Baba Barfani : बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने के बाद भी श्रद्धालुओं का तांता बना लगा हुआ है. 3 जुलाई से शुरू हुई श्री अमरनाथ यात्रा में अब तक करीब सवा लाख श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं. हालांकि, यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर प्राकृतिक हिमलिंग का स्वरूप अंतर्ध्यान हो गया है. इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही. देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु लगातार पवित्र गुफा में पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं और इसे अपनी आस्था का विषय बता रहे हैं.
दर्शन के लिए हर साल पहुंचते हैं लाखों भक्त
हर वर्ष सावन के दौरान श्री अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिमलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है. यात्रा के शुरुआती दिनों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को हिमलिंग का पूर्ण स्वरूप देखने का अवसर मिलता है, लेकिन इस बार अपेक्षाकृत कम समय में हिमलिंग के अंतर्ध्यान होने से कई सवाल उठने लगे हैं. श्रद्धालुओं का कहना है कि इसका एक बड़ा कारण बढ़ता तापमान और ग्लोबल वार्मिंग हो सकता है. उनका मानना है कि चाहे हिमलिंग अब दिखाई नहीं दे रहा हो, लेकिन भगवान शिव हर कण में विराजमान हैं और उनकी आस्था पहले की तरह अटूट है. श्रद्धालुओं ने यह भी कहा कि यात्रा का समय और बेहतर ढंग से तय किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को हिमलिंग के पूर्ण दर्शन का अवसर मिल सके.
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पर्वतीय क्षेत्रों में दिखने लगा है प्रभाव
इस विषय पर जम्मू विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के HOD नीरज शर्मा ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है. बढ़ते तापमान का असर केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर होता है. उन्होंने बताया कि हिमनदों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की झीलों पर भी इसका असर पड़ रहा है, जिससे भविष्य में फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में ऐसे प्रभाव पहले भी देखने को मिल चुके हैं और जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भी ऐसी आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता.
प्राकृतिक हिमलिंग को कर सकती है प्रभावित
नीरज शर्मा के अनुसार अमरनाथ गुफा के आसपास बढ़ती मानवीय गतिविधियां भी प्राकृतिक हिमलिंग को प्रभावित कर सकती हैं. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, जनरेटर, हेलीकॉप्टर सेवाएं, लंगर और अन्य व्यवस्थाओं से स्थानीय तापमान और पर्यावरण पर असर पड़ता है. उनका सुझाव है कि गुफा के आसपास सीमित गतिविधियां हों, श्रद्धालु अधिक से अधिक पैदल यात्रा करें और गुफा के लगभग 500 मीटर के दायरे में अनावश्यक गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि वहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और प्राकृतिक हिमलिंग का संरक्षण किया जा सके.
- जम्मू-कश्मीर से रविंदर कुमार श्रीवास्तव की रिपोर्ट
