Home Top News त्रिपुरा, असम और मेघालय में 100% बाड़बंदी, तो बंगाल में देरी क्यों? घुसपैठ की सामने आई ये वजह

त्रिपुरा, असम और मेघालय में 100% बाड़बंदी, तो बंगाल में देरी क्यों? घुसपैठ की सामने आई ये वजह

by Sanjay Kumar Srivastava
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त्रिपुरा, असम और मेघालय में 100% बाड़बंदी, तो बंगाल में देरी क्यों? घुसपैठ की सामने आई ये वजह

Border Security: पश्चिम बंगाल में बाड़बंदी न होने से सूबे में घुसना आसान है. इसी का फायदा घुसपैठिए उठा रहे हैं. त्रिपुरा, असम और मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 100 प्रतिशत बाड़बंदी हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह अभी तक पूरी नहीं हुई है.

Border Security: पश्चिम बंगाल में बाड़बंदी न होने से सूबे में घुसना आसान है. इसी का फायदा घुसपैठिए उठा रहे हैं. त्रिपुरा, असम और मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 100 प्रतिशत बाड़बंदी हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह अभी तक पूरी नहीं हुई है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए पूरे पश्चिम बंगाल में रह रहे हैं. इन घुसपैठियों की वजह से स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं. हालात यह हो गए हैं कि कुछ स्थानों पर हिंदू अपना त्यौहार भी नहीं मना पा रहे हैं. यह दावा पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को किया. उन्होंने दावा किया कि राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम पूरा नहीं हुआ है क्योंकि ममता बनर्जी सरकार ने इस उद्देश्य के लिए भूमि सौंपने में सहयोग नहीं किया है. बांग्लादेश से घुसपैठ के कारण पश्चिम बंगाल में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहा है और कुछ स्थानों पर हिंदू त्योहार भी प्रभावित हो रहे हैं. विपक्ष के नेता अधिकारी ने कहा कि राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के बाद केवल भाजपा सरकार ही यह सुनिश्चित कर सकती है कि सूबे में घुसपैठ रुके.

जमीन उपलब्ध कराना राज्य सरकार का काम

अधिकारी ने कहा कि त्रिपुरा, असम और मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर 100 प्रतिशत बाड़बंदी हो चुकी है, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह अभी तक अधूरा है. नंदीग्राम से भाजपा विधायक ने कहा कि जब भी सीमा सुरक्षा का मुद्दा उठता है तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगी बीएसएफ पर हमला करते हैं. उन्होंने कहा कि जब भी अवैध बांग्लादेशी व रोहिंग्या प्रवासियों से संबंधित मामले सामने आते हैं और फर्जी आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड जब्त किए जाते हैं, तो टीएमसी नेतृत्व सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्र और भाजपा को दोषी ठहराता है. अधिकारी ने कहा कि लोगों को पता है कि सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार को जमीन उपलब्ध करानी होगी. भाजपा नेता ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के अनुसार भूमि अधिग्रहण करना राज्य सरकार का काम है. अधिकारी ने बताया कि पिछले सप्ताह कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह 31 मार्च तक उन जमीनों को बीएसएफ को सौंप दे, जिनका अधिग्रहण पहले ही केंद्र सरकार से राज्य के नौ जिलों में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए किया जा चुका है.

खुली सीमा से घुसपैठ का खतरा

उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा बार-बार याद दिलाने और राज्य अधिकारियों के साथ बैठकों के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए जमीन नहीं सौंपी है.अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में उत्तर 24 परगना जिले के बैरकपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा था कि बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल में अवैध अप्रवासन न केवल इस सीमावर्ती राज्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पूरे देश के लिए सुरक्षा खतरा पैदा कर रहा है. अधिकारी ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा सरकार 45 दिनों के भीतर सीमा बाड़बंदी का काम पूरा करवाएगी. बांग्लादेश की सीमा से लगे पश्चिम बंगाल के ये नौ जिले उत्तर 24 परगना, नादिया, मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और कूच बिहार हैं. भारत-बांग्लादेश सीमा की कुल लंबाई 4096.70 किलोमीटर है. पश्चिम बंगाल इसकी सबसे लंबी 2216.70 किलोमीटर की सीमा साझा करता है. राज्य में मादक पदार्थों, घुसपैठ और अन्य अवैध गतिविधियों से संबंधित अपराधों में गंभीर वृद्धि हुई है.

ये भी पढ़ेंः भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर हंगामा, वॉकआउट, नड्डा ने विपक्षी व्यवहार को बताया ‘लोकतंत्र के लिए घातक’

News Source: Press Trust of India (PTI)

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