Operation Mule Accounts: गुजरात के राजकोट जिले में साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन म्यूल अकाउंट’ चलाया है. इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने उन लोगों के खिलाफ शिकंजा कसा है, जो मामूली रकम के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों और आर्थिक अपराधियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध करा रहे थे. पुलिस ने इस मामले में 16 आरोपियों के खिलाफ जिले के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 8 एफआईआर दर्ज की हैं.
10 से 20 हजार रुपये की लालच में अपराध
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने व्यक्तिगत बैंक खाते केवल 10 से 20 हजार रुपये के बदले ऑनलाइन ठगों को किराए पर दे देते थे. इन खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाले साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, फर्जी निवेश योजनाओं और जीएसटी चोरी से जुड़े काले धन के लेन-देन के लिए किया जाता था. ऐसे बैंक खातों को साइबर अपराध की दुनिया में ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है. राजकोट जिला पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में आरोपियों के बैंक खातों से 1 करोड़ 78 लाख रुपये से अधिक की संदिग्ध राशि के लेन-देन का खुलासा हुआ है. पुलिस का मानना है कि यह रकम विभिन्न राज्यों में हुए साइबर अपराधों और आर्थिक धोखाधड़ी से जुड़ी हो सकती है. फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस इन पैसों के वास्तविक स्रोत और इनके पीछे सक्रिय संगठित नेटवर्क की पहचान करने में जुटी हुई है.
साइबर अपराधियों को दिए जाते हैं खाते
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी सीधे अपने बैंक खातों का उपयोग नहीं करते. वे आम लोगों को थोड़े पैसे का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी हासिल कर लेते हैं. इसके बाद ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में जमा कराई जाती है और फिर विभिन्न माध्यमों से आगे ट्रांसफर कर दी जाती है. इससे अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है और जांच एजेंसियों को भी कई स्तरों पर जांच करनी पड़ती है. ऑपरेशन म्यूल अकाउंट के दौरान पुलिस ने ऐसे खाताधारकों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है. पुलिस ने सभी 16 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ जारी है.
आगे की जांच जारी
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन खातों का उपयोग केवल साइबर फ्रॉड के लिए किया गया था या फिर इनके जरिए जीएसटी चोरी, हवाला और अन्य आर्थिक अपराधों से जुड़े लेन-देन भी किए गए थे. राजकोट जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) विजयसिंह गुर्जर ने इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों को विशेष चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि कई लोग बिना परिणामों को समझे कुछ हजार रुपये के लालच में अपना बैंक खाता दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं. लेकिन कानून की नजर में ऐसा करने वाला व्यक्ति भी अपराध का हिस्सा माना जाता है. यदि किसी खाते का उपयोग साइबर ठगी या अवैध लेन-देन में होता है, तो खाताधारक के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
लोगों से अपील
एसपी ने लोगों से अपील की कि वे कभी भी अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, ओटीपी या नेट बैंकिंग संबंधी जानकारी किसी अजनबी व्यक्ति के साथ साझा न करें. यदि कोई व्यक्ति बैंक खाता किराए पर लेने या उसके बदले पैसे देने का प्रस्ताव रखता है, तो इसकी जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें. राजकोट पुलिस का मानना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ लड़ाई केवल अपराधियों को पकड़ने से नहीं जीती जा सकती, बल्कि आम लोगों को जागरूक बनाकर भी ऐसे नेटवर्क को कमजोर किया जा सकता है. ‘ऑपरेशन म्यूल अकाउंट’ इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसने साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं.
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