Home Latest News & Updates योगी सरकार ने खत्म किया दशकों का इंतजार : 30 साल बाद मीरजापुर का जरगो बांध पानी से लबालब

योगी सरकार ने खत्म किया दशकों का इंतजार : 30 साल बाद मीरजापुर का जरगो बांध पानी से लबालब

by Rajeev Ojha 28 October 2026, 5:01 PM IST (Updated 28 October 2026, 5:02 PM IST)
28 October 2026, 5:01 PM IST (Updated 28 October 2026, 5:02 PM IST)
योगी सरकार ने खत्म किया दशकों का इंतजार: 30 साल बाद मीरजापुर का जरगो बांध पानी से लबालब, किसान गदगद

Jargo Dam: योगी सरकार प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी दिशा में मीरजापुर के जरगो बांध के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है. पिछले कई दशकों से खराब पड़े मेजा-जरगो लिंक नहर के दोनों अंडर स्लूस गेटों की मरम्मत और पुनर्स्थापन के बाद बांध में पानी की आपूर्ति सुचारु हुई है. करीब 30 वर्षों बाद जरगो बांध के पानी से लबालब होने की स्थिति ने क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद जगाई है. वर्तमान में मेजा-जरगो लिंक नहर के माध्यम से बांध में 229 क्यूसेक पानी की आपूर्ति की जा रही है.

खराब गेटों के कारण हो रही थी पानी की बर्बादी

प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने और उपलब्ध जल संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है. मेजा-जरगो लिंक नहर के गेटों की मरम्मत इस दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहां आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ इंजीनियरिंग के समन्वय से वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया गया. उन्होंने बताया कि मेजा-जरगो लिंक नहर मीरजापुर की कृषि सिंचाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके माध्यम से विभिन्न जलाशयों और नहरों को जोड़कर जरगो बांध तक पानी पहुंचाया जाता है.

लगभग 71.130 किलोमीटर लंबी है नहर

लगभग 71.130 किलोमीटर लंबी और 580 क्यूसेक क्षमता वाली यह नहर क्षेत्र की कृषि भूमि की सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. नहर के हेड पर स्थापित दो अंडर स्लूस गेट लंबे समय से खराब थे. इनके जरिए लगातार पानी का रिसाव होने से जल प्रबंधन प्रभावित हो रहा था. इन दोनों गेटों से करीब 150 क्यूसेक पानी लगातार व्यर्थ बह रहा था. इसके चलते न केवल उपलब्ध सिंचाई जल का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था, बल्कि नहर के आगे के हिस्से में गाद की सफाई और जल प्रवाह को नियंत्रित करना भी मुश्किल हो गया था. वहीं रिसाव के कारण नहर के डाउनस्ट्रीम में लगभग 10 किलोमीटर तक जमी सिल्ट की सफाई नहीं हो पा रही थी. इससे नहर की जल वहन क्षमता और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही थी. इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ रहा था, जो खरीफ और रबी की फसलों के लिए नहर के पानी पर निर्भर हैं.

15 मीटर गहराई में चुनौतीपूर्ण मरम्मत

मुख्य अभियंता यांत्रिक उपेंद्र सिंह ने बताया कि गेटों की मरम्मत सामान्य इंजीनियरिंग कार्य नहीं था. गेट जल सतह से लगभग 15 मीटर नीचे स्थित थे, जहां पानी का दबाव वायुमंडलीय दबाव से करीब 2.5 गुना था. अत्यधिक रिसाव के कारण पानी के भीतर सीधे निरीक्षण करना गोताखोरों के लिए भी जोखिम भरा था. गेटों के संचालन से जुड़े हिस्से क्षतिग्रस्त थे और रबर सील तथा दीवार के बीच बने अंतर से पानी लगातार रिस रहा था. इससे निपटने के लिए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की सिंचाई कार्यशाला खंड, बरेली की टीम ने चरणबद्ध रणनीति अपनाई.

सबसे पहले विशेष सामग्री की मदद से रिसाव को अस्थायी रूप से रोका गया, जिससे पानी के भीतर काम करने की परिस्थितियां सुरक्षित बनाई जा सकें. इसके बाद आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) को 4के वीडियो कैमरे के साथ पानी में उतारा गया. इसके माध्यम से गेटों के दोनों ओर का निरीक्षण किया गया और क्षतिग्रस्त हिस्सों, रबर सील के बीच के अंतर तथा दीवार में मौजूद छेदों की पहचान की गई. इस तकनीक से उन हिस्सों का सटीक आकलन संभव हुआ, जहां सीधे गोताखोरों के जरिए निरीक्षण करना जोखिम भरा था.

छेदों को विशेष सामग्री से भरा गया

निरीक्षण के बाद क्षतिग्रस्त ग्रूव की मरम्मत की गई और नया स्टॉप लॉग गेट तैयार कर पानी के भीतर स्थापित किया गया. इसके बाद दोनों सर्विस गेटों को बाहर निकालकर उनकी मरम्मत की गई. पुरानी और खराब रबर सील को बदलने के साथ रोलर तथा बेयरिंग भी नए लगाए गए. गेटों से जुड़े दीवार के छेदों को विशेष हाई-प्रेशर रिपेयर सामग्री से भरा गया. मरम्मत पूरी होने के बाद गेटों को दोबारा स्थापित कर उनकी लीकेज टेस्टिंग की गई. इस तरह लंबे समय से चली आ रही रिसाव की समस्या को दूर किया गया और पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की क्षमता बहाल हुई. इस कार्य से करीब 150 क्यूसेक पानी की बर्बादी रुकने के साथ नहर के आगे के हिस्से में सिल्ट की सफाई का रास्ता भी खुला.

15 हजार किसानों को राहत

जरगो बांध में पानी की आपूर्ति बेहतर होने से मीरजापुर के कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलने लगा है. परियोजना से लगभग 15,000 किसान लाभान्वित हो रहे हैं जबकि करीब 6,300 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है. इससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में कृषि उत्पादन बढ़ेगा. साथ ही, पानी की बर्बादी रुकने से जलाशय और नहर प्रणाली का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा. नहर में गाद की सफाई संभव होने से भविष्य में जल प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिलेगी.

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