Yemen-Saudi Arabia War : अमेरिका और ईरान के बीच अभी जंग शांत नहीं हुई है कि पश्चिम एशिया में एक और नया संकट पैदा हो गया है. ईरान समर्थित हूती और सऊदी अरब के बीच नए युद्ध की शुरुआत हो गई है. हालांकि, दोनों के बीच काफी साल से दुश्मनी चली आ रही है. लेकिन इस बार हूतियों ने सऊदी अरब की कमर पर सीधी चोट पहुंचाने का काम किया है. सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं. हूतियों ने यह हमला सऊदी अरब की तरफ से किए गए यमन के बंदरगाह शहर होदेइदा पर अटैक का बदला है. इसी बीच पश्चिम एशिया में भड़की इस नई आग ने सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं बल्कि पूरे ग्लोबल ऑयल मार्केट की नींद उड़ा दी है. अगर ये इसी तरह जंग आगे बढ़ी तो दुनिया मंदी की तरफ तेजी से आगे बढ़ सकती है और कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर से आसमान छू सकती है. इसी बीच हूती विद्रोहियों ने शनिवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब पर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं. यह जंग मध्य पूर्व में जरूरी शिपिंग रूट पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान के बीच तनाव को बढ़ा रही है.
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दोनों शहरों में कई बार अलर्ट बजाए गए
हूती विद्रोहियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा कि इस हमले में लाल सागर के शहरों यानबू और जिजान में मौजूद अरामको की सुविधाओं को निशाना बनाया गया. सऊदी अरब के सिविल डिफेंस ने बताया कि शनिवार तड़के दोनों शहरों में कई बार अलर्ट बजाए गए. हालांकि, सऊदी सरकार ने इसके बारे में विस्तार नहीं बताया. इसी बीच ईरान में किसी हमले की कोई खबर सामने नहीं आई, जो पिछले करीब दो हफ्तों से अमेरिका लगातार हमला कर रहा था. इसके अलावा लाल सागर में तनाव बढ़ने से ग्लोबल शिपिंग पर पहले के मुकाबले ज्यादा खतरा मंडरा रहा है. हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के लिए बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद कर देंगे. हूतियों की तरफ से यह कदम सऊदी अरब की नाकेबंदी और यमन की राजधानी सना के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के जवाब में उठाया जा रहा है. वहीं, हूती-नेतृत्व वाली सुप्रीम पॉलिटिकल काउंसिल के प्रमुख महदी अल-मशात ने कहा कि हूतियों द्वारा बाब-अल-मंदेब की नाकेबंदी न करने के लिए आक्रामकता खत्म करने और नाकेबंदी हटाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है. दूसरी तरफ हूती बाब-अल-मंदेब को इसलिए निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वह अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित यह और यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला एक अहम शिपिंग मार्ग है. यहां से दुनिया का करीब 12 प्रतिशत क्रूड ऑयल से लेकर अन्य सामान गुजरता है.

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टैंकरों को बनाया गया निशाना
हूतियों ने इस हफ्ते लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को अपना निशाना बनाया है. इसके जवाब में सऊदी अरब ने होदेइदा पर हमला किया. हूतियों का विरोध करने वाले सऊदी समर्थकों ने इसके बारे में पूरी जानकारी साझा की. हूती-संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही ने बताया कि शुक्रवार की रात हमलों में बंदरगाह और सरकारी टेलीकम्युनिकेशन कॉर्पोरेशन को निशाना बनाया गया और इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई. सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने बंदरगाह पर कोई हमला नहीं किया है बल्कि उन्होंने होदेइदा प्रांत में वैध सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. उन्होंने यह भी कहा कि इन वैध ठिकानों से लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाता रहा है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि यमन संघर्ष को सैन्य टकराव के बिना सुलझाने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सुलझाने की जरूरत है. साथ ही ईरान ने कमर्शियल जहाज पर यूक्रेनी हमले की निंदा की. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमानपुर ने अपनी एक पोस्ट में लिखा कि ईरान में रात शांति से गुजरी. हालांकि, ईरान की इस टिप्पणी का US सेंट्रल कमांड ने कोई जवाब नहीं दिया है. बीती 13 रातों से जारी हमलों के बीच कोई नया हमला नहीं किया है. लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुए हमले की निंदा की, जिस पर यूक्रेन का हमला बताया गया है. ईरानी मंत्रालय का कहना है कि इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है और एक अन्य घायल हुआ है. ईरान ने इसको आक्रामकता की कार्रवाई करार दिया.
नेतन्याहू जाएंगे अमेरिका
एक अन्य बयान में अरागची ने कहा कि उन्होंने इस बारे में यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास से बात की और तेहरान ने भी इस जवाब की मांग की है. साथ ही ईरान में यूक्रेन के राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया है. इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने X पर कहा था कि यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में लंबी दूरी के हमलों से बहुत अच्छे नतीजे हासिल किए हैं, जिसमें ईरान से जुड़े सैन्य कार्गो शिपमेंट में इस्तेमाल होने वाले जहाज भी शामिल हैं. इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की चर्चा फिर से शुरू हो गई हैं और अगर सहमति बनती है तो कुछ दिनों में फिर से सैन्यविराम लागू हो सकता है. वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्त अमेरिका की यात्रा करेंगे और मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात भी करेंगे. बता दें कि बेंजामिन की इससे पहले मुलाकात वाशिंगटन में फरवरी में हुई थी. दूसरी तरफ बड़े ऑपरेशन्स को रोकने वाला अमेरिका और ईरान के बीच कमजोर सीजफायर इस महीने खत्म होने वाला है. अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाया और जवाब में ईरान में दर्जनों ठिकानों पर हमले किए. इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी के अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पर हमले किए हैं. अमेरिकी सेना ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पड़ोसी देशों के लोगों को अमेरिकी सैनिकों ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है.

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ईरान में मारे गए 3,400 से ज्यादा लोग
अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस जंग में अभी तक ईरान में 3,400 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. साथ ही पूरे क्षेत्र में 18 अमेरिकी सैनिक, इजरायल में 24 नागरिक और विदेशी कामगारों व नाविकों समेत कुछ अन्य आम नागरिक भी मारे गए हैं. लेबनान में युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह उग्रवादियों द्वारा इस्लामिक रिपब्लिक के समर्थन में इजरायल पर हमले करने और इजरायल द्वारा हवाई हमलों व ज़मीनी सेना के साथ जवाबी कार्रवाई करने के बाद से 4,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. इसमें 38 इजरायली सैनिक भी शामिल हैं.
बीते दिनों पहले अमेरिका ने किए कई हमले
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी थी कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर गोली चलाने पर अमेरिका हर बार एक पुल या बिजली संयंत्र को नष्ट कर देगा. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था, अब से जब भी इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य उपकरण या हथियार से हमला करेगा, तो संयुक्त राज्य अमेरिका पुल या बिजली संयंत्र पर बमबारी करके उसे नष्ट कर देगा. वहीं, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा था कि उनका देश आंख के बदले आंख की रक्षा नीति अपनाएगा. उन्होंने बुधवार को एक्स पर पोस्ट किया और कहा कि ईरान के खिलाफ हमारे बुनियादी ढांचे सहित किसी भी प्रकार की आक्रामकता का जोरदार और निर्णायक जवाब दिया जाएगा.

इससे पहले 21 जुलाई को ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर हमला किया, जिससे उसके क्रू को जहाज छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. वहीं, इस अहम जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका ने इस्लामिक रिपब्लिक को निशाना बनाते हुए एक और हवाई हमले किए. अमेरिका की तरफ से लगातार 10 रातों के हवाई हमलों के बावजूद तेहरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली नहीं की है. शांति के समय में दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था. हालांकि अमेरिका और ईरान फिर से पूर्ण युद्ध के करीब पहुंच रहे हैं, फिर भी ईरान के गृह मंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान गए, जो इस संघर्ष में एक अहम मध्यस्थ है. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि लड़ाई खत्म करने के लिए किस नई डील पर सहमति बन सकती है.
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