Home राज्यMaharashtra कर्ज के बदले ‘किडनी’: महाराष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, कंबोडिया से जुड़े तार

कर्ज के बदले ‘किडनी’: महाराष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय अंग तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, कंबोडिया से जुड़े तार

by Sanjay Kumar Srivastava
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Kidney Gang: महाराष्ट्र में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय किडनी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के तार कंबोडिया से जुड़े बताए जा रहे हैं.

Kidney Gang: महाराष्ट्र में पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय किडनी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. गिरोह के तार कंबोडिया से जुड़े बताए जा रहे हैं. मामले का खुलासा तब हुआ जब किसान लिए गए कर्ज को चुका नहीं पाया. इस पर गिरोह ने किसान को कंबोडिया ले जाकर उसकी किडनी निकाल ली. इस मामले में दो डॉक्टरों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस दिल्ली और त्रिची रवाना हो गई है. महाराष्ट्र में एजेंटों, दाताओं, डॉक्टरों और अस्पतालों से जुड़े किडनी प्रत्यारोपण नेटवर्क का खुलासा हुआ है. तमिलनाडु के त्रिची स्थित एक निजी अस्पताल में कई अवैध प्रत्यारोपण ऑपरेशन किए गए थे. जांच के दौरान दो डॉक्टरों के नाम सामने आने के बाद एसआईटी और स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) के कर्मियों को दिल्ली और त्रिची भेजा गया है. यह जांच चंद्रपुर जिले के किसान रोशन कुडे की शिकायत पर शुरू हुई. स्थानीय साहूकारों से लिए गए कर्ज को चुकाने के लिए कंबोडिया में किसान की किडनी निकाल ली गई थी. चंद्रपुर के पुलिस अधीक्षक सुदर्शन मुम्मका ने बताया कि पुलिस ने अब तक छह साहूकारों को गिरफ्तार किया है.

दिल्ली और त्रिची के डॉक्टर रडार पर

पुलिस अधीक्षक मुम्मका ने बताया कि जांच में कंबोडिया तक फैले अंतरराष्ट्रीय संबंधों और एजेंटों, दाताओं, डॉक्टरों और अस्पतालों को शामिल करने वाले अखिल भारतीय गुर्दा प्रत्यारोपण नेटवर्क का पता चला है. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि एक आरोपी हिमांशु भारद्वाज ने नई दिल्ली के डॉ. रविंदर पाल सिंह और त्रिची के स्टार किम्स अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. राजरत्नम गोविंदास्वामी द्वारा अपनी किडनी के शल्य चिकित्सा द्वारा निकाले जाने की बात स्वीकार की है. पुलिस अधिकारी ने कहा कि इन तथ्यों की पुष्टि कृष्णा नामक एक आरोपी के बयान और तकनीकी साक्ष्यों से हुई है. जांच में पता चला कि त्रिची के स्टार किम्स अस्पताल में कई अवैध गुर्दा प्रत्यारोपण किए गए थे. प्रत्येक गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए 50 से 80 लाख रुपये तक की रकम वसूली गई. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि डॉ. रविंदर पाल सिंह इलाज और अस्पताल के खर्चों के लिए लगभग 10 लाख रुपये लेते थे, जबकि डॉ. गोविंदास्वामी लगभग 20 लाख रुपये वसूलते थे. आरोपी कृष्णा उर्फ ​​रामकृष्ण सुंचू ने लगभग 20 लाख रुपये जमा किए.

कर्ज बना जान का दुश्मन

मुम्मका ने कहा कि सूचना मिलने पर एसआईटी और स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) के कर्मियों को दिल्ली में डॉ. रविंदर पाल सिंह और त्रिची में डॉ. गोविंदास्वामी को गिरफ्तार करने के लिए भेजा गया. मुम्मका ने कहा कि ट्रांजिट रिमांड की कार्यवाही के दौरान डॉ. रविंदर पाल सिंह को दिल्ली की एक अदालत ने अंतरिम जमानत दे दी है और उन्हें 2 जनवरी को चंद्रपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया है. पुलिस जांच के दौरान डॉ. गोविंदास्वामी को गिरफ्तार करने के भी प्रयास कर रही है. इससे पहले एसआईटी ने महाराष्ट्र के सोलापुर से एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया था.जांच में पता चला है कि उसने लगभग 10-12 लोगों को किडनी निकलवाने के लिए कंबोडिया के एक अस्पताल में ले जाकर रैकेट चलाने वालों से कमीशन लिया था. पुलिस के अनुसार, किसान कुडे ने शुरू में साहूकारों से 1 लाख रुपये उधार लिए थे, लेकिन अत्यधिक ब्याज दरों के कारण यह राशि बढ़कर 74 लाख रुपये हो गई. अपनी संपत्ति बेचने के बावजूद वह पूरी राशि चुकाने में असमर्थ रहा.

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