Share Market: शेयर बाज़ार में उठापटक कम होने का नाम नहीं ले रही है. शुक्रवार की सुबह भी इन्वेस्टर्स के चेहरे खिलने की बजाय मुरझाए हुए ही रहे. आप भी जानें गिरावट की वजह.
13 February, 2026
आज सुबह जब दलाल स्ट्रीट पर ट्रेडिंग की घंटी बजी, तो शेयर मार्केट के लिए अच्छी खबर नहीं आई. ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर छाई चिंताओं ने इंडियन शेयर बाजार का मूड भी बिगाड़ दिया. देखते ही देखते सेंसेक्स और निफ्टी 1 प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क गए, जिससे इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो में लाल निशान की बाढ़ आ गई. शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 883.4 अंक यानी 1.05 प्रतिशत टूटकर 82,791.52 पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी पीछे नहीं रहा और 262.60 अंक यानी 1.02 प्रतिशत गिरकर 25,544.60 पर ट्रेड करने लगा.
इस सेक्टर ने बढ़ाई मुसीबत
शेयर बाज़ार में आई इस गिरावट ने इन्वेस्टर्स में थोड़ी घबराहट पैदा कर दी है, खासकर उन लोगों के लिए जो पिछले कुछ दिनों की तेजी से एक्साइटेड थे. वहीं, बाजार को नीचे खींचने में सबसे बड़ा हाथ टेक्नोलॉजी और आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियों का रहा. इंफोसिस, टीसीएस (TCS), एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे बड़े नाम आज बिकवाली के दबाव में दिखे. दरअसल, अमेरिका में एआई की वजह से बिजनेस मॉडल में होने वाले बदलावों के डर से टेक शेयर्स में भारी बिकवाली हुई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा. एक्सपर्ट्स इसे ‘एंथ्रोपिक शॉक’ कह रहे हैं, जिसका असली असर अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है.
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रेड ज़ोन में शेयर्स
सिर्फ आईटी ही नहीं, बल्कि हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, लार्सन एंड टुब्रो और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे हैवीवेट शेयर भी रेड जोन में कारोबार करते नजर आए. हालांकि, इस गिरावट के दौर में भी बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और भारती एयरटेल जैसे कुछ शेयर मजबूती के साथ टिके रहे और हरे निशान में ट्रेड कर रहे थे. बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी भारी गिरावट देखी गई. बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स 1.93 प्रतिशत और मिडकैप इंडेक्स 1.40 प्रतिशत तक नीचे गिर गए. इसका मतलब ये है कि बाजार के हर कोने में बिकवाली का माहौल बना हुआ है.
एक्सपर्ट्स की राय
शेयर मार्केट के एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्वेस्टर्स फिलहाल थोड़े डरे हुए हैं, लेकिन ये गिरावट खरीदारी का मौका भी दे सकती है. जियोजित इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के वीके विजयकुमार के मुताबिक, एआई शेयर्स में ये सुधार भारत के लिए पॉजिटिव हो सकता है, क्योंकि भारत पिछले साल की एआई रैली में पिछड़ गया था. अब जब वहां से पैसा निकल रहा है, तो वो भारतीय बाजार के लिए नए रास्ते खोल सकता है. फिलहाल नजरें ग्लोबल मार्केट और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी हैं. एशियाई बाजारों में हांगकांग और जापान के बाजार भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं.
News Source: PTI
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