Chocolate Town Of India: भारत में तो क्या, दुनिया में भी बहुत कम लोग होंगे, जो चॉकलेट खाना पसंद नहीं करते. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी जगह है, जिसे चॉकलेट टाउन कहा जाता है.
4 February, 2026
जब भी हम किसी हिल स्टेशन के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में बर्फीले पहाड़, देवदार के पेड़ और ठंडी हवाएं आती हैं. लेकिन भारत में एक ऐसी जगह भी है जिसकी पहचान सिर्फ उसकी खूबसूरती से नहीं, बल्कि वहां की हवाओं में घुली कोको और क्रीम की खुशबू से भी होती है. दरअसल, तमिलनाडु की नीलगिरी पहाड़ियों में बसा ‘ऊटी’ करोड़ों लोगों का फेवरेट ट्रेवल डेस्टिनेशन है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे भारत का ‘चॉकलेट टाउन’ भी कहा जाता है?

होममेड चॉकलेट्स
महंगे और विदेशी चॉकलेट ब्रांड्स के दौर में भी, ऊटी की होममेड चॉकलेट्स का जादू अब भी बरकरार है. यहां की लगभग हर दुकान में आपको एक अलग स्वाद मिलता है, जिसे टूरिस्ट्स अपने साथ यादों के तौर पर डिब्बों में पैक कराकर घर ले जाते हैं. ऊटी और चॉकलेट का रिश्ता बहुत ही पुराना है. इसकी शुरुआत किसी बड़े एड से नहीं, बल्कि छोटे लेवल पर घरों से हुई. यहां का कोल्ड क्लाइमेट चॉकलेट बनाने के लिए बिल्कुल फिट है, क्योंकि यहां चॉकलेट को जमने के लिए बहुत ज्यादा फ्रिज या मशीनों की जरूरत नहीं पड़ती. धीरे-धीरे यहां रहने वाले परिवारों ने अपने खास नुस्खों से हाथ से बनी चॉकलेट बनाना शुरू किया.

जुबां पर चढ़ा स्वाद
जैसे-जैसे ऊटी में टूरिज्म बढ़ा, यहां की चॉकलेट्स की डिमांड भी बढ़ती गई. फैक्ट्रियों में बनने वाली आम चॉकलेट के मुकाबले ऊटी की चॉकलेट्स अपनी प्योरिटी और वैरायटी के लिए जानी जाने लगी. चाहे वो नट्स से भरे बार्स हों या फिर फ्रूट और डार्क चॉकलेट का कॉम्बिनेशन, यहां हर किसी के टेस्ट के हिसाब से कुछ न कुछ खास है. आलम ये है कि कोई भी टूरिस्ट ऊटी से बिना चॉकलेट खरीदे वापस नहीं लौटता.
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मौसम ने बनाया खास
ऊटी का मौसम सालभर सुहावना रहता है और यही इस स्वीट बिजनेस की रीढ़ है. बहुत ज्यादा गर्मी न होने की वजह से चॉकलेट का टेक्सचर और स्वाद नेचुरल बना रहता है. साथ ही, नीलगिरी की पहाड़ियों में डेयरी फार्मिंग भी खूब होती है, जिससे फ्रेश दूध और क्रीम आसानी से मिल जाती है. यही फ्रेशनेस ऊटी की चॉकलेट को सबका फेवरेट बना रही है.

स्वाद का समंदर
ऊटी की सड़कों पर चलते हुए आपको कदम-कदम पर छोटी-छोटी और खूबसूरत चॉकलेट की दुकानें मिल जाएंगी. इनमें से कुछ खास इलाके भी हैं, जैसे चेरिंग क्रॉस, ये ऊटी का सबसे बिजी इलाका है जहां आपको कई मशहूर और पुरानी दुकानें मिलेंगी. इसके अलावा आप कमर्शियल रोड भी जा सकते हैं. यानी अगर आप वैरायटी और चॉकलेट के अलग-अलग फ्लेवर देखना चाहते हैं, तो ये सड़क आपके लिए जन्नत से कम नहीं है. साथ ही अगर आप बजट में अच्छी और होममेड चॉकलेट तलाश रहे हैं, तो मेन मार्केट जाएं. कई जगहों पर तो आप अपनी आंखों के सामने चॉकलेट बनते हुए भी देख सकते हैं.

चॉकलेट और सुकून
ऊटी का अट्रैक्शन सिर्फ चॉकलेट तक ही नहीं है. ये उन लोगों के लिए बेहतरीन जगह है जो भागदौड़ भरी लाइफ से ब्रेक लेकर सुकून के पल बिताना चाहते हैं. नीलगिरी की हसीन वादियों में टॉय-ट्रेन का सफर किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है. इसके अलावा यहां के बोटैनिकल गार्डन, नीलगिरी के जंगल और झील के किनारे टहलना आपकी जर्नी को यादगार बना देता है.

जाने का सही टाइम
ऊटी जाने के लिए अक्टूबर से जून तक का टाइम सबसे बेस्ट माना जाता है. गर्मियों की तपन से बचने के लिए यहां हर साल लाखों लोग आते हैं. वहीं, सर्दियों में यहां की धुंध और ठंड एक अलग ही थ्रिल पैदा करती है. अगर आप यहां जाना चाहते हैं तो, सबसे नजदीकी एयरपोर्ट कोयंबटूर है, जहां से आप टैक्सी या बस ले सकते हैं. अगर आप ट्रेन से जा रहे हैं तो, मेट्टुपालयम से नीलगिरी माउंटेन रेलवे (टॉय ट्रेन) का सफर सबसे बेहतरीन रहेगा. वहीं, अगर आप रोड ट्रिप का मज़ा लेना चाहते हैं तो, कोयंबटूर, मैसूर और बेंगलुरु से ऊटी के लिए अच्छी रोड कनेक्टिविटी हैं. अगर आप भी चॉकलेट की दुनिया में खोना चाहते हैं और सुकून के पल बिताना चाहते हैं तो, आप आप भी ऊटी की सैर जरूर करें. भारत का ये छोटा और खूबसूरत शहर आपके ट्रेवल एक्सपीरियंस को और खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा.
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