Holika Dahan Muhurat: 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन करने के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी होना बहुत जरूरी है.
23 February, 2026
फाल्गुन का महीना सनातन धर्म में बेहद खास माना जाता है. फाल्गुन का महीना शुरू होते ही त्योहार भी शुरू हो जाते हैं, जिसमें सबसे खास है होली का त्योहार. सभी को होली का इंतजार रहता है. होली असल में बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. इस साल होली 4 मार्च को मनाई जाएगी. इससे पहले 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा. होलिका दहन करने के लिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि की जानकारी होना बहुत जरूरी है. आइए जानते हैं होलिका दहन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और भद्रा का समय.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय
होलिका दहन हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को किया जाता है. इसके अनुसार होलिका दहन की तिथि 2 मार्च को ही शुरू हो जाएगी, लेकिन शुरू होते ही भद्रा लग जाएगा. भद्रा लग जाने के बाद कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है. भद्रा 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से लेकर सुबह 5:32 बजे तक रहेगा. इसलिए 2 मार्च को होलिका दहन नहीं किया जाएगा.
- पूर्णिमा तिथि शुरू: 2 मार्च, 2026, शाम 5:55 बजे से
- पूर्णिमा तिथि खत्म: 3 मार्च, 2026, शाम 5:07 बजे तक
- भद्रा काल: 2 मार्च को शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को सुबह 5:28 बजे तक
- होलिका दहन मुहूर्त: शाम 6:22 बजे से रात 8:50 बजे तक (समय 2 घंटे 28 मिनट)

होलिका दहन पूजा विधि
होलिका दहन के दिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की पूजा की जाती है. इस दिन आप सुबह उठकर नहाएं, साफ कपड़े पहनें और दहन वाली जगह को गंगाजल से शुद्ध करें. रोली, चावल, गुलाल, फूलों की माला, कच्चा धागा (कलावा), हल्दी, गेहूं की बालियां, जौ, चना और गाय के गोबर के उपले इकट्ठा करें. शाम को कच्चा धागा बांधते हुए होलिका की तीन या सात बार परिक्रमा करें. चावल, फूल और गुलाल (सफेद पाउडर) चढ़ाएं और आखिर में नई फसल चढ़ाएं. अग्नि के पास बैठकर भगवान नरसिंह से प्रार्थना करें. ध्यान रहे कि शुभ मुहूर्त में ही अग्नि प्रज्वलित करें. बता दें, अगले दिन सुबह होलिका की ठंडी राख को घर में छिड़कना शुभ माना जाता है.
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