Introduction
Operation Gold : गोल्ड के बढ़ते दामों के बीच Live Times के ‘ऑपरेशन गोल्ड’ में बड़ा खुलासा किया गया है. इस शो में टेलीविजन की दुनिया में कुछ खास दिखने वाला है. यह सिर्फ हमारा दावा नहीं है बल्कि एक बड़ा खुलासा है जो हिंदुस्तान की तिजोरी को हिलाकर रख देगा. हमारे एक्सोपज के बाद आप अपनी तिजोरी, अपनी अलमारी और अपना संदूक सब कुछ बार-बार खोलकर देखेंगे. साथ ही आप खुद को भी परखने की कोशिश करेंगे कि आपका निवेश सुरक्षित है या नहीं. आपके साथ किसी प्रकार की धोखाधड़ी तो नहीं हुई है और आपकी बचत पर भी किसी की नजर तो नहीं लगी है. आपको बताते चलें कि युग-युगांतर से इंसानों की चाहत एक ही रही है, जिसमें मुख्य रूप से सोने में सजने की चाहत और सोना सहेजने की चाहत शामिल है. हिंदुस्तान में शायद ही ऐसा कोई घर हो जहां पर गृहस्थ गोल्ड से बने गहने को बड़े शौक से सहेजकर नहीं रखता हो, अच्छे वक्त के लिए भी और बुरे वक्त के लिए भी.
Table of Content
- गोल्ड पर नहीं होता कालचक्र का असर
- सोने की बादशाहत आज भी कायम
- संदेह के घेरे में रहा सर्राफा कारोबार
- क्या है कैरेट का गणित?
- दिल्ली-एनसीआर में किया चेक
- कैसे होती है धोखाधड़ी
- ऐसे होती है कैरेट की असली पहचान
गोल्ड पर नहीं होता कालचक्र का असर
GOLD यानी सोना एक ऐसा रेयर अर्थ मिनरल, जिसका ना Erosion होता है, ना Degradation और ना ही Corrosion. इसकी चमक हमेशा एक जैसी रहती है. जिसपर कालचक्र का असर नहीं होता है. यही वजह है कि Gold को हमेशा से एक सुरक्षित और भरोसेमंद निवेश माना गया है. सोना दुनिया की लगभग हर संस्कृति में शक्ति, पवित्रता और वैभव का प्रतीक रहा है. भारतीय संस्कृति में भी ये जीवन के हर संस्कार से जुड़ा है. मॉर्गन स्टेनली के एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय परिवारों के पास 34,600 टन गोल्ड है, जिसकी कीमत लगभग 3.8 ट्रिलियन डॉलर है. यह वैल्यूएशन भारत की जीडीपी का लगभग 88.8 फ़ीसदी है. यही नहीं, RBI के पास भी 880 टन गोल्ड रिजर्व है जो भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 14 फीसदी है. सोने के आधिकारिक भंडार के मामले में भारत दुनिया में 8वें स्थान पर है.

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सोने की बादशाहत आज भी कायम
लाइव टाइम्स की टीम को एक सोनार ने बताया कि जब राजा-रजवाड़ों का दौर था, तब कौन सा राजा कितना ताकतवर है इसका पता इस बात से चलता था कि उसके पास गोल्ड का कितना भंडार है. दौर बदला, व्यवस्थाएं बदलीं लेकिन सोने की बादशाहत आज भी कायम है. बल्कि यूं कहें कि पहले के मुकाबले यह और ज्यादा ताकतवर हो गया है. इतना शक्तिशाली कि किसी भी देश की मुद्रा पर असर डाल सकता है, महंगाई बढ़ा सकता है और सरकारें तक हिला सकता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में सालाना 5 से 7 लाख करोड़ रुपये के सोने का कारोबार होता है, जिसमें ज्वेलरी, निवेश और दूसरी खपत शामिल हैं. इसी डिमांड-सप्लाई की वजह से चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है.
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संदेह के घेरे में रहा सर्राफा कारोबार
दुनिया में गोल्ड का जितना बड़ा कारोबार रहा है उतनी ही गड़बड़ियों ही शिकायत सामने आई है. यही वजह है कि सर्राफा का कारोबार हमेशा से संदेहों के घेरे में रहा है. एक आम ग्राहक के पास सोने की शुद्धता को परखने का शायद ही कोई तरीका होता है. सुनार जो कह दे हम उसको ही आंख मूंदकर मान लेते हैं. हमारे लिए सोने की प्योरिटी का मतलब ज्वेलर की जुबान है. गोल्ड बायर्स की इसी परेशानी को दूर करने के लिए अप्रैल 2023 से भारत में सोने के आभूषणों पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) की हॉलमार्किंग अनिवार्य कर दी गई यानी भारत में बिना BIS की हॉलमार्किंग के सोने की खरीद-बिक्री नहीं हो सकती है. इसका मकसद है ग्राहकों को शुद्ध सोने की गारंटी देना, धोखाधड़ी रोकना और बाज़ार में पारदर्शिता लाना. लेकिन फ़र्ज़ कीजिए कि सोने की शुद्धता तय करने वाले इसी सिस्टम में दीमक लग जाए तो, देश की राजधानी दिल्ली में हमारे अंडर कवर रिपोर्टर को भी लगातार ऐसी गड़बड़ियों की शिकायतें मिल रही थीं, लोग दावा कर रहे थे कि कैरेट के खेल में करोड़ों के वारे-न्यारे हो रहे हैं.

क्या है कैरेट का गणित?
अब सवाल है कि कैरेट का बदलने से किसको फायदा होता है और किसको नुकसान होता है. साथ ही सोने की शुद्धता की जांच कैसे होती है? दरअसल, कैरेट बदलने से अमूमन सुनार को फायदा होता है. वो कम कैरेट को ज्यादा का बना कर दे सकता है. कम कैरेट के सोने से ग्राहकों को सीधा नुकसान है. साथ ही सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंचता है. इससे पहले कि हम कैरेट के खेल पर सबसे बड़ा खुलासा करें. आप कैरेट के mathematics को समझ लीजिए. कैरेट सोने की प्योरिटी मापने की यूनिट होती है. ये बताता है कि किसी गहने या सोने के सिक्के में कितना प्योर सोना मिला हुआ है. कैरेट की अधिकतम सीमा 24 होती है. 24 कैरेट का मतलब होता है कि लगभग सौ फीसदी शुद्ध सोना.
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कैरेट क्या है? HDR सोने की शुद्धता को मोटे तौर पर 4 श्रेणियों में बांटती है. 24 कैरेट सोना सबसे प्योर माना जाता है और इसमें लगभग 99.9 प्रतिशत सोना होता है. इसका इस्तेमाल ज्यादातर सिक्कों और बिस्किट बनाने में होता है. वहीं, 22 कैरेट सोना गहनों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसमें करीब 91.6 प्रतिशत प्योर सोना होता है, बाकी धातुएं मजबूती के लिए मिलाई जाती हैं. 18 कैरेट सोने में लगभग 75 प्रतिशत प्योर सोना होता है और यह डिजाइनर गहनों में इस्तेमाल किया जाता है. जबकि, 14 कैरेट सोने में करीब 58.5 प्रतिशत प्योर सोना होता है, जो हल्के और सस्ते गहनों के लिए उपयोग में आता है.

दिल्ली-एनसीआर में किया चेक
गोल्ड हॉलमार्किंग के चेक करने के लिए जरूरी था कि हम उन दावों की जांच खुद करें, जिसके लिए जरूरी था कि ज्वेलर्स और हॉल मार्किंग सेंटर के नेक्सस में पैठ बनाना है. लेकिन ये काम आसान नहीं था. सबसे पहले हमने दिल्ली-एनसीआर में सोने के बड़े बाजारों की पहचान की. ऐसे लोगों की शिनाख्त में जुटे जो हमें गोरखधंधे के तहत तक ले जाएं. गूगल सर्च और ग्राउंड रेकी से पता चला कि दिल्ली और NCR में कई ऐसे इलाके हैं जहां बड़े-बड़े ब्रांड्स के शोरूम मौजूद हैं और यहां हर रोज करोड़ों का कारोबार होता है. इसमें दिल्ली का चांदनी चौक, करोलबाग, लाजपतनगर, द्वारका, साकेत, जनकपुरी और रोहिणी के अलावा एनसीआर में गाजियाबाद, नोएडा सेक्टर- 18 में शामिल है. लेकिन बड़ा सवाल यह था कि हम अपनी तहकीकात कहां से शुरू करें. हमने दिल्ली एनसीआर के कई हिस्सों में रेकी की और पाया कि दिल्ली में करोल बाग, चांदनी चौक दो ऐसे इलाके हैं जहां से पूरे देश से ग्राहक सोने के आभूषण खरीदने आते हैं. लेकिन यहां भी आभूषण और हॉल मार्किंग की बहुत सी दुकाने थी. फिर हमने BIS की साइट से आरवी हॉलमार्क सेंटर का चुनाव किया.
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कैसे होती है धोखाधड़ी
लाइव टाइम्स के अंडर कवर रिपोर्टर एक राम बाबू नाम के व्यक्ति से चर्चा की और उसने बताया कि आरवी हॉलमार्क सेंटर में इनकी 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. राम बाबू ने हमें बताया कि वो हमारा 14 कैरेट के माल पर 18 कैरेट की स्टंप लगा देंगे. लाइव टाइम्स के लिए अंडर कवर अंडर कवर रिपोर्टर रुमान उल्ला खान ने पूछा कि अगर बड़े पैमाने पर ये खेल चल रहा है तो धरपकड़ क्यों नहीं होती, ज्वेलर्स कैसे बच जाते हैं? भ्रष्टाचारी ज्वैलर्स कैसे बच जाते हैं? इस पर राम बाबू ने कहा कि मामला यह है कि ज्वैलर्स और ग्राहक के बीच एक भरोसे का रिश्ता होता है. ग्राहक भरोसे पर ही किसी सुनार या ज्वैलरी शॉप से खरीददारी करता है. ग्राहक को यह भरोसा होता है कि जो सुनार उसे आभूषण दे रहा है वो सही ही है. अगर कभी कभार सुनार से ग्राहक नकली या अशुद्ध सोने की शिकायत करते भी हैं तो सुनार अपने ग्राहक को सोने की मौजूदा कीमत देकर संतुष्ट कर देते हैं. इस तरह से अगर कोई सुनार या ज्वैलर्स ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करता भी है तो यह मामला दुकान या शोरूम में वहीं निपटा लिया जाता है, जिसकी वजह से भ्रष्टाचारी सुनार ज्वैलर्स बचे रहते हैं.

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ऐसे होती है कैरेट की असली पहचान
आपको बताते चलें कि सोने की शुद्धता के कानून में हॉलमार्किंग अनिवार्य है. भारत में अब सोने के गहनों की बिक्री के लिए BIS हॉलमार्किंग जरूरी है. मौजूदा समय में 14K, 18K, 20K, 22K, 23K और 24K सोने के लिए हॉलमार्किंग की अनुमति है. जुलाई 2025 से इसमें 9 कैरेट (9K) सोने को भी अनिवार्य रूप से शामिल कर लिया गया है. इसके अलावा HUID नंबर: हर हॉलमार्क वाले आभूषण पर 6-अंकों का एक विशिष्ट HUID (Hallmark Unique Identification) नंबर होना अनिवार्य है, जिसे ग्राहक BIS Care App के माध्यम से सत्यापित कर सकते हैं.
Conclusion
लाइव टाइम्स पर हम आपको आपकी तिजोरी से जुड़ी वो सबसे बड़ी खबर दिखा रहे हैं, जिसे देखने के बाद आप अपने गहनों आभूषणओं की जांच जरूर करवाएंगे. आप उन्हें उलट पलट कर जरूर देखेंगे क्योंकि यह खबर आपकी आर्थिक स्थिति से जुड़ी है. यह वो खबर भी है जिसे देखने के बाद आपको अपने सुनार या उस ज्वेलर की पड़ताल भी करनी चाहिए. साथ ही इस खबर को पढ़ने के बाद आप भरोसा करके जेवर या आभूषण खरीदेंगे.
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