Pakistan Iran US: पाकिस्तान हर मोर्चे पर भरोसे का संकट बन चुका है. दुनिया उसे अब सहयोगी कम और “कन्फ्यूज्ड खिलाड़ी” ज्यादा मानने लगी है.
Pakistan Iran US: दुनिया के मंच पर पाकिस्तान की हालत इन दिनों उस पड़ोसी जैसी हो गई है, जो मोहल्ले में “शांति दूत” बनने का ढोंग करता है, लेकिन रात के अंधेरे में चोरी-छिपे पटाखे भी वही फोड़ता पकड़ा जाता है. एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच “मध्यस्थता” का राग अलापा जा रहा था, दूसरी तरफ खबरें आईं कि पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस में पनाह दे दी. मतलब कि ऊपर से अमन की बातें और भीतर से दोहरी चाल — यही है पाकिस्तान का पुराना “डिप्लोमैटिक ड्रामा”.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने सैन्य विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस में छिपाया. अब सवाल यह है कि जो देश खुद आर्थिक ऑक्सीजन सिलेंडर पर टिका हो, वो आखिर किस आत्मविश्वास से वैश्विक राजनीति में “डबल एजेंट” बनने निकल पड़ा? IMF के पैसों से सांस लेने वाला पाकिस्तान, आज भी खुद को क्षेत्रीय ताकत साबित करने के लिए ऐसी हरकतों से बाज नहीं आता.
पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा विचार हो
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की प्रतिक्रिया ने पाकिस्तान की मध्यस्थ वाली इमेज की हवा निकाल दी है. उन्होंने साफ कहा कि अगर ये रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की भूमिका पर दोबारा विचार करना होगा. यानी जिस देश ने खुद को “शांति स्थापित करने वाला” बताने की कोशिश की, उसी पर पर्दे के पीछे खेल खेलने का शक गहरा गया.

असल में पाकिस्तान की राजनीति और विदेश नीति हमेशा दो नावों की सवारी करती रही है. एक तरफ अमेरिका को खुश रखने की कोशिश, दूसरी तरफ चीन और ईरान को नाराज न करने की मजबूरी. नतीजा ये कि पाकिस्तान हर मोर्चे पर भरोसे का संकट बन चुका है. दुनिया उसे अब सहयोगी कम और “कन्फ्यूज्ड खिलाड़ी” ज्यादा मानने लगी है.
सीक्रेट मिशन का खेला
विडंबना देखिए, जिस पाकिस्तान की अपनी अर्थव्यवस्था कर्ज के दलदल में धंसी हुई है, जहां जनता महंगाई से त्रस्त है, वहां की सत्ता वैश्विक राजनीति में सीक्रेट मिशन खेलने में व्यस्त है. जनता आटे-दाल के लिए लाइन में खड़ी है और हुक्मरान अंतरराष्ट्रीय शतरंज में खुद को चाणक्य समझ रहे हैं.
पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वह हर बार खुद को जरूरत से ज्यादा चालाक साबित करने की कोशिश करता है. लेकिन इतिहास गवाह है कि उसकी यही ओवर एक्टिंग उसे बार-बार बेनकाब कर देती है. दुनिया अब यह जान और समझ चुकी है कि पाकिस्तान की कूटनीति में शब्दों से ज्यादा महत्व चोर दरवाजों का ही होता है. शायद यही कारण है कि आज जब पाकिस्तान “शांति” की बात करता है, तो दुनिया पहले उसकी जेबें टटोलती है कि कहीं उसमें कोई नया खेल तो नहीं छिपा.
लेखक: अरूण गंगवार
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