Home Top News ‘सड़कों पर सेना तैनात, इंटरनेट भी बंद…’ युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव में निष्पक्षता बनी बड़ी चुनौती

‘सड़कों पर सेना तैनात, इंटरनेट भी बंद…’ युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव में निष्पक्षता बनी बड़ी चुनौती

by Sachin Kumar
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Ugandan Presidential Election

Ugandan Presidential Election: युगांडा के चुनाव आयोग के मुताबिक, गुरुवार की शाम चार बजे पोलिंग बूथ बंद कर दिए जाएंगे और नतीजे 48 घंटे के बाद घोषित कर दिए जाएंगे.

अफ्रीकी देश युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन देश में निष्पक्ष चुनाव एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. मामला यह है कि युगांडा में गुरुवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है और इसके बाद भी वहां पर इंटरनेट बंद कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि पोलिंग बूथ खुलने में काफी देरी हुई और तय समय पर सुबह करीब 7 बजे के बाद वोटिंग का सामान पहुंचाया गया. बता दें कि 81 वर्षीय राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी साल 1986 से इस पद पर विराजमान हैं और उनका मुकाबला सात उम्मीदवारों से है. साथ ही इस पूर्वी अफ्रीकी देश की आबादी 45 मिलियन है और उसमें से करीब 21.6 मिलियन रजिस्टर्ड हैं.

काफी देर पोलिंग बूथ के बाहर खड़े रहे वोटर

युगांडा के चुनाव आयोग के मुताबिक, गुरुवार की शाम चार बजे पोलिंग बूथ बंद कर दिए जाएंगे और नतीजे 48 घंटे के बाद घोषित कर दिए जाएंगे. वहीं, गुरुवार की सुबह पोलिंग स्टेशनों के बाहर बेचैन भीड़ जमा हो गई और देरी पर काफी चिंता जाहिर की गई. एक संसदीय उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट उमारू मुत्याबा ने बताया कि राजधानी कंपाला में एक स्टेशन के बाहर इंतजार करना काफी निराशाजनक था. उन्होंने आगे कहा कि हम यहां वोट देने के लिए ऐसे खड़े नहीं रह सकते हैं, क्योंकि हमारे पास काफी काम पड़ा है जिन्हें हमें करना है. इसके अलावा किरा नगर पालिका से चुनाव लड़ रहे विपक्षी नेता और सांसद सेमुज्जू नगांडा ने कहा कि उन्हें वोट देने के लिए तीन घंटे तक लाइन में खड़े होना पड़ा.

बायोमेट्रिक मशीने नहीं कर रही ठीक से काम

नगांडा ने बताया कि वोटिंग के सामान में देरी के अलावा बायोमेट्रिक वोटर आइडेंटिफिकेशन मशीनें भी ठीक से काम नहीं कर रही थीं. उन्होंने आगे कहा कि इस देरी से शहरी इलाकों में लोगों में उदासीनता और कम वोटिंग हो सकती है. उन्होंने आगे कहा कि छह दशक पहले ब्रिटिश साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के बाद राष्ट्रपति पद की सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण नहीं देखा है. मुसेवेनी ने किसी भी अफ्रीका नेता के मुकाबले तीसरा सबसे लंबा कार्यकाल पूरा किया है और वे अपने शासन को पांचवें दशक तक बढ़ाना चाहते हैं. साथ ही कई आलोचकों का कहना है कि चुनाव के जरिए उन्हें हटाना बहुत मुश्किल है, लेकिन अब इस उम्रदराज राष्ट्रपति की सत्ता अपने बेटे के नेतृत्व वाली सेना पर काफी निर्भर हो गई है.

मुसेवेनी और वाइन 2021 के पिछले चुनाव से अपनी प्रतिद्वद्विता को फिर दोहरा रहे हैं, जब वाइन ने शहरी इलाकों में ज्यादातर युवाओं से अपील की थी. 59 प्रतिशत टर्नआउट के साथ वाइन को मुसेवेनी के 58 प्रतिशत के मुकाबले 35 फीसदी वोट मिले.

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