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UP में बुलडोजर एक्शन पर सियासी लड़ाई तेज! अखिलेश यादव बोले- PDA को निशाना बनाया जा रहा

by Dheeraj Tripathi 26 May 2026, 7:13 PM IST
26 May 2026, 7:13 PM IST
Political Battle Over Bulldozer Action Intensifies UP

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एनकाउंटर, कस्टोडियल डेथ और बुलडोजर एक्शन को लेकर सियासी लड़ाई फिर तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है. साथ ही फर्जी एनकाउंटरों के जरिए खास तौर पर PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज को निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सपा पर अपराधियों को संरक्षण देने और जातीय राजनीति करने का आरोप लगाया है.

PDA को मजबूत कर रहे हैं अखिलेश

दरअसल, विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव लगातार PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं. इसी रणनीति के तहत उन्होंने एनकाउंटर, बुलडोजर और कस्टोडियल डेथ जैसे संवेदनशील मुद्दों को सामाजिक न्याय और लोकतंत्र से जोड़ने का प्रयास किया है. अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर फेक एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है. उनका कहना है कि सरकार जिसकी ताकत, उसी का अधिकार वाली मानसिकता को बढ़ावा दे रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है.

जाति-धर्म देखकर कार्रवाई की जा रही

सपा का दावा है कि एनकाउंटर और पुलिस कार्रवाई में जाति और धर्म देखकर कार्रवाई की जा रही है और सबसे ज्यादा असर PDA वर्ग पर पड़ रहा है. पार्टी नेताओं ने अंडरट्रायल कैदियों, बुलडोजर से ध्वस्त किए गए मकानों और कथित पुलिस कार्रवाइयों का हवाला देते हुए कहा कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल बनाया जा रहा है. सपा इसे केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक एजेंडा बता रही है, जिसके जरिए सरकार प्रशासनिक विफलताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है.

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि जब किसी कथित फर्जी एनकाउंटर में पुलिस अधिकारी फंसते हैं तो सरकार उनसे दूरी बना लेती है. उन्होंने हाथरस समेत कई मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों को संरक्षण मिलता है, जबकि पीड़ितों और विपक्षी आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई होती है. सपा का कहना है कि प्रदेश में भय और दबाव की राजनीति की जा रही है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके.

PDA वोट बैंक को एकजुट करने की कोशिश

राजनीतिक तौर पर देखें तो अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर PDA वोट बैंक को भावनात्मक और राजनीतिक रूप से एकजुट करने की कोशिश माना जा रहा है. सपा यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि बीजेपी सरकार की कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज पर पड़ रहा है. साथ ही पार्टी ब्राह्मण समाज को भी जोड़ने की कोशिश कर रही है. सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव ने दावा किया कि पुलिस एनकाउंटर में मुस्लिमों के साथ-साथ बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज के लोग भी मारे गए हैं और बीजेपी सरकार ब्राह्मण विरोधी रवैया अपना रही है.

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वहीं, बीजेपी ने सपा के आरोपों को चुनावी राजनीति बताया है. प्रदेश सरकार में मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि अपराधी की कोई जाति या धर्म नहीं होता. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी हमेशा अपराधियों को संरक्षण देने की राजनीति करती रही है, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार अपराध और माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है. बीजेपी का कहना है कि अगर अपराधी पुलिस पर हमला करेंगे तो पुलिस कानून के तहत जवाबी कार्रवाई करेगी.

SP बढ़ा रही लोकसाभ वाले एजेंडे को आगे

बीजेपी यह भी आरोप लगा रही है कि अखिलेश यादव जातीय ध्रुवीकरण कर वोट बैंक की राजनीति को मजबूत करना चाहते हैं. खास तौर पर PDA के जरिए सपा 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव में PDA फॉर्मूले से मिले लाभ के बाद सपा अब इसे और आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रही है.

स्पष्ट है कि एनकाउंटर, बुलडोजर और सामाजिक न्याय का मुद्दा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति का बड़ा वैचारिक और चुनावी केंद्र बनने जा रहा है. एक तरफ सपा इसे लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय पर हमला बताकर PDA वर्ग को लामबंद करना चाहती है, वहीं बीजेपी इसे कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की सख्त नीति के रूप में पेश कर रही है. विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह टकराव और तेज होने की संभावना है.

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