Panama Canal Ports : पनामा के सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसके बाद अमेरिका के मन में गुदगुदी और चीन को भारी झटका मिला है. इस फैसले के बाद चीन की कंपनी को मिलने वाली रियायत को खत्म कर दिया गया है.
Panama Canal Ports : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड पर कब्जा जमाने का सपना तो है ही साथ ही उनकी एक निगाह पनामा नहर पर भी है. इसी बीच पनामा के सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसके बाद अमेरिका के मन में गुदगुदी और चीन को भारी झटका मिला है. ये वह नहर है जहां से वैश्विक व्यापार का 5 प्रतिशत गुजरता है. इसी बीच पनामा कोर्ट ने गुरुवार की देर रात में फैसला सुनाया कि हांगकांग की सीके हचिसन होल्डिंग्स की एक सब्सिडियरी कंपनी के पास बंदरगाहों को चलाने की जो रियायत थी, वह गैर-संवैधानिक करार दे दी गई है. यह फैसला अमेरिका के उस मकसद को पूरा करता हुआ दिखाई दे रहा है जिसमें वह रणनीतिक जलमार्ग पर चीन किसी भी प्रभाव रोकना शामिल है.
पनामा नहर पर क्या बोला अमेरिका?
ट्रंप प्रशासन ने पनामा नहर पर चीन के प्रभाव को कम करने के लिए इस फैसला का इंतजार कर रहा था. अमेरिकी मंत्री मार्को रुबियो का टॉप डिप्लोमैच के तौर पर पनामा का पहला दौरा था. पनामा सरकार और नहर अथॉरिटी के इस जोर देने के बावजूद कि चीन का इसके ऑपरेशंस पर कोई प्रभाव नहीं है. साथ ही रुबियो ने साफ कर दिया है कि अमेरिका बंदरगाहों के संचालन को अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानता है. दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप तो यह भी कह चुके हैं कि पनामा नहर को अमेरिका के कंट्रोल में फिर से कर देना चाहिए. कोर्ट के छोटे से बयान में यह नहीं बताया कि बंदरगाह का क्यों होगा? CK हचिंसन की सब्सिडियरी पनामा पोर्ट्स कंपनी का कहना है कि उसे अभी तक फैसले के बारे में सूचित नहीं किया गया है. हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसका कंसेशन पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय बोली का नतीजा था.
चीन ने कहा कि कंपनी के हितों की रक्षा करेंगे
कपंनी ने अपने बयान में कहा कि यह फैसला कानूनी आधार के बिना है और यह न केवल पीपीसी कॉन्ट्रैक्ट को खतरे में डालता है. साथ ही हजारों पनामानियाई परिवारों की भलाई और स्थिरता को खतरे में डालता है जो सीधे तौर पर पोर्ट की गतिविधियों पर निर्भर है. साथ ही यह देश में कानून के शासन को भी खतरे में डालते है. इसके अलावा कंपनी का यह भी कहना है कि वह पनामा या कहीं और कानूनी कार्रवाई करने के सभी अधिकार सुरक्षित रखती है, लेकिन उसने ज्यादा जानकारी नहीं दी. वहीं, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीनी कंपनी के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
