MP Budget: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपने तीसरे बजट में 1.5 करोड़ बच्चों को दूध की शक्ति देने का वादा किया है, लेकिन इस मिठास पर अब सियासी कड़वाहट घुल गई है.
- भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट
MP Budget: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने अपने तीसरे बजट में 1.5 करोड़ बच्चों को दूध की शक्ति देने का वादा किया है, लेकिन इस मिठास पर अब सियासी कड़वाहट घुल गई है. विपक्ष ने टेट्रा पैक दूध की घोषणा को लेकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है. अस्पतालों की बदहाली से लेकर स्कूलों की जर्जर छतों तक कांग्रेस ने तीखे सवालों की बौछार कर दी है. बता दें कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने सदन में 4 लाख 38 हजार करोड़ का भारी भरकम बजट पेश किया. सबसे बड़ी घोषणा रही मिड-डे मील के साथ टेट्रा पैक दूध. सरकार का दावा है कि इससे कक्षा 1 से 8 तक के 98 लाख छात्रों और 48 लाख आंगनवाड़ी बच्चों का पोषण सुधरेगा. लेकिन विपक्ष इसे दिखावा करार दे रहा है.
विपक्ष ने बदहाली पर सरकार को घेरा
कांग्रेस विधायक सचिन यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से दो दर्जन बच्चों की जान चली गई. सरकारी अस्पतालों के बच्चा वार्डों में चूहे नवजात बच्चों के अंग कुतर रहे हैं. सरकार पहले इन बुनियादी व्यवस्थाओं को सुधारे, अस्पतालों में बच्चों की जान सुरक्षित करे, इसके बाद दूध देने का दावा करे. जनता को छलावा नहीं, सुरक्षा चाहिए. बता दें कि विपक्ष का सिर्फ अस्पताल ही नहीं, शिक्षा के बुनियादी ढांचे पर भी पलटवार जारी है. उप प्रतिपक्ष नेता विक्रांत भूरिया और विधायक प्रताप गेरवाल ने आदिवासी इलाकों की तस्वीर पेश करते हुए सरकार को घेरा है. विक्रांत भूरिया ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की हालत बदहाल है. शौचालय नहीं हैं, बारिश में छतें टपकती हैं. दूध के बहाने यह सरकार सिर्फ ठेकेदारों की जेब भरना चाहती है. प्रताप गेरवाल ने कहा कि यह सरकार का कोरा दिखावा है. पहले स्कूलों की हालत तो सुधार लीजिए, फिर बच्चों को दूध पिलाने का दावा करिए.
टेट्रा पैक दूध पर उठाए सवाल
बता दें सरकार इस बजट को स्वर्णिम मध्य प्रदेश की सीढ़ी बता रही है तो वहीं विपक्ष इसे बुनियादी नाकामियों को छिपाने वाला ख्याली पुलाव. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या टेट्रा पैक दूध की ये सौगात अस्पतालों में चूहों के आतंक और जहरीली सिरप से लगे दागों को धो पाएगी. विपक्ष की नजरों में यह महज ठेकेदारों का जश्न है. क्या यह योजना बच्चों का भविष्य रोशन करेगी या बुनियादी कमियों पर पर्दा डाल देगी? यह विवाद सिर्फ दूध का नहीं, प्राथमिकताओं का है. सरकार इसे ‘ज्ञान से ज्ञानी’ बनाने वाला बजट कह रही है. कोई नया टैक्स नहीं. कृषि ऋण पर 25,000 करोड़ और लाडली बहना को 23,882 करोड़, लेकिन विपक्ष का कहना है कि बुनियादी ढांचा ठीक किए बिना पैकेज्ड पोषण कैसे चलेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि टेट्रा पैक सुविधाजनक है, लेकिन स्थानीय दूध उत्पादकों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है.
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