Home धर्म Ganesh Chaturthi 2024: भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी रोचक बातें, जो शायद आपने कहीं नहीं सुनी होंगी

Ganesh Chaturthi 2024: भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी रोचक बातें, जो शायद आपने कहीं नहीं सुनी होंगी

by Pooja Attri 7 September 2024, 1:29 PM IST (Updated 19 August 2025, 12:22 PM IST)
7 September 2024, 1:29 PM IST (Updated 19 August 2025, 12:22 PM IST)
Ganesh Chaturthi 2024: भगवान गणेश से जुड़ी ऐसी रोचक बातें, जो शायद आपने कहीं नहीं सुनी होंगी

Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी के अवसर पर आज हम आपको भगवान गणेश से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बताएंगे, जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे.

07 September, 2024

Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी महोत्सव की 07 सितंबर, शनिवार से शुरुआत हो चुकी है. यह पर्व देशभर में 10 दिनों तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. भगवान गणेश को बुद्धि के देवता माना जाता है, जो व्यक्ति बप्पा की पूजा करता है उसे बुद्धि, विवेक, यश, विद्या और सिद्धि की प्राप्ति होती है. ऐसे में आज हम आपको भगवान गणेश से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बताएंगे, जिनके बारे में शायद आप नहीं जानते होंगे.

लिए थे 64 अवतार

भगवान गणेश ने धरती पर 64 अवतार लिए थे, मगर उनके 12 अवतार ही ऐसे हैं जिनकी पूजा की जाती है.

प्रमुख नाम 12

बप्पा के हर नाम के पीछे कहानी छिपी हुई है. गणेशजी के 12 प्रमुख नाम है- कपिल, लम्बोदर, विघ्ननाशक(विघ्नहर्ता), एकदंत, सुमुख, गणाध्यक्ष, गजानन, भालचन्द्र, विनायक, धूम्रकेतु, गजकर्णक और विकट.

असली नाम

गणेशजी का पहला नाम विनायक माना जाता है जिसे बप्पा का असली नाम भी माना जाता है.

शरीर का रंग

वैसे तो भगवान गणेश के हर अवतार का रंग अलग है. लेकिन उनके शरीर का प्रमुख रंग लाल और हरा है. लाल रंग शक्ति और हरा रंग स्मृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

गणपति की सवारी

गणपति ने हर युग में अवतार लिया है इसलिए उन्हें आदिदेव कहा जाता है. भगवान गणेश सतयुग में शेर, त्रेता युग में मोर, द्वापर में चूहे और कलिकाल में घोड़े पर सवार बताए गए हैं.

पूर्व जन्म

धार्मिक मान्यतानुसार भगवान गणेश का जन्म द्वापर युग में ऋषि पराशर के घर गजमुख नाम से हुआ था. उनका वाहन चूहा था जो अपने पूर्व जन्म में एक गंधर्व हुआ करता था.

केतु ग्रह से संबंध

ज्योतिष शास्त्र की बात की जाए तो भगवान गणेश को केतु का नाम दिया गया है. बप्पा का पूजन करने से कुंडली से बुध और केतु ग्रह के बुरे प्रभावों को दूर किया जा सकता है.

पौराणिक लेखक

भगवान गणेश ने ‘महाभारत’ का लेखन किया था इसलिए उन्हें पौराणिक पत्रकार या लेखक भी कहा जाता है. ‘महाभारत’ ग्रंथ के रचयिता वेदव्यास थे, मगर इसके लेखन का कार्य गणपति ने किया था.

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