Home Religious जब माता पार्वती के अपमान से क्रोधित हो गए थे महादेव, ऐसे लिया था अर्धनारीश्वर रूप, पढ़ें पूरी कथा

जब माता पार्वती के अपमान से क्रोधित हो गए थे महादेव, ऐसे लिया था अर्धनारीश्वर रूप, पढ़ें पूरी कथा

by Neha Singh
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Mahadev Ardhnarishwar Roop

Mahadev Ardhnarishwar Roop: आज हम आपको महादेव और माता पार्वती के प्रेम को दर्शाने वाली कथा सुनाएंगे, जिसमें महादेव ने संदेश दिया कि शिव और शक्ति एक हैं.

9 February, 2029

महाशिवरात्रि का त्योहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि व्रत रखा जाएगा. शिव भक्तों को महाशिवरात्रि का बेसब्री से इंतजार रहता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने और व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में शुखियां आती हैं. आज हम आपको महादेव और माता पार्वती के प्रेम को दर्शाने वाली एक कथा सुनाएंगे.

अर्धनारीश्वर रूप की कथा

महादेव के सभी रूपों में से एक है अर्धनारीश्वर रूप. इस रूप में महादेव के आधे शरीर में माता पार्वती का आधा शरीर जुड़ा होता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा है. सप्तऋषियों में एक भृगु ऋषि महादेव के भक्त थे, लेकिन वे माता पार्वती को देवी नहीं मानते थे. इसलिए वे केवल महादेव की पूजा ही करते थे. एक बार वे रोजाना की तरह उनकी पूजा कर रहे थे. उस समय माता पार्वती भी उनके पास बैठी थीं. ऋषि भृगु महादेव की परिक्रमा के लिए दोनों के बीच से निकल रहे थे, क्योंकि वे माता पार्वती की परिक्रमा नहीं करना चाहते थे.

यह देखकर भगवान शिव क्रोधित हो गए. शिव जी ने माता को अपने नजदीक आने को कहा, ताकि ऋषि के निकलने के लिए जगह न बचे. जगह न होने के कारण ऋषि भृगु ने चूहे का रूप लिया और थोड़ी सी जगह से निकलकर परिक्रमा की. अब भगवान शिव ने माता को अपने और पास बैठा लिया. यह देखकर ऋषि ने एक मधुमक्खी का रूप लिया और उनके बीच से निकलकर परिक्रमा पूरी की.

‘शिव और शक्ति एक हैं’

यह देखकर भगवान शिव और क्रोधित हो गए. महादेव ने माता पार्वती को खुद का आधा हिस्सा बना लिया, जिससे उनका शरीर आधा पार्वती का बन गया और आधा शिव का. इस तरह भगवान ने अर्धानारीश्वर का रूप लिया. ऋषि भृगु ने जब यह रूप देखा तो उन्हें गलती का आभास हुआ. इसके बाद ऋषि ने उन दोनों की परिक्रमा की. ऋषि को आभास हुआ कि शिव और शक्ति एक ही हैं. महादेव ने इस रूप से यह संदेश दिया कि सृष्टि के लिए पुरुष और स्त्री दोनों का संतुलन आवश्यक है.

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