Bhopal Eiffel Tower: आपने पेरिस का एफिल टावर कई बार देखा होगा, लेकिन इन दिनों भोपाल का एफिल टावर ज्यादा चर्चा में हैं. आप भी जानें क्या है वायरल टावर का सच.
12 February, 2026
90 डिग्री वाला ऐशबाग ब्रिज देखा, फिर ठिगना मेट्रो स्टेशन देखा और अब देखिए भोपाल का एफिल टावर. दरअसल, झीलों की नगरी भोपाल में अजूबों की कमी नहीं है, लेकिन ये नया अजूबा किसी की जान पर भारी पड़ सकता है. करोंद इलाके में एक ऐसा हाईटेंशन टावर है, जिसके पैरों के बीच से धड़ल्ले से गाडिय़ां गुजर रही हैं. क्या ये इंजीनियरिंग का नमूना है या फिर प्रशासनिक लापरवाही की नतीजा. ये टावर भोपाल के करोंद इलाके की विनायक कॉलोनी में बनाया गया है. दूर से देखने पर लगेगा कि पेरिस का ‘एफिल टॉवर’ भोपाल शिफ्ट हो गया है, लेकिन हकीकत उससे कहीं ज्यादा डरावनी है. दरअसल, लाखों वोल्ट का करंट लेकर खड़ा ये हाईटेंशन टावर किसी सडक़ के किनारे नहीं, बल्कि खुद सडक़ के ऊपर खड़ा है.
मौत का साया
लोकल लोगों की मानें तो बारिश के मौसम में यहां मौत का साया मंडराता है. लोहे के इस विशालकाय ढांचे से सटकर निकलना किसी स्टंट से कम नहीं. बिजली विभाग शिफ्टिंग की फाइलें तो घुमा रहा है, लेकिन जमीन पर ये टावर जस का तस खड़ा है. अब इस मुद्दे पर सियासत भी गरमा गई है. कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे खतरों का टावर करार दिया है. उन्होंने कहा कि 90 डिग्री ब्रिज और ठिगने मेट्रो स्टेशन के बाद ये बीजेपी सरकार का एक और ऐसा अजूबा है जो जनता की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है.
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टावर पर सियासत
इधर बिजली कंपनी कह रही है कि कोशिश जारी है, विपक्ष कह रहा है कि सरकार सो रही है, लेकिन इन सबके बीच विनायक कॉलोनी के लोग हर रोज मौत के इस दरवाजे से गुजरने को मजबूर हैं. सवाल ये है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर इस ‘भोपालिया एफिल टॉवर’ को जल्द ही यहां से विदाई मिलेगी.
-भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट
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