Blinkit 10 Minutes Deliveries : ब्लिंकिट की 10 मिनट में सामान डिलीवरी करने वाली योजना पर लगाम लग गया है. सरकार की दखलअंदाजी के बाद इस नियम में बदलाव किया गया है.
Blinkit 10 Minutes Deliveries : क्विक कॉमर्स की रफ्तार पर अब थोड़ा सा ब्रेक लग गया है. रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया के प्रयासों और कई दौर की चर्चा के बाद डिलीवरी कंपनियों ने 10 मिनट में सामान पहुंचाने का वादा खत्म कर दिया है. डिलीवरी कंपनियों ने अब अपनी टैगलाइन ’10 मिनट में 10,000+ प्रोडक्ट डिलीवर’ से हटाकर ‘आपके घर पर 30,000+ प्रोडक्ट डिलीवर’ कर दिया है. साथ ही श्रम मंत्रालय की तरफ से दखल देने के बाद Zomato और Swiggy भी इस योजना को अपने प्रावधान से हटा सकती है. डिलीवरी ब्वॉय की जान को खतरे को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने दखल दिया.
गिग वर्कर्स की सुरक्षा को रखा ध्यान
अब कोई भी डिलीवरी कंपनी 10 मिनट में देने का वादा नहीं करेगी, क्योंकि इससे गिग वर्कर्स की सुरक्षा, सेहत और काम करने की बेहतर परिस्थितियों को सुनिश्चित करेगी. 10 मिनट डिलीवरी के वादे के कारण 2025 की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स ने देशव्यापी हड़ताल की थी, जिससे वर्कर्स के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आय की तरफ ध्यान गया था. यह पक्का है कि 10 मिनट की डिलीवरी की ब्रांडिंग अभी भी जेप्टो, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के लिए गूगल प्ले स्टोर और iOS ऐप स्टोर पर दिख रही थी, ब्लिंकिट के लिए ऐसी कोई ब्रांडिंग नहीं थी. वहीं, जोमैटो ग्रुप के CEO दीपेंद्र गोयल ने दावा किया था कि 10 मिनट डिलवरी का वादा राइडर्स पर दबाव बनाती है और इस दौरान ड्राइविंग काफी असुरक्षित हो जाती है.
कर्मचारी के साथ नहीं होगा समझौता
डिलीवर पार्टनर्स को कस्टमर को दिखाए जाने वाले टाइम के वादे नहीं दिखाएं जाते हैं. डिलीवरी ऐप में कोई 10 मिनट का टाइमर या काउंटडाउन नहीं होता है. 10 मिनट या उससे तेज डिलीवरी मुख्य रूप से इसलिए होती है क्योंकि हमारे स्टोर कस्टमर्स के ज्यादा करीब होते हैं. इसके अलावा केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने समझाया कि ग्राहकों को जल्दी सामान पहुंचने पर अच्छा लगता है, लेकिन इसके लिए कर्मचारी की जान और सुरक्षा के साथ किसी भी तरह से समझौता नहीं किया जा सकता है. आपको बताते चलें कि हाल ही में राज्य सभा सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया था. उन्होंने कहा था कि देश में लाखों गिग वर्कर्स भीषण गर्मी, बारिश और ठंड में काम करते हैं. लेकिन इसके बाद भी उन्हें टारगेट देकर जबरदस्ती किया जाता है.
राघव चड्ढा ने क्विक कॉमर्स कंपनी और ऐप बेस्ड डिलीवरी कंपनियों के लिए सख्त नियम बनाने की मांग की थी. उन्होंने गिग वर्कर्स के लिए सम्मान, सुरक्षा, उचित मजदूरी और सोशल सिक्योरिटी को लेकर भी अपनी बात रखी थी. साथ ही इस मुद्दे पर चर्चा होने के बाद सरकार को तुरंत एक्शन लेने के लिए मजबूर कर दिया था. बता दें कि कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 में पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की स्पष्ट परिभाषा दी गई. यह कानून अब 2025 में लागू किया जा चुका है.
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