमस लॉर्ड ने पहला लॉर्ड्स मैदान 1787 में बनाया था. इसके बाद 1811 में दूसरा मैदान अस्तित्व में आया, लेकिन रीजेंट्स कैनाल के निर्माण के कारण उसे स्थानांतरित करना पड़ा. आखिर में 1814 में सेंट जॉन्स वुड में वर्तमान लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड तैयार हुआ, जो आज भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का सबसे प्रतिष्ठित मैदान माना जाता है.

इसके अलावा लॉर्ड्स की पहचान सिर्फ इसकी ऐतिहासिक विरासत नहीं, बल्कि अनूठी परंपराओं से भी है. मैदान का प्रतिष्ठित पवेलियन 1890 में बना और यह विश्व क्रिकेट की सबसे प्रसिद्ध इमारतों में गिना जाता है. मैदान की प्राकृतिक ढलान भी इसे अन्य क्रिकेट मैदानों से अलग बनाती है, जिसका असर गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों के खेल पर पड़ता है. बता दें कि 1884 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच पहला टेस्ट मैच खेला गया था. इसके बाद से लॉर्ड्स ने कई ऐतिहासिक टेस्ट, वनडे और विश्व कप फाइनल की मेजबानी की है.

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