Magh Purnima Vrat Katha: माघ पूर्णिमा का बुहत महत्व होता है. जानें माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या है, व्रत कथा क्या है और इस दिन किस प्रकार पूजा करनी चाहिए.
31 January, 2026
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का विशेष महत्व है. हर महीने की पूर्णिमा किसी खास देवता, व्रत या त्योहार से जुड़ी होती है. माघ महीने की पूर्णिमा को इसलिए भी खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन माघ मेले में कल्पवास का समापन हो जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन ब्रह्मांड के संरक्षक भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख, शांति और समृद्धि आती है. इस दिन स्नान, दान और उपवास किया जाता हैं. चलिए जानते हैं कि माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या है, व्रत कथा क्या है और इस दिन किस प्रकार पूजा करनी चाहिए.

माघ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
वैदिक कैलेंडर के अनुसार, माघ पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5:52 बजे शुरू होगी और 2 फरवरी को सुबह 3:38 बजे समाप्त होगी. इस दिन प्रार्थना और अनुष्ठानों के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:24 बजे से 6:17 बजे तक होगा. इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:13 बजे से 12:57 बजे तक होगा, जिसके दौरान पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है. गोधूलि मुहूर्त शाम 5:58 बजे से 6:24 बजे तक होगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:23 बजे से 3:07 बजे तक भी शुभ माना जाता है.
माघ पूर्णिमा पर पूजा नियम
माघ पूर्णिमा पर सुबह नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए. स्नान करने के बाद, सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए और रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. इस दिन गुस्सा, बहस, झूठ और नकारात्मक भावनाओं से बचना चाहिए, काले कपड़े पहनने से बचना चाहिए और घर और मंदिर में साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए. पूर्णिमा के दिन जरूरतमंदों को खाना, तिल या कपड़े दान करने से पुण्य मिलता है.

माघ पूर्णिमा की कथा
माघ पूर्णिमा की पौराणिक कथा के अनुसार, नमर्दा नदी के किनारे शुभव्रत नाम का ब्राह्मण रहता था. शुभव्रत बहुत ही विद्वान था लेकिन बहुत लालची भी था. वह बस धन कमाने के बारे में सोचता था, चाहे तरीका कोई भी हो. समय के साथ उसके शरीर में बहुत सी बीमारियां होने लगी. वह अपनी आयु से ज्यादा बूढ़ा दिखने लगा. इसके बाद उसे सद्बुद्धि आई और अहसास हुआ कि उसका पूरा जीवन धन कमाने में बीत गया लेकिन उसने उद्धार के लिए कुछ नहीं किया.
उसने माघ के महीने में नर्मदा नदी में स्नान करना शुरू कर दिया. शुभव्रत ने लगातार 9 दिनों तक स्नान किया. लगातार स्नान करने से उसकी तबीयत और खराब हो गई. शुभव्रत को लगा कि अब उसकी मृत्यु होने वाली है और उसने कोई अच्छा कार्य नहीं किया. अब उसे मोक्ष की प्राप्ति कैसे होगी. जब शुभव्रत की मृत्यु हुई तो इसके विपरीत हुआ. केवल 9 दिनों तक नर्मदा में स्नान करने से उसपर भगवान विष्णु की कृपा हुई और मोक्ष मिला.
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