Lucknow Digital Arrest: लखनऊ पुलिस ने तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर एक परिवार से 90 लाख रुपए ले लिया है.
7 March, 2026
- लखनऊ से भरत सेठी की रिपोर्ट
लखनऊ में साइबर क्राइम थाना पुलिस ने फर्जी एटीएस अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट के जरिए करीब 90 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस ने इस मामले में तीन शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जबकि इससे पहले इसी मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. आरोपियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर एक परिवार को आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी और डराकर उनसे लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे.
फर्जी अधिकारियों ने दिया फर्जी आदेश
दरअसल पीड़ित की पत्नी वीना बाजपेयी के मोबाइल पर एक कॉल आया था, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार बताया. उसने आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की बात कहकर परिवार को डराया और गिरफ्तारी की धमकी दी. इसके बाद पीड़ित को सिग्नल ऐप डाउनलोड कराकर दूसरे व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को एटीएस अधिकारी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और जांच का हवाला दिया. डर और मानसिक दबाव में पीड़ित परिवार से 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच अलग-अलग बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से करीब 90 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए.
क्रिप्टोकरेंसी में बदलते थे पैसे
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम निकालते थे और बाद में उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे, ताकि पैसों का ट्रैक करना मुश्किल हो जाए. डीसीपी क्राइम कमलेश दीक्षित ने बताया कि इस मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों धीरज, स्पर्श कपूर और आशीष चन्द्रा को गिरफ्तार किया है. जबकि इससे पहले इसी गिरोह के पांच अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.
बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामले
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह है जो फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी करता था. पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है. डिजिटल जमाने में डिजिटल चोरी के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं. इससे पहले भी साइबर ठगों ने कई लोगों को अपना शिकार बनाकर कोरड़ों रुपए ऐठें है. आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि बैंक कर्मचारी कभी भी आपसे फोन करके ओटीपी नहीं मागते हैं. वहीं फोन पर खुद को सरकारी कर्मचारी बताने वाले से डरकर आपको कोई भी जानकारी उसे नहीं देनी है और पुलिस को तुरंत सुचित करना है.
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