भारत में इन जगहों पर होती है रावण की पूजा
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07 Feb 2026
'मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश...' पढ़ें वसीम बरेलवी के चुनिंदा शेर.
तिरा कहलाना
ऐसे रिश्ते का भरम रखना कोई खेल नहीं,
तेरा होना भी नहीं और तिरा कहलाना भी.
मिरा नाम
आते आते मिरा नाम सा रह गया,
उस के होंटों पे कुछ काँपता रह गया.
भीड़ की तरफ़
हर शख़्स दौड़ता है यहाँ भीड़ की तरफ़,
फिर ये भी चाहता है उसे रास्ता मिले.
जीने का हक़
उसी को जीने का हक़ है जो इस ज़माने में,
इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए.
सुनता रहा ख़ामोश
मैं बोलता गया हूँ वो सुनता रहा ख़ामोश,
ऐसे भी मेरी हार हुई है कभी कभी.
शहरियत नहीं
हमारे घर का पता पूछने से क्या हासिल,
उदासियों की कोई शहरियत नहीं होती.
तू मिरा ख़्वाब
मैं ने चाहा है तुझे आम से इंसाँ की तरह,
तू मिरा ख़्वाब नहीं है जो बिखर जाएगा.
ख़्वाब देखोगे
बहुत से ख़्वाब देखोगे तो आँखें,
तुम्हारा साथ देना छोड़ देंगी.
कहीं से कहीं
झूट वाले कहीं से कहीं बढ़ गए,
और मैं था कि सच बोलता रह गया.
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