Cricket Record: भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी-20 खेली जा रही है. अभी तक चार मुकाबले हो चुके हैं. तेज बारिश होने की वजह से पहले मुकाबले का कोई परिणाम नहीं निकल पाया. हालांकि, लगातार तीन मैचों में जीत दर्ज करने के बाद इंग्लिश टीम ने सीरीज पर अपना कब्जा जमा लिया. अब आखिरी मैच 11 जुलाई को खेला जाएगा और इस दौरान भारतीय टीम को अपनी बादशाहत बचाने के लिए मैदान पर उतरना है. अगर आखिरी मैच में भी टीम इंडिया हार जाती है तो वह आईसीसी टी-20 रैंकिंग में अपना नंबर-1 का खिताब खो देगी और इंग्लिश टीम टॉप पर विराजमान हो जाएगी. ऐसे में भारतीय टीम को सीरीज हारने के बाद भी पूरी ताकत लगाकर इस मैच को जीतना होगा. इसके अलावा सीरीज में खास बात यह भी रही कि 15 वर्षीय क्रिकेट वैभव सूर्यवंशी को भी डेब्यू करने का मौका दिया गया और उन्होंने अपने पहले मैच में 14 रनों की पारी खेली. इसके बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई कि आईपीएल खेलने और अंतरराष्ट्रीय मैचों में काफी अंतर होता है. साथ ही वैभव को अभी काफी प्रैक्टिस और मैच्योर होने की जरूरत है. दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर यूजर्स महान क्रिकेट सचिन तेंदुलकर और वैभव सूर्यवंशी के बीच तुलना होने लगी है.
सचिन और वैभव में एक रन का अंतर
क्रिकेट की दुनिया में सबसे कम उम्र में कदम रखने वाले क्रिकेटरों में से एक वैभव सूर्यवंशी ने सचिन तेंदुलकर का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया. वैभव ने 15 साल 99 दिन की उम्र में ही भारत की तरफ से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला है, जबकि सचिन ने अपना डेब्यू 16 साल 205 दिन में किया था. मास्टर ब्लास्टर ने 15 नवंबर, 1989 को पाकिस्तान के खिलाफ कराची में अपना अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था और उन्होंने इस मैच में 15 रनों की पारी खेली थी. वहीं, वैभव ने अपने पहले अंतरराष्ट्रीय मैच में 14 रनों की पारी खेली. इस ऐतिहासिक डेब्यू की वजह से वैभव सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहने वाले खिलाड़ी हैं. हालांकि, जब मैच खत्म हुआ तो रवि बिश्नोई ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बंटोरी. सोशल मीडिया पर भारतीय टीम की हार का सारा ठीकरा बिश्नोई पर फोड़ते हुए नजर आए. साथ ही क्रिकेट एक्सपर्ट भी उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं और उन्हें गेंदबाजी पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान की जरूरत बता रहे हैं.

क्यों खड़े हुए बिश्नोई पर सवाल?
इंग्लैंड की पारी के 17वें ओवर में रवि बिश्नोई ने 29 रन दिए, जिनमें दो नो-बॉल भी शामिल है. इस ओवर में जैकब बेथेल ने बिश्नोई के खिलाफ तीन छक्के और एक चौका जड़ा. बेथेल ने इंग्लैंड के लिए मैच जिताई पारी खेली. उन्होंने 46 गेंदों में 76 रनों की तूफानी पारी खेली और मैच को खत्म करके गए. इस मैच में बिश्नोई ने करीब 60 रन खर्च किए और एक विकेट लेने में कामयाब नहीं हो पाए. साथ ही उन्होंने तीन नो-बॉल फेंकने का भी काम किया. इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि अभी बिश्नोई को काफी सीख लेनी होगी और इस मैच से तो सबसे ज्यादा लेने की जरूरत है.
दूसरी तरफ क्रिकेटर कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कहा कि इंग्लैंड की पारी क 16वें ओवर तक मैच पूरा भारत के पक्ष में था. उस वक्त तक इंग्लैंड का स्कोर पांच विकेट के नुकसान पर 142 रन था. इंग्लैंड को जीत के लिए 24 गेंदों में 49 रनों की दरकार थी. लेकिन जब 17वां ओवर फेंकने के लिए आए रवि बिश्नोई ने 29 रन खर्च कर दिए और इसके बाद मैच का पूरा रुख बदल गया. यही वजह रही कि मैच 19वें ओवर में खत्म हो गया.

जानें क्या बोले अय्यर?
मैच खत्म होने के बाद भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर से जब मैच की हार को लेकर सवाल किया तो उन्होंने भी 17वें ओवर की तरफ इशारा किया. हालांकि, उन्होंने इस हार के पीछे पूरी तरह से रवि बिश्नोई को जिम्मेदार ठहराया. श्रेयस ने कहा कि मुझे लगता है कि हम सभी इस बात को अच्छी तरह जानते हैं कि मैच हमारी मुट्ठी से कब निकल गया, लेकिन मैं किसी एक खिलाड़ी की तरफ इशारा नहीं करना चाहता हूं. 16वें ओवर तक जिस तरह से हम कर रहे थे. उस हिसाब से हम बहुत अच्छा खेल रहे थे. इसके बाद मैच का रुख पूरी तरह उनकी तरफ मुड़ गया. साथ ही अय्यर ने इस ओवर में फेंकी गई दो नो-बॉल की तरफ भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि पहली नो-बॉल डालने के बाद मैंने सोचा ठीक है, अब वह मजबूती से वापसी करेगा. लेकिन इसके बाद दूसरी नो-बॉल ने हमें थोड़ा नुकसान पहुंचाया. निश्चित तौर पर उन्हें इस ओवर से काफी सीख लेनी होगी.
क्या कह रहे हैं क्रिकेट के जानकार
क्रिकेट के विश्लेषक अयाज मेमन ने मैच के बाद भारत के उन दो महंगे ओवरों के बारे में बात की, जिनमें भारतीय गेंदबाजों ने सबसे ज्यादा रन लुटाए हैं. उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि अर्शदीप और बिश्नोई के दो महंगे ओवर हैं, जिनमें कुल 56 रन बने. यही भारत की हार की सबसे बड़ी वजह बनी. हालांकि, अभी तक भारत की जीत का कोई खात नहीं खुला है और सीरीज का अंतिम मुकाबला 11 जुलाई को खेला जाएगा. इस बीच मेमन ने इंग्लिश क्रिकेटरों की तारीफ की और उन्होंने कहा कि सूर्यवंशी ने अपने पहले ही मैच में सुर्खियां बंटोरी हैं. लेकिन इंग्लैंड की जीत ने उनके सारे रन चेज के प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया. ब्रूक, बेंटन और खास तौर पर बेथेल ने अपनी आक्रामकता बल्लेबाजी से मैच का रुख बदल दिया और पूरी महफिल लूट ली.

तीन स्पिनर का फैसला हुआ गलत साबित
एक दूसरी पोस्ट में मेमन ने बिश्नोई की गलतियों और भारत के तीन स्पिनरों के साथ खेलने के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा कि बिश्नोई लगातार गलतियां करते रहे हैं और इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने उनकी गेंदबाजी का जमकर फायदा उठाया. तीन स्पिनरों के साथ उतरने की भारत की रणनीति पूरी तरह से नाकाम रही. उन्होंने कहा कि बिश्नोई ने मैच में लगातार कई गलतियां की. तीन स्पिनर के साथ उतारने की भारत की रणनीति पूरी तरह नाकाम कर दी. वहीं, हर्षा भोगले ने कहा कि किसी भी मैच में नो-बॉल को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. साथ ही स्पिनर्स से ऐसी गलती होती है तो अपराध जैसा लगता है. पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने कहा कि किसी भी भारतीय गेंदबाज का नाम नहीं लिया. लेकिन इंग्लिश बल्लेबाज बेथेल की तारीफ करते हुए रवि बिश्नोई के ओवर की ओर इशारा किया.
सचिन 15 और वैभव के 14 पर हुई बहस
साल 1989 में सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था और वैभव ने भी इंग्लैंड के खिलाफ पदार्पण किया. साथ ही इन दोनों क्रिकेटरों के बीच काफी अंतर हैं. सचिन जब खेलने के लिए आए थे उस वक्त रेड बॉल और पाकिस्तानी गेंदबाजों का पूरी दुनिया पर दबदबा था. साथ ही सूर्यवंशी एक ऐसे समय में आए हैं जहां पर आईपीएल का शोर, वायरल वीडियो और क्लिप्स आमतौर पर फैसला करते हैं कि क्रिकेटर में क्या क्लालिटी है. एक तरफ सचिन ने 16 साल और वैभव ने 15 साल की उम्र में डेब्यू किया. सचिन ने रणजी ट्रॉफी डेब्यू शतकीय पारी खेली थी. दूसरी तरफ वैभव का उभार आईपीएल से हुआ है. ऐसे में दोनों मामलों में डेब्यू की पारी की तुलना कतई नहीं हो सकती है.

साथ ही सचिन ने अपने डेब्यू मैच में पाकिस्तान के खिलाफ 15 रन बनाए थे. अगर आंकड़े के हिसाब से देखें तो यह एक मामूली स्कोर था, लेकिन उस वक्त क्रिकेट अलग लेवल पर था. उस दौरान एक वर्षीय 16 लड़के के सामने इमरान ख़ान, वसीम अकरम, वक़ार यूनुस और अब्दुल क़ादिर जैसे दिग्गज गेंदबाज खड़े थे. उनके सामने सचिन तेंदुलकर को मैदान पर उतारा था. सचिन ने भले ही उस मैच में बड़ा स्कोर खड़ा नहीं किया लेकिन वह पर जमे रहे और पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया. वह दिग्गज गेंदबाजों के सामने बिल्कुल भी एक बच्चा खड़ा है यह कभी महसूस नहीं होने दिया.
