Home Latest News & Updates वाराणसी में अब इन 5 नए ठिकानों पर ही मिलेगा मीट-मछली, जानिए सावन से ठीक पहले क्यों लिया यह बड़ा फैसला

वाराणसी में अब इन 5 नए ठिकानों पर ही मिलेगा मीट-मछली, जानिए सावन से ठीक पहले क्यों लिया यह बड़ा फैसला

by Sanjay Kumar Srivastava 10 June 2026, 4:18 PM IST (Updated 10 June 2026, 4:19 PM IST)
10 June 2026, 4:18 PM IST (Updated 10 June 2026, 4:19 PM IST)
वाराणसी में अब इन 5 नए ठिकानों पर ही मिलेगा मीट-मछली, जानिए नगर निगम ने सावन से ठीक पहले क्यों लिया यह बड़ा फैसला

Varanasi Nagar Nigam: वाराणसी नगर निगम ने सावन के पवित्र महीने की शुरुआत से पहले शहर की सीमा के बाहर मांस, मछली और पोल्ट्री की सभी दुकानों को स्थानांतरित करने का फैसला किया है. नगर निगम ने जगह भी तय कर दी है. नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव ने बुधवार को कहा कि शहर के भीतर मांस, मछली और पोल्ट्री की लगभग 400 दुकानें चल रही हैं और सावन शुरू होने से पहले उन सभी को शहर के बाहरी इलाकों में तय जगहों पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि इसके लिए पांच जगहों रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर की पहचान की गई है.

नहीं प्रभावित होगा कारोबार

श्रीवास्तव ने कहा कि सावन के दौरान मांस व्यापारियों को हर साल काफी नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि इस अवधि में शहर के भीतर दुकानें आमतौर पर बंद रहती हैं. उन्हें नगर निगम की सीमा के बाहर स्थानांतरित करने से कारोबार जारी रह सकेगा और उनकी आजीविका में बाधा भी नहीं आएगी. वाराणसी के रहने वाले अजय शर्मा ने इस कदम का स्वागत किया और कहा कि भगवान विश्वनाथ का निवास स्थान होने के कारण यह शहर देश-विदेश से लाखों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

शहर से बाहर जाना व्यावहारिक नहीं

शर्मा ने कहा कि हम प्रशासन के फैसले का स्वागत करते हैं. शर्मा ने शराब की दुकानों को भी काशी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की. कहा कि शहर के धार्मिक इलाकों में ऐसी दुकानें नहीं चलनी चाहिए. बंगाली टोला के निवासी सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि मछली और मांस कई परिवारों के दैनिक आहार और धार्मिक परंपराओं का एक अभिन्न अंग है. उन्होंने कहा कि हमारा परिवार लगभग हर दिन मछली खाता है. मछली और मांस खरीदने के लिए नियमित रूप से शहर से बाहर जाना व्यावहारिक नहीं होगा.

मुखर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि प्रशासन मीट की दुकानों को ही क्यों निशाना बना रहा है, जबकि शहर भर में शराब और नशीले पदार्थों की दुकानें चल रही हैं. मंडुआडीह के रहने वाले अनीश सिंह ने कहा कि इस कदम से हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों को ही परेशानी होगी. उन्होंने कहा कि मीट खाने वाले लोग किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं. अभी लोग स्थानीय बाज़ारों से मीट खरीदते हैं, लेकिन ऐसी खरीदारी के लिए दूर तक जाना मुश्किल होगा.

ऑनलाइन मीट कारोबारियों को होगा फायदा

सिंह ने कहा कि इस फ़ैसले से ऑनलाइन मीट डिलीवरी करने वाले व्यवसायों को फ़ायदा हो सकता है, जबकि ग्राहकों के लिए लागत बढ़ सकती है. जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि वाराणसी की साफ-सफाई और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना हर निवासी की ज़िम्मेदारी है. इस मक़सद को पूरा करने के लिए उठाए गए किसी भी कदम का स्वागत है. मीट व्यापारी साहिल ने कहा कि दुकानों को शहर के बाहरी इलाकों में ले जाने से कारोबार पर बुरा असर पड़ सकता है.

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News Source: PTI

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