Ladli Lakshmi Yojana: मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली लक्ष्मी योजना को लेकर विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.
- भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट
Ladli Lakshmi Yojana: मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली लक्ष्मी योजना को लेकर विधानसभा में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में स्वीकार किया कि योजना के तहत पंजीकृत होने वाली लाखों बेटियों में से उच्च शिक्षा तक पहुंचने वाली लाडलियों की संख्या में भारी गिरावट आई है. स्थिति यह है कि स्नातकोत्तर (PG) तक पहुंचते पहुंचते यह आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है.मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2007 से 2025 तक कुल 52.29 लाख लाडली लक्ष्मियों का पंजीयन हुआ, लेकिन जब बात शिक्षा के स्तर की आती है तो ये आंकड़े चिंताजनक हैं. कुल योग्य लाडलियों में से मात्र 52.35 प्रतिशत ने कक्षा 6 में प्रवेश लिया. कक्षा 9वीं में यह घटकर 42.21 प्रतिशत रह गया. कक्षा 12वीं तक पहुंचते-पहुंचते केवल 19.97 प्रतिशत लाडलियां ही पढ़ाई जारी रख पाईं. उच्च शिक्षा की स्थिति और भी विकट है. स्नातक में 5.87 प्रतिशत और स्नातकोत्तर में मात्र 0.33 प्रतिशत लाडलियां ही प्रवेश ले सकीं.
1 लाख की राशि को लेकर उठे सवाल
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजना की शर्तों के अनुसार 21 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर 1 लाख रुपये की अंतिम राशि केवल उन्हीं को मिलेगी जिन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा दी है. आंकड़ों के अनुसार चूंकि 12वीं में प्रवेश लेने वाली बेटियों की संख्या बहुत कम है, इसलिए वर्ष 2027 में लगभग 5 हजार और 2028 में मात्र 40 हजार लाड़लियों को ही इस राशि का लाभ मिल सकेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शैक्षणिक सुधार के लक्ष्य पर ध्यान देने के बजाय इसे राजनीतिक लाभ का जरिया बनाया.
इंदौर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
लाडली लक्ष्मियों में शिक्षा के प्रति कम होते रुझान को लेकर 3 दिसंबर 2025 को इंदौर उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया है. कोर्ट में दो-तीन बार सुनवाई होने के बावजूद शासन ने अब तक विस्तृत जवाब पेश नहीं किया है और समय की मांग की है.
आंकड़ों के अनुसार 2012 में सर्वाधिक 3.54 लाख पंजीयन हुए थे, जबकि 2021 में यह संख्या 3.44 लाख थी. वर्ष 2025 में 2.72 लाख पंजीयन हुए. पंजीयन की संख्या में हर साल होने वाले बड़े अंतर पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि पात्रता के आधार पर ही पंजीयन किए जाते हैं.
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