- अमरेंद्र गौरव की रिपोर्ट
Introduction
Meta Company Controversy : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सप और फेसबुक चलाने वाली कंपनी मेटा से कहा कि अगर वह देश का कानून का सम्मान नहीं कर सकते तो उन्हें भारत में काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती. शीर्ष अदालत ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि वह भारतीय लोगों के पर्सनल डेटा के एक हिस्से का गलत इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दे सकते है. कोर्ट की तरफ से यह सख्त लहजे में टिप्पणी उस वक्त सामने आई है जब व्हाट्सप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी पर लगाए गए जुर्माने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जांच शुरू हो गई थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कंपनी से कहा कि आप मार्केट में मोनोपॉली बना रहे हैं और कंज्यूमर के पास कोई चॉइस नहीं बची है. वहीं, सवाल खड़ा होता है कि क्या मेटा कंपनी की भारत से विदाई होने वाली है? अगर ऐसा होता है तो यह आपके जिंदगी को कितना प्रभावित कर सकता है और उस वजह से कितनी असहजता सामने आ सकती है.
Table of Content
- क्रिएशन के साथ असुरक्षा का भी खतरा
- 15 करोड़ ईमेल का डेटा लीक
- क्या होता है डेटा सेंटर?
- सुविधा के साथ सुरक्षा को भी खतरा
- किसकी है जिम्मेदारी
- सबसे ज्यादा जीमेल का डाटा लीक
- कंपनियां नहीं कर सकती उल्लंघन : SC
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा
क्रिएशन के साथ असुरक्षा का भी खतरा
मामला यह है कि भारत में उभरते डिजिटल वर्ल्ड की कहानी है, जो बताता है कि कैसे भारत दुनिया का सबसे बडा़ डिजिटल लेबोरेटरी बनता जा रहा है. हमारे शहरों में विशाल AI डेटा सेंटर बनाने की तैयारी चल रही है. दूसरा प्वाइंट है कि युवाओं को ट्रेनिंग देने के लिए AVGC जैसे लैब्स बनाने की बात चल रही है और इसका एलान बजट 2026 में की गई है. इंटरनेट और AI की मदद से युवाओं को कॉन्टेंट क्रिएशन और गेमिंग के स्किल सिखाएगा. ये तो इंटरनेट वर्ल्ड के एक तरफ की कहानी है और ये चमक-दमक से भरी हुई है. लेकिन दूसरी तरफ पहचान, पासवर्ड, PIN और OTP में सिमट जाती है. इसका खतरा यह है कि आपको इंटरनेट पर किसी एप को इस्तेमाल करने के लिए आपको पासवर्ड और PIN बनाने ही पडेंगे. नतीजा यह है कि आपको सुरक्षित करने वाला हर डिजिटल Key उसी इंटरनेट पर घूम रहा है और आपके के लिए असुरक्षा का खतरा भी बढ़ा रहा है.

15 करोड़ ईमेल का डेटा लीक
वहीं, व्हाट्सएप्प पर अपने ही सहयोगी कंपनी को अपना डेटा शेयर करने का आरोप लगा रहे हैं. इसके अलावा आपको अपने डेटा पर मंडराता खतरा साफ-साफ नजर आएगा. जो इन कंपनियों के हाथ से भी बाहर मामला हो गया है. दुनिया भर के 15 करोड़ ईमेल के डेटा लीक होने की खबर ने दुनिया में हड़कंप मचा दिया. उसके बाद खुद गूगल ने अपने प्रोडक्ट एंड्राइड को असुरक्षित बता दिया, जिसमें 100 करोड़ यूजर्स के मोबाइल फोन पर मैलवेयर के खतरे बात है.

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क्या होता है डेटा सेंटर?
डेटा सेंटर का AI इंडस्ट्री का सबसे अहम कंपोनेंट है. साथ ही आने वाले समय में दुनियाभर में सबसे ज्यादा निवेश इसी AI डेटा सेंटर पर होने वाला है. डेटा सेंटर वहां पर बनाया जाता है जहां पर सुपर कंप्यूटर या सर्वर होते हैं. इन सर्वर में मोबाइल ऐप्स का डेटा, ईमेल के फोटो, वीडियो और सरकारी रिकॉर्ड सब सेव होते हैं. आप इसको इस तरह भी समझ सकते हैं कि आपका लैपटॉप एक अलमारी है और डेटा सेंटर दर्जनों एकड़ में फैला गोदाम है, जहां पर लाखों अलमारिया रखी होती हैं. डेटा सेंटर में हजारों पावरफुल सर्वर के साथ-साथ तेज इंटरनेट कनेक्शन, बिजली का बैकअप, जेनरेटर और UPS सिस्टम होते हैं. ताकि किसी भी स्तर पर बिजली न कट जाए. इसके अलावा AC और वॉटर कूलिंग सिस्टम होता है.
सुविधा के साथ सुरक्षा को भी खतरा
जमाना जितना डिजिटल होता जा रहा है वह हमारी जिंदगी को उतनी ही आसान बना रहा है. लेकिन यही चीज हमें सबसे ज्यादा असुरक्षित भी बना रही है. लाखों-करोड़ों लोगों को सुविधा के साथ कीमत भी चुकानी पड़ रही है. बताया जा रहा है कि बीते दिनों पहले करीब 14 करोड़ ईमेल और लॉगिन डिटेल लीक होने की खबर से दुनिया में हड़कंप मच गया. इस दौरान न ही कोई सर्वर और न ही कंपनी हैक हुई थी बल्कि लोगों के अपने मोबाइल और कंप्यूटर ही मैलवेयर के जरिये चुपचाप डेटा लीक कर रहे थे. मतलब यह है कि खतरा बाहर से नहीं था बल्कि हमारी जेब में था.

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किसकी है जिम्मेदारी
- करीब 15 करोड़ ईमेल के लॉगिन-पासवर्ड इंटरनेट पर खुले में घूम रहे हैं.
- फॉर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक डेटा किसी एक कंपनी के सर्वर को तोड़कर नहीं चुराया गया. अलग-अलग वेबसाइट और ऐप्स से ली गई हैं.
- सालों से अलग-अलग वेबसाइट्ट और ऐप में इस्तेमाल किए गए डेटा को चोरी करके एक नया डेटाबेस तैयार किया गया.
- खास बात यह है कि इसमें बैंक अकाउंट, क्रिप्टो वॉलेट्स, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और क्रेडिट कार्ड से जुड़े लॉगिन डिटेल्स होने का भी दावा है.
- इससे वित्तीय धोखाधड़ी और पहचान की चोरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
- मामला यही तक नहीं ठहर बल्कि सरकारी यानी .gov डोमेन से जुड़े लॉगिन डिटेल्स भी शामिल हैं, जिससे गंभीर नुकसान का खतरा बढ़ गया है.
- डेटाबेस में दुनिया के अलग-अलग देशों के यूजर्स और ऑनलाइन सर्विस शामिल है.
सबसे ज्यादा जीमेल का डाटा लीक
साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के मुताबिक ये सभी यूनिक कॉनफिडेंशियल्स यानी लॉगिन रिकॉर्ड्स का डेटा एक असुरक्षित डेटाबेस में रखा था. 4.8 करोड़ रिकॉर्ड्स के साथ सबसे ज्यादा Gmail का डेटा है. इसके अलावा फेसबुक, इंस्टाग्राम, नेटफ्लिक्स, याहू, आउटलुक और iCloud जैसी कई बड़ी कंपनियों के लॉगिन्स भी शामिल हैं. लेकिन ये किसी बडे प्लेटफॉर्म के सर्वर हैक होने का सीधा मामला नहीं है, बल्कि ये मैलवेयर-आधारित डेटा चोरी का मामला है. मैलवेयर जैसे खुफिया सॉफ्टवेयर दो तरह के होते हैं जिसमें मुख्य रूप से मैलवेयर और स्पाईवेयर शामिल है. मैलवेयर में कंप्यूटर, सर्वर को नुकसान पहुंचाने, डेटा चुराने के लिए बनाया जाता है. इसके जरिए सिस्टम को धीमा करना, फाइलें डिलीट की जा सकती हैं. साथ ही डिवाइस पर कंट्रोल करने की भी कोशिश होती है.

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कंपनियां नहीं कर सकती उल्लंघन : SC
आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सएप और मेटा की नई प्राइवेसी पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए इसी महीने 3 तारीख को बेहद कड़े सवाल उठाए और कंपनी को डेटा साझा करने से साफ मना कर दिया. चीफ जस्टिस ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि निजता के अधिकार इस देश में बहुत महत्वपूर्ण हैं और कंपनियां इसका उल्लंघन नहीं कर सकतीं. चीफ जस्टिस ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि आप डेटा शेयरिंग के बहाने इस देश की प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकते. आपकी प्राइवेसी की शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई हैं कि एक आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं सकता. ये निजी जानकारी चोरी करने का एक सभ्य तरीका है और इसको बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि उपभोक्ताओं को इस ऐप की लत लगा दी गई है और अब उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जा रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्या कहा
- सीजेआई ने कहा कि लोगों के डेटा का इस्तेमाल कॉमर्शियल फायदे के लिए किया जा रहा है.. अब तक लाखों यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल हो चुका है.
- अगर आपको डेटा का कोई हिस्सा बेचने लायक लगेगा, तो आप उसे बेच देंगे! सिर्फ इसलिए कि भारतीय उपभोक्ता मूक हैं और उनके पास आवाज नहीं है और आप उन्हें शिकार नहीं बना सकते.
- सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी पॉलिसी पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा कि डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों के निजता अधिकार से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
- इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त शब्दों में कहा कि अगर हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते तो भारत छोड़कर जाइए.
Conclusion
मेटा का ये केस 2021 का है. जब WhatsApp ने अपनी प्राइवेसी पॉलिसी बदली थी, जिसमें उसने यूजर डेटा को Meta यानी फेसबुक के साथ साझा करने की बात कही. भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने उस पॉलिसी को गलत मानते हुए 213 करोड़ का जुर्माना ठोक दिया था. Meta और WhatsApp ने CCI के फैसले के खिलाफ अपील की और फिर मामला राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) और फिर Supreme Court तक पहुंच गया. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 फरवरी को कड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने प्राइवेसी पॉलिसी को यूजर की मंजूरी लेने के तरीके को चालाकी बताया.
लेकिन सवाल है कि ये सब खतरे क्यों आते हैं? मामला यह है कि डिजिटल दुनिया में हम ही प्रोडक्ट बन जाते हैं और बिना पढ़े हर ‘Allow’ बटन पर क्लिक कर देते हैं. खास बात यह है कि आम यूजर्स आलस्य में एक ही पासवर्ड हर जगह सेट कर देते हैं. अपना ही जोखिम बढ़ाते हुए सुविधा को सुरक्षा से ऊपर रखने का काम करते हैं. तकनीक गलत नहीं है. AI भी गलत नहीं है. लेकिन इस डिजिटल भारत का सपना तभी पूरा होगा. जब देश का हर नागरिक जागरूक बनेगा. साथ ही जरुरत इस बात की नहीं कि हम डिजिटल दुनिया से डरें बल्कि हम समझदारी से इसका इस्तेमाल करें. डिजिटल दुनिया से भागना समाधान नहीं, लेकिन आंखें बंद करके भरोसा भी नहीं करना है. वहीं, बजट 2026 में की गई घोषणा का फायदा गूगल के इस प्रोजेक्ट को भी मिलेगा. इसके मुताबिक विदेशी कंपनियां अगर भारत में डेटा सेंटर बनाकर दुनिया भर को क्लाउड सर्विस देंगी तो उन्हें 2047 तक टैक्स में छूट मिलेगी.
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