Vaishakh Shivratri: वैशाख माह की शिवरात्रि का भी खास महत्व है. इस दिन विधि-विधान के अनुसार पूजा करने और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं. यहां जानें वैशाख शिवरात्रि की तिथि और उपाय .
11 April, 2026
महादेव के भक्तों को हर साल महाशिवरात्रि का इंतजार रहता है, लेकिन बहुत कम लोगों को मासिक शिवरात्रि की जानकारी होती है. इसी तरह वैशाख माह की शिवरात्रि का भी खास महत्व है. इस दिन विधि-विधान के अनुसार पूजा करने और व्रत रखने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मनोकामना पूरी होती है. इसके अलावा आप शिवरात्रि पर कुछ खास उपाय भी कर सकते हैं. चलिए जानते हैं वैशाख शिवरात्रि कब है और इस दिन आप कौन से उपाय कर सकते हैं.

कब है वैशाख माह की शिवरात्रि
हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. वैशाख महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 अप्रैल 2026 को रात में 10:31 बजे शुरू होगी और 16 अप्रैल को शाम 8:11 बजे खत्म होगी. क्योंकि शिवरात्रि की पूजा मध्यरात्रि यानी निशिता काल में की जाती है, इसलिए शिवरात्रि का व्रत 15 अप्रैल को रखा जाएगा. वहीं निशिता काल में पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रात 11:59 बजे से देर रात 12:40 मिनट तक रहेगा.
सही पूजा विधि
शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगाजल से स्नान करके साफ कपड़े पहनें. इसके बाद मंदिर को भी गंगाजल से साफ करें. अब शिव परिवार की पूजा करें. इसके बाद शिवलिंग को पंचामृत स्नान कराएं. इसके बाद साफ जल से शिवलिंग का अभिषेक करें. महादेव को 11 बेलपत्र, शमी का फूल, धतूरा चढ़ाएं. अब फल और मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद घी का दीपक जलाएं. अंत में शिव चालीसा पढें और आरती करें.

शिवलिंग से जुड़े उपाय
- तांबे के लोटे में जल लें, उसमें काले तिल डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं. इसके बाद ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से ग्रहों के बुरे असर दूर होंगे.
- आटे से 11 शिवलिंग बनाएं और उनका जलाभिषेक करें. इसके साथ ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. माना जाता है कि ऐसा करने से संतान प्राप्ति के योग बनते हैं.
- अगर किसी की शादी नहीं हो पा रही है, तो वह दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करें और देवी पार्वती की पूजा करें.
- इस दिन घर में पारद शिवलिंग स्थापित करना बहुत शुभ माना जाता है. पारद शिवलिंग की पूजा करने से घर में आय की वृद्धि होती है.
- मासिक शिवरात्रि की शाम को भगवान शिव का जलाभिषेक करें और ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. इसके बाद 11 घी के दीपक जलाएं.
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