Home Religious 16 या 17 मई किस दिन रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, जानें सुहागिन महिलाएं क्या करें और क्या न करें

16 या 17 मई किस दिन रखा जाएगा वट सावित्री व्रत, जानें सुहागिन महिलाएं क्या करें और क्या न करें

by Neha Singh
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Vat Savitri Puja Vidhi

Vat Savitri Puja Vidhi: वट सावित्री का व्रत सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह पति के प्रति पत्नी के प्यार और समर्पण का प्रतीक है. जानें कब वट सावित्री व्रत और इसकी पूजा विधि.

10 May, 2026

हिंदू धर्म में व्रत रखने का बहुत महत्व है. महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं. इसी तरह सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट सावित्री का व्रत रखती हैं. यह उनके लिए खास महत्व रखता है. यह व्रत सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह पति के प्रति पत्नी के प्यार और समर्पण का प्रतीक है. व्रत और त्योहार तिथि के अनुसार किए जाते हैं. कई लोगों को वट सावित्री व्रत की सही तिथि की जानकारी नहीं होती. चलिए जानते हैं वट सावित्री व्रत कब है, इसका महत्व क्या है और सुहागिन महिलाएं इस दिन किया करती हैं.

Vat Savitri Puja Vidhi

कब है वट सावित्री व्रत

वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को रखा जाता है. पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ अमावस्या तिथि 16 मई 2026 को सुबह 5:11 बजे शुरू होगी और 17 मई को सुबह 1:30 बजे समाप्त होगी. उदय तिथि के आधार पर, वट सावित्री व्रत शनिवार, 16 मई 2026 को रखा जाएगा.

सावित्री और सत्यवान की कथा से प्रेरित है व्रत

वट सावित्री का व्रत माता सावित्री और उनके पति सत्यवान की कथा से जुड़ा है. माता सावित्री ने अपने समर्पण और प्रेम के बल से यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी. जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे, तब सावित्री ने उन्हें खुद को साथ ले जाने की बात कही. यमराज सावित्री की बुद्धिमानी से खुश हुए, तब सावित्री ने उनसे सौ पुत्रों को वरदान मांगा. इस तरह उन्होंने अपने पति के प्राणों की रक्षा की. यह सब कुछ वट वृक्ष के नीचे हुआ था. वट वृक्ष की उम्र भी बहुत लंबी होती है. इसी कारण आज भी महिलाएं वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करती हैं और वट सावित्री की कथा पढ़ती हैं.

वट सावित्री पूजा के दौरान क्या करें

इस दिन सुहागिन महिलाएं सुबह जल्दी नहाकर पीली या लाल साड़ी पहनें. शादीशुदा महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है. अपनी थाली में भीगे हुए चने, ताजे फल, मिठाई, धूप, एक दीया और एक बांस का पंखा रखें. बरगद के पेड़ की जड़ों में पानी चढ़ाएं और सिंदूर का तिलक लगाकर श्रद्धा से बरगद के पेड़ की पूजा करें. पेड़ के चारों ओर सात बार कलावा लपेटें, जो पति-पत्नी के बीच अटूट रिश्ते का प्रतीक है. पूजा पूरी होने के बाद, सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या सुनें. आखिर में, घर के बड़ों के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें.

Vat Savitri Puja Vidhi

क्या न करें?

  • इस दिन काले, नीले या सफेद कपड़े और चूड़ियां नहीं पहननी चाहिए. इसके बजाय, लाल या पीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है.
  • व्रत के दौरान किसी के लिए गुस्सा या कड़वाहट न रखें, न ही किसी का अपमान करें.
  • बरगद के पेड़ पर धागा लपेटते समय ध्यान रखें कि धागा टूटे नही, धागा टूटने को अशुभ माना जाता है.
  • घर में किसी भी तरह के लड़ाई-झगड़े से बचें.
  • घर में तामसिक भोजन न बनाएं.
  • अगर आपकी तबीयत ठीक नहीं है, तो ज़्यादा मेहनत न करें. अपने स्वास्थ्य के हिसाब से नियमों का पालन करें.

यह भी पढ़ें- एक चतुर वरदान मांगकर यमराज से पति के प्राण मांग लाई थी सावित्री, पढ़ें वट सावित्री की अद्भुत कथा

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