NEET PG 2025 Cut Off: नीट पीजी 2025 की नई कट ऑफ लिस्ट के खिलाफ अलाहबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें माइनस 40 नंबर लाने पर भी काउंसलिंग की इजाजत दी गई थी.
22 January, 2026
मेडिकल एग्जाम नीट पीजी 2025 का नया कट ऑफ सुर्खियों में बना हुआ है. नीट पीजी देने वाले आरक्षित वर्ग के कैंडिडेट्स के लिए माइनस 40 नंबर के कट ऑफ वाली लिस्ट जारी की गई तो लोगों में आक्रोश फैल गया है और सोशल मीडिया पर भी इसकी आलोचना होने लगी. अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है. कोर्ट में माइनस 40 नंबर पर एडमिशन लेने वाले डॉक्टरों की प्रतिभा पर सवाल उठाते हुए जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसपर जल्द ही सुनवाई हो सकती है.
माइनस 40 लाने पर भी होगी काउंसलिंग
इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें नेशनल बोर्ड ऑफ़ एग्जामिनेशन्स इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें NEET-PG 2025 एग्जाम में 800 में से माइनस 40 मार्क्स भी लेकर आने वाले SC, ST और OBC वर्ग के स्टूडेंट्स को काउंसलिंग की इजाजत दी गई थी. याचिका अभिनव गौर नाम के व्यक्ति ने दायर की है जो एक वकील हैं. उन्होंने ने इस कदम को गैर-संवैधानिक बताया है क्योंकि यह संविधान के आर्टिकल 16 का उल्लंघन करता है, जो सरकारी नौकरी में समान मौके की गारंटी देता है. याचिका में इस फैसले को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि NEET-PG 2025 के लिए कट-ऑफ मार्क्स में भारी कमी मेरिट-बेस्ड सिलेक्शन प्रोसेस की पवित्रता को कमजोर करेगी.

सीटें खाली रहने के बाद आया नया कट ऑफ
बता दें NBEM ने यह नया कट ऑफ तब जारी किया, जब काउंसलिंग के दूसरे राउंड के बाद 18,000 से ज़्यादा सीटें खाली रह गई. बोर्ड ने क्वालिफाइंग क्राइटेरिया में भारी कमी की और शेड्यूल्ड कास्ट (SC), शेड्यूल्ड ट्राइब (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कैंडिडेट्स के लिए स्कोर -40/800 तय किया. इसके अलावा जनरल (EWS) कैटेगरी में कट-ऑफ 276 से घटाकर 103 कर दिया गया है, जबकि जनरल-PwBD कैटेगरी में इसे 255 से घटाकर 90 कर दिया गया है.
पब्लिक हेल्थ और पेशेंट सेफ्टी का सवाल
जनहित याचिका में कहा गया है कि SC/ST/OBC कैटेगरी में कट ऑफ को 235 से घटाकर माइनस 40 मार्क्स करने से पब्लिक हेल्थ और पेशेंट सेफ्टी पर बुरा असर पड़ेगा. ये सबसे बड़ा पब्लिक कंसर्न के मामला है, इस प्रोफेशन में हाई लेवल एकेडमिक प्रिसिजन की जरूरत है. आगे यह भी कहा गया है कि ऐसे डॉक्टरों की क्वालिटी, जिनके पास एग्जाम क्वालिफाई करने के लिए मिनिमम लिमिट नहीं है, संविधान के आर्टिकल 21 के तहत हेल्थ और जीवन के अधिकार पर असर डालेगी. इस याचिका पर कोर्ट जल्द ही सुनवाई कर सकता है.
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