Home Latest News & Updates वक्त भी नहीं भर पाया अहमदाबाद विमान हादसे का जख्मः आज भी पसरा है सन्नाटा, गवाही दे रही हैं जली दीवारें

वक्त भी नहीं भर पाया अहमदाबाद विमान हादसे का जख्मः आज भी पसरा है सन्नाटा, गवाही दे रही हैं जली दीवारें

by Nikul Patel 11 June 2026, 6:50 PM IST
11 June 2026, 6:50 PM IST
वक्त भी नहीं भर पाया अहमदाबाद विमान हादसे का जख्म

Ahmedabad Plane Crash: समय के साथ बहुत कुछ बदल जाता है. इमारतें दोबारा खड़ी हो जाती हैं, सड़कें फिर आबाद हो जाती हैं और लोग अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाते हैं. लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जो सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं बनते, बल्कि लोगों की यादों, भावनाओं और दिलों में हमेशा के लिए बस जाते हैं. 12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुआ विमान हादसा भी ऐसा ही एक जख्म है, जिसे एक साल बाद भी वक्त नहीं भर पाया है. इस दर्दनाक हादसे की पहली बरसी पर Live Times की टीम उस जगह पहुंची, जहां एक साल पहले आसमान से मौत बरसी थी.

टीम ने एक बार फिर उसी जगह का रुख किया, जहां उन्होंने हादसे के समय के भयावह हालात अपनी आंखों से देखे थे. आज वहां सन्नाटा है, लेकिन उस सन्नाटे के पीछे छिपी चीखें और दर्द आज भी महसूस किए जा सकते हैं. हादसे वाली जगह पर पहुंचते ही सबसे पहले नजर उस हॉस्टल की इमारत पर पड़ती है, जो आज भी जली हालात में खड़ी है. दीवारों पर कालिख के निशान हैं, खिड़कियां टूटी हुई हैं और आसपास बिखरा मलबा उस दिन की तबाही की गवाही देता है. हॉस्टल के आसपास खड़े कई पेड़ भी उस भीषण आग की चपेट में आए थे. एक साल बाद भी उनके तनों पर जलने के निशान साफ दिखाई देते हैं. ऐसा लगता है मानो यहां समय एक साल पहले ही ठहर गया हो.

प्रत्यक्षदर्शियों की आंखों में आज भी वही खौफ

हादसे के बाद सबसे पहले मदद के लिए दौड़ने वालों में एक स्थानीय वकील भी शामिल थे. उन्होंने Live Times
से बातचीत में बताया कि विमान उनके घर से करीब 700 मीटर दूर गिरा था. उन्होंने कहा कि जैसे ही हादसे की जानकारी मिली, मैं मौके पर पहुंच गया. हॉस्टल में कई डॉक्टर मौजूद थे. वहां का दृश्य इतना भयावह था कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. चारों तरफ आग, धुआं और चीख-पुकार थी. कई शव बिखरे पड़े थे. वकील बताते हैं कि एक साल बाद भी उस दिन की तस्वीरें उनके जेहन से नहीं निकली हैं. हादसे की जगह से गुजरते समय आज भी उन्हें वही दृश्य याद आ जाते हैं.

मौत को सामने से देखा

हादसे के समय सिविल अस्पताल का एक कर्मचारी भी उसी रास्ते से गुजर रहा था. उसने जो देखा, वह उसकी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बन गया. उसने बताया कि मैं यहां से गुजर रहा था तभी अचानक जोरदार धमाके के साथ विमान गिरा. आग की ऊंची लपटें उठ रही थीं. लगातार विस्फोट हो रहे थे. मुझे समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है. उस समय एक महिला का कटा हुआ सिर मेरे पैरों के पास आकर गिरा. वह दृश्य आज भी मेरी आंखों के सामने घूमता है. उस कर्मचारी के मुताबिक, हादसे के बाद से इलाके का माहौल पूरी तरह बदल गया है. रात के समय यहां का सन्नाटा लोगों को डरा देता है.

देर रात यहां से गुजरने में लगता है डर

स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के एक साल बाद भी इस इलाके में रात के समय एक अलग तरह का भय महसूस होता है. कई लोग दावा करते हैं कि देर रात यहां से गुजरने में उन्हें डर लगता है. रात 11 बजे के बाद सड़कें लगभग सुनसान हो जाती हैं. कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की भयावहता इतनी गहरी थी कि उसकी यादें आज भी लोगों का पीछा नहीं छोड़तीं. कई लोग रात के समय यहां से गुजरने से बचते हैं. हालांकि, यह लोगों की व्यक्तिगत अनुभूति और भावनाएं हैं, लेकिन इतना जरूर है कि इस हादसे ने पूरे इलाके के मानसिक और भावनात्मक माहौल पर गहरा असर छोड़ा है.

जब जिंदगी बचाने की जंग शुरू हुई

हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य में जुटे 108 इमरजेंसी सेवा के सुपरवाइजर ने भी Live Times से अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि मैं सिविल अस्पताल में मौजूद था. विमान हादसे की जानकारी मिलते ही हमारी टीम मौके पर पहुंची. वहां हालात बेहद भयावह थे.कई लोग घायल अवस्था में मदद के लिए पुकार रहे थे. हमने जितने लोगों को बचा सकते थे, बचाने की कोशिश की. कई लोगों को जिंदा बाहर निकाला गया, लेकिन कई लोग हमारी आंखों के सामने दम तोड़ चुके थे. उनके मुताबिक, राहत और बचाव कार्य के दौरान जो दृश्य उन्होंने देखे, उन्हें भूल पाना आज भी संभव नहीं है.

सिर्फ विमान नहीं गिरा था, सैकड़ों सपने भी टूटे थे

उस दिन इस जगह पर सिर्फ एक विमान नहीं गिरा था. उसके साथ कई परिवारों की उम्मीदें, सपने और खुशियां भी बिखर गई थीं. किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपनी बेटी. कोई अपने पति को हमेशा के लिए खो बैठा तो किसी की मां उससे हमेशा के लिए दूर हो गई. हादसे के बाद अपने प्रियजनों की तलाश में पहुंचे परिवारों की चीखें और आंसू आज भी इस जगह की फिजा में महसूस किए जा सकते हैं.

एक साल का समय गुजर चुका है. कैलेंडर में तारीख बदल गई है, लेकिन इस जगह पर दर्द की घड़ी जैसे थम सी गई है. आज भी जली हुई दीवारें, टूटी खिड़कियां और काले पड़ चुके पेड़ उस भयावह दोपहर की कहानी सुनाते हैं. कुछ घाव वक्त के साथ भर जाते हैं, लेकिन कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहते हैं. अहमदाबाद का यह विमान हादसा भी उन्हीं जख्मों में से एक है. एक ऐसा दर्द, जिसे शायद वक्त भी कभी पूरी तरह मिटा नहीं पाएगा.

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