UP Diwas 2026: आज यानी 24 जनवरी को उत्तर प्रदेश अपना 77वां जन्मदिन मना रहा है. हालांकि, ये बात कम ही लोग जानते हैं कि यूपी नाम के लिए इस राज्य को एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी थी.
24 January, 2026
आज 24 जनवरी 2026 है और पूरा प्रदेश ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ के जश्न में डूबा है. यानी आज हमारा यूपी 77 साल का हो चुका है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ‘उत्तर प्रदेश’ नाम को हम आज गर्व से लेते हैं, उसे पाने के लिए काफी बहस हुई थी. देश की आजादी के बाद लगभग 2 साल तक भारी बहस और खींचतान चली, तब जाकर उसे उत्तर प्रदेश नाम मिला. यूपी के 77वें जन्मदिन पर आपको इतिहास की उन गलियों में लेकर चलते हैं, जहां हमारे प्रदेश का नामकरण हुआ था.

एक नाम की तलाश
बात उन दिनों की है जब भारत नया-नया आजाद हुआ था. साल 1902 में अंग्रेजों ने इस इलाके का नाम ‘यूनाइटेड प्रॉविंस ऑफ आगरा एंड अवध’ रखा था, इसे 1937 में छोटा करके ‘यूनाइटेड प्रॉविंस’ यानी UP कर दिया गया. मगर आजादी के बाद हमारे नेताओं को ये अंग्रेजी नाम खटकने लगा. उन्हें लगा कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के दिल का नाम ऐसा होना चाहिए जो हमारी संस्कृति और गौरव को दिखाए. आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश नाम फाइनल होने से पहले करीब 20 नामों पर चर्चा हुई थी. इनमें आर्यावर्त, हिंदुस्तान, अवध, ब्रज-कौशल, ब्रह्मवर्त, मध्यदेश, हिमालय प्रदेश और यहां तक कि ‘उत्तराखंड’ जैसे नाम भी शामिल थे. हर नाम के पीछे अपनी एक कहानी और अपनी एक राजनीति थी.

‘आर्यावर्त’ पर जंग
इतिहासकार ज्ञानेश कुदैसिया की मानें तो, 11 सितंबर 1947 को लखनऊ की विधानसभा में चंद्र भाल जी ने एक प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा, जैसे बच्चे के जन्म के बाद नामकरण सबसे जरूरी होता है, वैसे ही हमारे इस नए प्रांत को भी एक नया नाम चाहिए. उस समय ‘आर्यावर्त’ नाम सबसे आगे चल रहा था. सपोर्टर्स का कहना था कि ये वो भूमि है जहां वेदों की रचना हुई. लेकिन इस नाम को लेकर विरोध भी कम नहीं था. मुस्लिम लीग के मैंबर्स और कुछ बाकी नेताओं ने चिंता जताई कि ‘आर्यावर्त’ नाम एक खास विचारधारा की तरफ इशारा करता है और इससे अल्पसंख्यकों के मन में असुरक्षा की भावना आ सकती है. वहीं, दिल्ली में बैठे बड़े नेताओं को लगा कि अगर एक प्रांत का नाम ‘हिंदुस्तान’ या ‘आर्यावर्त’ रख दिया गया, तो ऐसा लगेगा कि जैसे वही पूरा भारत है.

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ऐसे निकला रास्ता
नाम को लेकर बहस इतनी बढ़ गई कि मामला सुलझता नहीं दिख रहा था. तब तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने बड़ी समझदारी दिखाई. उन्होंने देखा कि ‘आर्यावर्त’ के नाम पर देश के बाकी हिस्सों में सहमति नहीं है. इसके बाद डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कानून में ऐसा बदलाव किया जिससे नाम बदलने का अधिकार गवर्नर जनरल को मिल गया. आखिरकार एक बीच का रास्ता निकाला गया और एक नाम सामने आया, ‘उत्तर प्रदेश’. ये नाम सिंपल था, प्रदेश की दिशा को भी दर्शाता था और इसमें किसी भी क्षेत्र को लेकर पक्षपात नहीं था. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित कहते हैं कि, इस नाम में गहरा प्रतीक छिपा है, ‘उत्तर’ यानी वो भूमि जो भारत के हर मुश्किल सवाल का ‘उत्तर’ देती है.

‘ट्रिलियन डॉलर’ इकोनॉमी
वक्त बदला और नाम के साथ-साथ राज्य की पहचान भी बदली. एक दौर था जब यूपी को ‘बीमारू’ (BIMARU) राज्यों की कैटेगरी में गिना जाता था, जहां विकास की रफ्तार काफी सुस्त थी. लेकिन आज 2026 में तस्वीर बिल्कुल बदल चुकी है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अब चर्चा नाम पर नहीं, बल्कि ‘काम’ पर है. आज यूपी का टारगेट 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनना है. नए एक्सप्रेस-वे, जेवर एयरपोर्ट, फिल्म सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स और बेहतर कानून-व्यवस्था ने यूपी को देश के विकास का इंजन बना दिया है. साल 2018 में जब पहली बार ‘यूपी दिवस’ मनाया गया था, तब से लेकर आज तक हर साल ये दिन हमें याद दिलाता है कि हम कहां थे और कहां पहुंच गए हैं.
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