Iran Pink Mosque: ज्यादातर लोग ईरान को युद्ध के लिए जानते हैं, लेकिन आज हम आपको वहां की कला से रूबरू कराएंगे. यहां आपको ईरान की पिंक मस्जिद कहे जानी वाली नासिर अल-मुल्क मस्जिद के बारे में बताया गया है
17 March, 2026
आज युद्ध के कारण ईरान पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. ईरान शिया मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण देश है. ईरान के सप्रीम लीडर को पूरी दुनिया के शिया मुसलमान अपना धार्मिक नेता मानते हैं. ज्यादातर लोग केवल यही जानते हैं कि ईरान एक कट्टर इस्लामिक शासन वाला देश है, लेकिन आज हम आपको वहां की कला के बारे में बताएंगे. ईरान की पिंक मस्जिद कही जाने वाली नासिर अल-मुल्क मस्जिद में हमें धर्म और कला का एक संगम देखने को मिलता है. यहां की दीवारों से लेकर फर्श तक हर तरफ सिर्फ गुलाबी रंग दिखता है.

रंगीन टाइल्स दिखाती हैं जादू
ईरान के शिराज में नासिर अल-मुल्क मस्जिद जरूर देखने लायक है, यह वास्तुकला और प्रकृति का अनोखा मेल है. दुनिया भर में “पिंक मस्जिद” के नाम से मशहूर यह इमारत न सिर्फ इबादत की जगह है. इसे पिंक मस्जिद इसलिए कहा जाता है, क्योंकि पूरी मस्जिद में ज्यादातर गुलाबी, नीले और पीले रंग की टाइल्स लगी हैं. इन पर सुंदर फूलों के डिजाइन बने हैं. कला पसंद करने वाले लोगों के लिए यह जन्नत से कम नहीं है.

धूप में चमकता है फर्श
मस्जिद की सबसे खूबसूरत बात इसकी रंगीन कांच की खिड़कियां हैं. जब सुबह की धूप इन रंगीन खिड़कियों से आती है, तो फर्श की चमक जन्नत जैसी दिखने लगती है. रोशनी और रंगों के मेल का यह नजारा बहुत ही खूबसूरत होता है, जो देखने वालों को हैरान कर देता है. इसके बीच में एक फव्वारा, जिसके पास बैठकर बहुत शांति मिलती है. मस्जिद में मुख्य गेट पर संगमरमर के पत्थर लगे हैं, जिस पर कविताएं लिखी हैं. नमाज हौल में इसी तरह रंग-बिरंगी टाइल्स से डिजाइन बनाए गए हैं.
1876 में रखी गई थी नींव

ईरान के शिराज में मशहूर नासिर अल-मुल्क मस्जिद (गुलाबी मस्जिद) का निर्माण मिर्ज़ा हसन अली (नासिर अल-मुल्क) ने करवाया था, जो कजर वंश के एक सम्मानित व्यक्ति थे. इसका निर्माण 1876 में शुरू हुआ और 1888 में पूरा हुआ. इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए, 1955 में इसे ईरान की नेशनल हेरिटेज लिस्ट में शामिल किया गया था. अभी ईरान का कल्चरल हेरिटेज, हैंडीक्राफ्ट्स और टूरिज्म ऑर्गनाइजेशन इसकी देखरेख करता है. इस मस्जिद में फारसी वास्तुकला की समझ देखने को मिलती है.
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