MP Rajya Sabha Elections: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चल रहा सियासी घमासान आखिरकार भाजपा की एकतरफा जीत के साथ समाप्त हो गया. भारतीय जनता पार्टी ने तीनों सीटों पर निर्विरोध फतह हासिल कर ली है. गुरुवार को नामांकन वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग ने भाजपा के तीनों नवनिर्वाचित सांसदों राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, प्रदेश महामंत्री रजनीश अग्रवाल और महेश केवट के निर्वाचन को आधिकारिक मंजूरी देते हुए उन्हें प्रमाण-पत्र सौंप दिए.
निर्वाचित सांसदों को मिले सर्टिफिकेट
तीनों नवनिर्वाचित सांसदों ने भोपाल स्थित मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचकर निर्वाचन पदाधिकारी से अपना सर्टिफिकेट प्राप्त किया. इस अवसर पर स्थानीय विधायक भगवानदास सबनानी, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल, किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा सहित भारी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे. प्रमाणपत्र मिलने के बाद पूरी विधानसभा भारत माता की जय के नारों से गूंज उठी और कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाई बांटकर जश्न मनाया. नवनिर्वाचित सांसदों ने इस जिम्मेदारी के लिए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा कि वे उच्च सदन में मध्य प्रदेश के विकास और जनहित के मुद्दों को पूरी मजबूती से उठाएंगे.
जानिए पूरा सियासी और कानूनी घटनाक्रम
- तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने पर्याप्त संख्या बल होने के कारण पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था. लेकिन 9 जून को भाजपा की आपत्ति के बाद स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने तकनीकी कमियों का हवाला देते हुए नटराजन का नामांकन फॉर्म निरस्त कर दिया. इसके बाद से ही कांग्रेस खेमे में हडक़ंप मच गया और भाजपा की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ दिखने लगा.
- नामांकन निरस्त होने के खिलाफ बुधवार दोपहर करीब 12 बजे कांग्रेस का एक 10 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयोग से मिला. कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पूर्वाग्रह से ग्रसित बताते हुए शिकायत दर्ज कराई, हालांकि चुनाव आयोग की तरफ से इस पर कोई त्वरित फैसला या बयान सामने नहीं आया.
- दिल्ली में बात नहीं बनने पर कांग्रेस ने बुधवार और गुरुवार की देर रात सुप्रीम कोर्ट में ऑनलाइन याचिका दाखिल की. गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि नामांकन वापसी की अंतिम तिथि गुरुवार दोपहर 3 बजे तक है, इसलिए इस मामले की सुनवाई तुरंत की जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि कोर्ट के फैसले तक चुनाव परिणाम घोषित न किए जाएं.
दूसरी ओर चुनाव आयोग के वकीलों ने कहा कि उन्हें याचिका की कॉपी देर से मिली है, इसलिए जवाब देने के लिए समय चाहिए. इसके बाद देश की सर्वोच्च अदालत ने नियमों का हवाला देते हुए मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी. - सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने के बाद भी कांग्रेस ने परिणाम घोषित न करने की मांग दोहराई. वर्तमान में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठक चल रही है. इसके साथ ही मध्य प्रदेश कांग्रेस के विधायकों ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय भी मांगा है, ताकि वे इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर सकें.
न्याय मिलने में देरी क्यों: उमंग सिंघार
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने और भाजपा उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र मिलने के बाद प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में मीडिया से बात करते हुए चुनाव आयोग और सरकार पर तीखे हमले बोले. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि चुनाव आयुक्त चाहते तो कल ही इस पर निर्णय दे सकते थे. हरियाणा और गुजरात के मामलों में जब चुनाव आयोग हस्तक्षेप कर सकता है तो मध्य प्रदेश में क्यों नहीं?
कहा कि झारखंड में भाजपा उम्मीदवार के फॉर्म को मान्य कर दिया जाता है, लेकिन मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म निरस्त कर दिया जाता है. इससे साफ है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है. हमें उम्मीद है कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा, लेकिन सवाल यह है कि न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है. फिलहाल तकनीकी और कानूनी रूप से भाजपा के तीनों उम्मीदवार अब राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो चुके हैं, लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर अब भी सबकी निगाहें टिकी हुई हैं.
निशांत कुमार और पवन सिंह समेत सभी 9 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए MLC, विधान परिषद का रिजल्ट घोषित
