Best Place for Retirement: एक टाइम था जब रिटायरमेंट का मतलब कामकाज से पूरी तरह दूरी बनाकर घर में आराम करना माना जाता था. लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है. अब रिटायरमेंट लाइफ की स्पीड को रोकने का नहीं, बल्कि उसे अपने तरीके से जीने का मौका है. ये वो टाइम है जब लोग अपने अधूरे शौक पूरे करना चाहते हैं, नई जगहें घूमना चाहते हैं और ऐसी लोकेशन पर बसना चाहते हैं जहां जिंदगी कंफर्टेबल, सेफ और स्ट्रेस फ्री गुज़रे. भारत के बड़े-बड़े शहर आज पॉल्यूशन, ट्रैफिक और बढ़ते खर्चों की वजह से कई लोगों के लिए चैलेंज बन चुके हैं. यही वजह है कि अब बहुत से सीनियर सिटिज़न और एनआरआई रिटायरमेंट के बाद छोटे और पीसफुल शहरों में बस रहे हैं. अब लोग ऐसे शहर ढूंढ रहे हैं जहां मौसम अच्छा हो, हेल्थ सर्विसेस बेहतरीन हों, कोस्ट ऑफ लिविंग भी कम हो और सोशल लाइफ भी एक्टिव बनी रहे. अगर आप भी अपनी लाइफ की सेकंड इनिंग के लिए सही जगह की तलाश कर रहे हैं, तो भारत के ये 6 शहर आपके लिए शानदार ऑप्शन साबित हो सकते हैं.

देहरादून
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को अक्सर पेंशनर्स पैराडाइज यानी सीनियर सिटिजन्स का स्वर्ग भी कहा जाता है. हिमालय के फुटहिल्स में बसा ये शहर अपनी नेचुरल खूबसूरती, बढ़िया AQI यानी साफ हवा और पीसफुल एनवायरमेंट के लिए जाना जाता है. यहां का सुहाना मौसम इस शहर की सबसे बड़ी खासियतों में से एक है. देहरादून में गर्मियां ज्यादा परेशान नहीं करतीं और सर्दियां भी अच्छी गुज़रती हैं. यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ यहां रहना काफी कंफर्टेबल होता है. वैसे भी, पिछले कुछ सालों में देहरादून में सीनियर सिटिजन्स के लिए रिटायरमेंट कम्युनिटीज भी तेजी से डेवलप हुई हैं. ऐसे में यहां आपको पीसफुल माहौल के साथ-साथ सोशल कनेक्टिविटी और मॉर्डन फैसिलिटी भी मिलती हैं. इन सबके अलावा देहरादून में हेल्थ फैसिलिटी काफी बढ़ियां हैं, इस वजह से भी ये शहर बुजुर्गों के रहने के लिए बेहतरीन माना जाता है.

पुणे
अब बात करते हैं पुणे शहर के बारे में. महाराष्ट्र का पुणे लंबे टाइम से रिटायर लोगों की फेवरेट जगहों में शामिल रहा है. अगर आप मुंबई जैसी फैसिलिटी चाहते हैं लेकिन वहां की भीड़, ट्रैफिक और फास्ट स्पीड लाइफ से दूर रहना चाहते हैं, तो पुणे एक बेहतरीन ऑपशन है. महाराष्ट्र का ये शहर मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर और कल्चरल हेरिटेज का शानदार कॉम्बिनेशन है. इस शहर का मौसम सालभर अच्छा ही रहता है. मुंबई या देश के बाकी मेट्रो शहरों की तुलना में यहां की हवा की कम पॉल्यूटेड है. पुणे का एक और बड़ा फायदा इसकी लोकेशन है. अगर आपके बच्चे या रिश्तेदार मुंबई या साउथ इंडिया के बाकी शहरों में रहते हैं, तो उनसे मिलना-जुलना भी काफी आसान रहता है. आने-जाने के लिए इस शहर में हर तरह की फैसिलिटी और कनेक्टिविटी है. भले ही पुणे की लाइफस्टाइल पीसफुल है, लेकिन यहां पर फैसिलिटी की कोई कमी महसूस नहीं होती. देखा जाए तो, एकेडमिक सेंटर होने के साथ-साथ पुणे में सिनियर सिटिजन कम्यूनिटी काफी एक्टिव रहती है.

कोयंबटूर
तमिलनाडु का कोयंबटूर तेजी से रिटायर लोगों का पसंदीदा शहर बनता जा रहा है. वेस्टर्न घाट के एंट्री गेट के रूप में पहचाना जाने वाला ये शहर सुहाने मौसम और कंफर्टेबल लाइफस्टाइल के लिए फेमस है. वैसे, कोयंबटूर उन भारतीय शहरों में शामिल है जहां ऑर्गेनाइज्ड रिटायरमेंट कम्युनिटीज की शुरुआत हुई थी. आज यहां हर बजट और जरूरत के हिसाब से लोगों के लिए एकोमोडेशन्स के ऑप्शन मौजूद हैं. सबसे खास बात ये है कि यहां कोस्ट ऑफ लिविंग चेन्नई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है. वहीं, आसपास मौजूद नीलगिरि की पहाड़ियां नेचर लवर्स के लिए किसी बोनस से कम नहीं हैं. मंदिर, पार्क, मार्केट और कल्चरल प्रोग्राम यहां की लाइफ को बैलेंस और कंफर्टेबल बनाते हैं. इन सबके अलावा सबसे जरूरी हेल्थ फैसिलिटीज भी यहां काफी बढ़ियां हैं. इस शहर में कई मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल हैं, जो 24 घंटे सर्विस देते हैं. इस शहर में ‘नाना नानी होम्स’ और ‘कोवाई केयर’ जैसे कई सीनियर लिविंग स्पेस हैं. साथ ही कोयंबटूर में क्राइम रेट भी काफी कम है. यही वजह है कि यहां पर बुजुर्ग खुद को सेफ फील करते हैं. पानी और हरियाली की भी यहां कोई कमी नहीं है. देखा जाए तो, कोयंबटूर रिटायरमेंट होम या सीनियर लिविंग के लिए काफी बढ़िया शहर है.

मैसूर
कर्नाटक का मैसूर भारत के सबसे साफ और वेल प्लान्ड शहरों में गिना जाता है. यहां का पीसफुल एनवायरमेंट और कम भीड़-भाड़ सीनियर सिटिजन्स को खास तौर पर अट्रैक्ट करता है. बेंगलुरु की तुलना में यहां मकान, डेली लाइफ की जरूरतें और कोस्ट ऑफ लिविंग काफी कम है. इसके बावजूद हेल्थ सर्विस, ट्रांसपोर्ट और बाकी सिविक अमेनिटी भी बढ़िया लेवल की हैं. मैसूर की चौड़ी सड़कें, हरियाली से भरे पार्क, खूबसूरत और ऐतिहासिक इमारतें, सालभर होने वाले कल्चरल सेलिब्रेशन इस जगह को और खास बनाते हैं. ऐसे में अगर आपको म्यूज़िक, आर्ट, हिस्ट्री और ट्रेडिशन्स में इंटरेस्ट है, तो यहां आपको हर दिन कुछ नया सीखने और देखने को मिलेगा. यहां की स्लो लाइफ बुजुर्गों को फास्ट लाइफस्टाइल से आज़ादी दिलाती है. मैसूर का मौसम भी सालभर सुहाना ही रहता है. यानी यहां न ज्यादा सर्दी पड़ती है और ना ही सड़ी गर्मी. ऐसा मौसम सीनियर सिटिजन्स को काफी पसंद आता है. इसके अलावा भारत की सबसे सेफ सिटी में शामिल होने की वजह से मैसूर में रहने वाले लोग कभी भी अनसेफ फील नहीं करते.

पुडुचेरी
अगर आपका सपना रिटायरमेंट के बाद समंदर के किनारे पीसफुल लाइफ बिताने का है, तो पुडुचेरी आपके लिए सबसे बेस्ट जगह हो सकती है. फ्रांसीसी कल्चर की झलक दिखाने वाला भारत का ये खूबसूरत शहर रिटायरमेंट डेस्टिनेशंस के लिए एकदम परफेक्ट है. रंग-बिरंगी इमारतें, पेड़ों से घिरी सड़कें, छोटे-छोटे कैफे और पीसफुल बीच इस शहर की पहचान हैं. शहर का स्ट्रेस फ्री माहौल इसे बुजुर्गों के बीच तेजी से पॉपुलर बना रहा है. इस शहर में वर्ल्ड लेवल की हेल्थ फैसिलिटी मौजूद हैं. 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए यहां पर आयुष्मान भारत वय वंदना योजना भी लागू है. यानी 70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को इस शहर में 5 लाख तक का फ्री और कैशलेस इलाज मिलता है. इस वजह से भी पुडुचेरी को सिनियर सिटिजन्स ज्यादा पसंद करते हैं. यहां के क्लीन बीच और कम पॉल्यूशन वाला एनवायरमेंट फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए अच्छा है. चेन्नई के करीब होने की वजह से यहां की ट्रांसपोर्ट कनेक्टिविटी भी अच्छी है. इन सबके अलावा, जो लोग स्प्रिचुएलिटी और मन की शांति की तलाश में हैं, उनके लिए यहां कई आश्रम हैं. ऐसे में आप अपनी सेकेंड इनिंग के लिए इस तरह को भी विश लिस्ट में रख सकते हैं.

वाराणसी
वाराणसी, दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक है. इस शहर में स्प्रिचुएलिटी और कल्चर का खूबसूरत कॉम्बिनेशन देखने को मिलता है. भारत का ये शहर सीनियर सिटिजन्स को खासतौर से अपनी तरफ अट्रैक्ट करता है. गंगा के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर और सारनाथ जैसी जगह बुजुर्गों को पूजा-पाठ के लिए बढ़िया माहौल देती हैं. यहां आप सुबह और शाम गंगा आरती का अद्भुत नज़ारा देख सकते हैं. इसके अलावा नाव की सैर का भी मज़ा ले सकते हैं. वाराणसी में कई ऐसे आश्रम हैं, जो बुजुर्गों के लिए एकदम सेफ हैं. इस शहर की स्प्रिचुएलिटी ही नहीं बल्कि यहां की बढ़िया हेल्थ फैसिलिटी भी सिनियर सिटिजन्स को अपनी तरफ खींचती है. यहां पर कई बड़े और मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल हैं. इन सबके अलावा यहां कॉस्ट ऑफ लिविंग बाकी बड़े शहरों की तुलना में काफी कम है. वहीं, ये शहर यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क का हिस्सा है. ऐसे में अगर आप रिटायरमेंट के बाद एक ऐसी जगह पर रहना चाहते हैं, जहां आपको मेंटल पीक के साथ-साथ अच्छी लाइफस्टाइल मिले, तो वाराणसी अच्छा ऑप्शन है.

दूसरी पारी को बनाएं यादगार
रिटायरमेंट सिर्फ नौकरी छोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि ये अपने लिए जीने की नई शुरुआत भी है. ऐसे में सही शहर आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ, हेल्थ और खुशियों पर बड़ा असर डाल सकता है. पुणे की मॉर्डन सुविधाएं हों, देहरादून का पीसफुल एनवायरमेंट, कोयंबटूर की बैलेंस्ड लाइफ, मैसूर का ऑर्गेनाइज्ड कल्चर, वाराणसी की स्प्रिचुअल जर्नी या फिर पुडुचेरी के सुकून भरे बीच, ये सभी शहर अपने आप में बहुत खास है. जरूरत सिर्फ ये तय करने की है कि आप अपनी सेकेंड इनिंग का सपना किस शहर में देखते हैं. साथ ही आपके लिए कौन सा शहर ज्यादा कंफर्टेबल और अपनों के करीब है. वैसे, इन सभी जगहों में एक बात कॉमन है और वो है, यहां सीनियर सिटिजन्स के लिए अच्छी हेल्थ फेसिलिटीज, लो कॉस्ट ऑफ लिविंग और स्ट्रेस फ्री जीने का मौका. हालांकि, किसी भी शहर को चुनने से पहले अपनी जरूरतों, बजट, हेल्थ और फैमिली से दूरी जैसे खास पहलुओं के बारे में जरूर सोचें. आखिरकार, रिटायरमेंट का असली मतलब सिर्फ आराम करना नहीं, बल्कि हर दिन को अपनी शर्तों पर जीना है. यही वजह है कि, अगर आप भी अपनी लाइफ की दूसरी पारी को एंजॉय करना चाहते हैं, सेफ और यादगार बनाना चाहते हैं, तो आज से ही उस शहर की तलाश शुरू कर दीजिए जहां आपको सुकून, अपनापन और लाइफ को लेकर नई एक्साइटमेंट फील हो. वैसे भी, सही जगह पर बिताया गया रिटायरमेंट, लाइफ के सबसे खूबसूरत चैप्टर में से एक बन सकता है.
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