UP News: त्योहारों का सीजन हमारे जीवन में खुशियां और मिठास लेकर आता है. इस दौरान बाजारों में रंग-बिरंगी मिठाइयां, मोमोज़, चटनी, स्नैक्स और बेकरी उत्पाद हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन खाद्य पदार्थों को जरूरत से ज्यादा चमकदार और आकर्षक बनाने के लिए कई बार हानिकारक केमिकल रंगों का मनमाना इस्तेमाल किया जाता है? खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश ने ऐसे मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. प्रशासन अपनी तरफ से मोबाइल वैन (FSW) और जांच अभियानों के जरिए बाजारों पर पैनी नजर रख रहा है, लेकिन एक जागरूक नागरिक के तौर पर आपकी सतर्कता ही आपके परिवार का असली सुरक्षा कवच है.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
- चमकदार रंगों से बचें: बहुत ज्यादा चटक या अप्राकृतिक रूप से चमकदार दिखने वाली मिठाइयों और मोमोज की लाल-हरी चटनी को खरीदने से बचें. इनमें घातक नॉन-परमिटेड केमिकल हो सकते हैं.
- भरोसेमंद दुकानों से ही खरीदें: त्योहारों की खरीदारी हमेशा पंजीकृत और प्रतिष्ठित हलवाइयों, बेकरी या रेस्टोरेंट से ही करें, जो नियमों का पालन करते हैं.
- जागरूक उपभोक्ता बनें: यदि आपको किसी खाद्य पदार्थ के रंग, स्वाद या गुणवत्ता पर संदेह हो, तो तुरंत इसकी शिकायत स्थानीय खाद्य सुरक्षा विभाग से करें. मिलावटी और प्रतिबंधित रंगों का सेवन लिवर, किडनी और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. इस त्योहारी सीजन में खुद भी जागरूक बनें और अपने आस-पास के लोगों को भी सतर्क करें. याद रखें, सतर्कता ही मिलावटखोरों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है. सुरक्षित खाएं, स्वस्थ रहें और खुशियों के साथ त्योहार मनाएं.

खाद्य कारोबारियों के लिए दिशा-निर्देश जारी
आगामी त्योहारों के मद्देनजर खाद्य पदार्थों को आकर्षक बनाने के लिए उपयोग किए जाने वाले केमिकल रंगों के मनमाने इस्तेमाल पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए), उत्तर प्रदेश ने सख्त रुख अपनाया है. विभाग ने खाद्य कारोबारियों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मिठाइयों, स्नैक्स, मोमोज, चटनी और बेकरी उत्पादों में केवल उन्हीं कृत्रिम या प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा सकेगा, जिन्हें नियमानुसार अनुमति प्राप्त है. इसके साथ ही, खाद्य पदार्थों में रंगों की मात्रा को निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर रखना अनिवार्य होगा.
FSDA ने जारी की गाइडलाइन
यह गाइड लाइन सभी खाद्य विनिर्माताओं, हलवाइयों, होटल व रेस्टोरेंट संचालकों, बेकरी प्रतिष्ठानों, ढाबा मालिकों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स पर लागू होगी. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. विभाग ने इन दिशा-निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के लिए व्यापार मंडलों, होटल-रेस्टोरेंट एसोसिएशनों, फूड वेंडर एसोसिएशनों और क्षेत्रीय बैठकों का सहयोग लेने को कहा है. इसके अलावा, फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (FSW) मोबाइल वैन के जरिए भी लोगों और व्यापारियों को जागरूक किया जाएगा ताकि त्योहारों में मिलावट मुक्त और सुरक्षित खाद्य पदार्थ मिल सकें.
चटनी, कॉटन कैंडी और तंदूरी व्यंजनों पर विशेष जोर
दिशा-निर्देशों में स्ट्रीट फूड और ढाबों पर इस्तेमाल होने वाले रंगों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया है. समोसे, चाट, मोमोज और रोल के साथ परोसी जाने वाली हरी या लाल चटनी में प्रतिबंधित रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी गई है. इसके स्थान पर टमाटर, चुकंदर, धनिया और पुदीना जैसी खाद्य सामग्री से प्राकृतिक रंग और स्वाद प्राप्त करने की सलाह दी गई है.
कॉटन कैंडी यानी ‘बुढ़िया के बाल’ और बर्फ के गोलों में गैर-खाद्य रंगों, विशेषकर रोडामाइन-बी (Rhodamine B) का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित बताया गया है. इसी तरह चिकन टिक्का, कबाब, चाप और तली हुई मछली जैसे तंदूरी एवं मांसाहारी व्यंजनों को लाल रंग देने के लिए औद्योगिक डाई या किसी गैर-खाद्य रंग का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. आवश्यक रंग और स्वाद के लिए कश्मीरी लाल मिर्च, देगी मिर्च और अन्य उपयुक्त खाद्य सामग्री के उपयोग की सलाह दी गई है. पेपरिका एक्सट्रैक्ट का इस्तेमाल भी संबंधित खाद्य श्रेणी में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही किया जा सकेगा.
रंगों की मात्रा का अनुमान लगाने पर रोक
दिशा-निर्देशों में खाद्य कारोबारियों को रंग की खुली पुड़िया, चम्मच या चुटकी से सीधे कड़ाही अथवा पतीले में रंग डालने से बचने को कहा गया है. रंग की मात्रा मापने के लिए उपयुक्त डिजिटल वेइंग स्केल का इस्तेमाल करना होगा. यदि निर्धारित मात्रा को सटीक रूप से मापने की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो खाद्य रंग का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया है. इसका उद्देश्य रंगों की निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा के इस्तेमाल की आशंका को कम करना है.

मिठाई, बेकरी उत्पाद और पेय पदार्थों के लिए तय हैं सीमाएं
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पादों के मानक एवं खाद्य सहयोज्य) विनियम, 2011 में विभिन्न खाद्य श्रेणियों के लिए अनुमन्य रंगों और उनकी अधिकतम मात्रा का निर्धारण किया गया है. दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी खाद्य पदार्थ में रंग का इस्तेमाल तभी किया जा सकता है, जब संबंधित श्रेणी में उसकी अनुमति हो.
प्रमुख खाद्य श्रेणियों के लिए दिए गए प्रावधान
- मिठाइयां एवं कन्फेक्शनरी: बूंदी के लड्डू, जलेबी, बर्फी की सजावट और हार्ड कैंडी जैसे उत्पादों में अनुमन्य कृत्रिम रंगों की सामान्य अधिकतम सीमा 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम बताई गई है. संबंधित उत्पाद की श्रेणी और लागू शर्तों का पालन आवश्यक होगा.
- बेकरी उत्पाद: केक, पेस्ट्री, बिस्कुट, कुकीज और आइसिंग में अनुमन्य रंगों की निर्धारित सीमाओं का पालन करना होगा. ब्रेड और बन के मुख्य भाग में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल निषिद्ध है.
- दूध उत्पाद: फ्लेवर्ड मिल्क, दही और आइसक्रीम जैसी संबंधित खाद्य श्रेणियों में अनुमन्य रंगों के लिए निर्धारित सीमा लागू होगी.
- प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां: उत्पाद की प्रकृति के अनुसार रंगों की सीमा अलग-अलग है. दस्तावेज में डिब्बाबंद या ग्लेज्ड चेरी के लिए 200 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तथा अन्य प्रसंस्कृत फलों के लिए 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की सीमाएं दी गई हैं.
- गैर अल्कोहलिक पेय: संबंधित कृत्रिम रंगों के लिए तैयार पेय में 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम की अधिकतम सीमा का उल्लेख है.
- नमकीन एवं स्नैक्स: सेव, भुजिया और अन्य रेडी-टू-ईट नमकीन उत्पादों में संबंधित श्रेणी के लिए अनुमन्य रंगों तथा निर्धारित सीमा का पालन करना होगा.
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प्राकृतिक रंगों के लिए भी खाद्य श्रेणी के अनुसार अलग-अलग शर्तें और सीमाएं निर्धारित हैं. कुछ मामलों में गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) के तहत तकनीकी आवश्यकता के लिए जरूरी न्यूनतम मात्रा में रंग के इस्तेमाल का प्रावधान है. इसलिए किसी रंग को एक खाद्य पदार्थ में अनुमन्य होने के आधार पर सभी खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
इन खाद्य पदार्थों में रंग मिलाना प्रतिबंधित
- दूध एवं दुग्ध उत्पाद: कच्चा और पाश्चुरीकृत दूध, मलाई, सादा दही, बिना फ्लेवर वाला मक्खन, छेना और पनीर.
- फल एवं सब्जियां: ताजे फल और कच्ची सब्जियां.
- शिशु आहार: शिशु आहार और शिशु दुग्ध प्रतिस्थापक.
- पेय पदार्थ: प्राकृतिक फलों का रस, पैकेज्ड पेयजल और मिनरल वाटर.
- मसाले एवं पेय सामग्री: पिसे हुए मसाले, चायपत्ती और कॉफी.
- अनाज एवं खाद्यान्न: अनाज, दाल, आटा और सूजी.
- बेकरी उत्पाद: सादी ब्रेड.
- तेल एवं वसा: खाद्य तेल और खाद्य वसा.
- प्राकृतिक मीठे पदार्थ: गुड़ और शहद.
- सूखे खाद्य पदार्थ: सूखे मेवे.
- पका हुआ भोजन: दाल, सब्जियां, बिरयानी, चटनी और फ्रेंच फ्राइज.
प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम
एफएसडीए के अनुसार, रोडामाइन-बी, मेटानिल येलो, बटर येलो, मैलाकाइट ग्रीन, ऑरामाइन, ऑरेंज-II और सूडान डाइज जैसे गैर-अनुमन्य रंगों एवं औद्योगिक डाई के खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल पर रोक है. रोडामाइन-बी का इस्तेमाल कपड़ा और कागज रंगने में किया जाता है. इसके अवैध इस्तेमाल की आशंका कॉटन कैंडी, चटनी, तंदूरी चिकन और चमकीले लाल रंग की मिठाइयों में जताई गई है.
मेटानिल येलो का इस्तेमाल लड्डू, इमरती, बूंदी, हल्दी और अरहर की दाल को पीला रंग देने के लिए किए जाने की आशंका है. बटर येलो को खाद्य तेल और हल्दी में मिलावट से जोड़ा गया है, जबकि सूडान डाइज के अवैध इस्तेमाल की आशंका मिर्च पाउडर, करी पाउडर, गरम मसाले, सीजनिंग, पाम ऑयल और पैकेज्ड सॉस में बताई गई है. ऐसे गैर-अनुमन्य औद्योगिक रंगों का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. इससे यकृत एवं गुर्दे पर प्रतिकूल प्रभाव, एलर्जी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है.
खाद्य रंग खरीदने से लेकर इस्तेमाल तक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
खाद्य कारोबारियों को केवल वैध और अधिकृत स्रोतों से प्राप्त खाद्य रंग खरीदने और इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं. खरीद के समय उत्पाद की पैकेजिंग, लेबल, निर्माता या आपूर्तिकर्ता का विवरण तथा लागू लाइसेंस संबंधी जानकारी की जांच करनी होगी. खुले बाजार या पंसारी की दुकान से बिना लेबल वाले रसायनों अथवा खाद्य रंगों की खरीद और इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है. खाद्य रंगों की खरीद से संबंधित बिल, इनवॉइस और बैच नंबर सुरक्षित रखने होंगे, ताकि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के दौरान इन्हें प्रस्तुत किया जा सके.

नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान
दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि गैर-अनुमन्य रंगों का इस्तेमाल करना, ऐसे खाद्य पदार्थ में रंग मिलाना जहां इसकी अनुमति नहीं है, निर्धारित अधिकतम सीमा से ज्यादा रंग डालना अथवा पैकेज्ड उत्पाद पर खाद्य रंग से संबंधित अनिवार्य जानकारी अंकित नहीं करना नियमों का उल्लंघन हो सकता है. ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
