Haryana Politics: हरियाणा की सियासत में महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ा घमासान अब एक नए और तीखे मोड़ पर आ गया है.
Haryana Politics: हरियाणा की सियासत में महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ा घमासान अब एक नए और तीखे मोड़ पर आ गया है. पिछले दिनों विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी अब एक बार फिर बढ़ती हुई नज़र आ रही है. नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण द्वारा जारी किए गए नोटिस का कड़ा जवाब देते हुए दो टूक कहा है कि इस मुद्दे पर विशेष सत्र बुलाना ही पूरी तरह से अनुचित और असंवैधानिक था. हुड्डा ने अपने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का मुद्दा सीधे तौर पर केंद्र सरकार और भारतीय संसद के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस विषय पर निर्णय लेने की शक्ति राज्य सरकार के पास है ही नहीं, तो हरियाणा विधानसभा का कीमती समय और संसाधन केवल राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए क्यों बर्बाद किए गए.
भाजपा पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप
हुड्डा ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सम्मनिंग और प्रोसीडिंग दो बिल्कुल अलग बातें हैं और जिस विषय पर फैसला संसद स्तर पर होना है, उस पर राज्य विधानसभा में चर्चा करना संवैधानिक दायरे से बाहर की बात है. उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाया और कहा कि राज्य सरकार ने केवल आगामी राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस विशेष सत्र का प्रपंच रचा. ज्ञात हो कि विधानसभा सचिवालय ने कांग्रेस विधायकों द्वारा विधानसभा परिसर में की गई ‘समानांतर कार्यवाही’ पर कड़ी आपत्ति जताई थी. स्पीकर ने हुड्डा से पूछा था कि किस नियम के तहत सदन के भीतर एक अलग सदन जैसी कार्यवाही चलाई गई, जिसके जवाब में हुड्डा ने सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए. इस विवाद के बीच हुड्डा ने यह भी तर्क दिया कि कांग्रेस ने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता दी है और सदन की कार्यवाही के दौरान भी विपक्ष ने बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और प्रदेश में बिगड़ती महिला सुरक्षा जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया.
धरातल पर महिलाओं के लिए कोई काम नहीं
हुड्डा ने आरोप लगाया कि सरकार ने महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय का राजनीतिकरण किया है जबकि हकीकत में कानून पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक महिलाओं को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिला है. हुड्डा ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा केवल क्रेडिट लेने की राजनीति कर रही है, जबकि धरातल पर महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कोई ठोस काम नहीं किया गया. इस पूरे घटनाक्रम ने हरियाणा की राजनीति में संवैधानिक मर्यादाओं और राज्य बनाम केंद्र के अधिकारों पर एक नई बहस छेड़ दी है. जहां एक तरफ भाजपा इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़कर देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे जनता का ध्यान भटकाने की एक कोशिश करार दे रही है.
महिला आरक्षण के नाम पर आर-पार की जंग
समानांतर सत्र के आयोजन पर हुड्डा के कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में हरियाणा विधानसभा के भीतर और बाहर यह टकराव और बढ़ने वाला है. अब सबकी नजरें विधानसभा स्पीकर के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे नेता प्रतिपक्ष के इस जवाब पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या भाजपा सरकार इन संवैधानिक सवालों का कोई तार्किक जवाब दे पाती है. फिलहाल, हरियाणा की राजनीति महिला आरक्षण के नाम पर आर-पार की जंग के मैदान में तब्दील हो चुकी है और दोनों पक्ष एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं.
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