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मालेगांव ब्लास्ट केस में 20 साल बाद आया बड़ा फैसला: सभी 4 आरोपी बरी, NIA नहीं दे सकी सबूत

by Sanjay Kumar Srivastava
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मालेगांव ब्लास्ट केस में 20 साल बाद आया बड़ा फैसला: सभी 4 आरोपी बरी

Malegaon Blast Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मालेगांव सीरियल बम ब्लास्ट मामले में सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया. धमाके में 37 लोग मारे गए थे.

Malegaon Blast Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मालेगांव सीरियल बम ब्लास्ट मामले में सभी 4 आरोपियों को बरी कर दिया. धमाके में 37 लोग मारे गए थे. NIA की जांच में शामिल इन आरोपियों के खिलाफ सबूतों के अभाव के कारण यह राहत मिली है. शुरुआत में महाराष्ट्र ATS ने इस मामले में 9 मुस्लिम युवकों को पकड़ा था, लेकिन बाद में वे निर्दोष पाए गए. 8 सितंबर 2006 को दोपहर की नमाज़ के बाद मालेगांव की हमीदिया मस्जिद और बड़े कब्रिस्तान के पास सिलसिलेवार धमाके हुए, जिसमें लगभग 37 लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए.

विशेष अदालत का आदेश भी रद्द

शुरुआती जांच में महाराष्ट्र एटीएस ने मामले में 9 मुस्लिम व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था. बाद में मामला सीबीआई (CBI) और फिर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया. एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि ये धमाके दक्षिणपंथी कट्टरपंथी समूहों की साजिश हो सकते हैं, जिसके बाद 2016 में एक मकोका (MCOCA) अदालत ने शुरू में गिरफ्तार किए गए 9 मुस्लिम स्थानीय लोगों को आरोप मुक्त कर दिया. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को इस मामले के सभी चार मुख्य आरोपियों (लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया) को बरी कर दिया, क्योंकि एनआईए उनके खिलाफ कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ आरोप तय करने के विशेष अदालत के आदेश को भी रद्द कर दिया.

37 लोगों की गई थी जान

मुख्य न्यायाधीश चन्द्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की पीठ ने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ चार आरोपियों राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया. चारों पर हत्या और आपराधिक साजिश के लिए भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ कड़े गैरकानूनी (गतिविधियां) रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत आरोप लगाए गए थे. 8 सितंबर 2006 को नासिक जिले के मालेगांव शहर में चार बम विस्फोट हुए. तीन शुक्रवार की नमाज के ठीक बाद हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के परिसर में और चौथा मुशावरत चौक में विस्फोट हुआ, जिसमें 37 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

NIA ने चारों को किया था गिरफ्तार

राज्य आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस), जिसने शुरू में मामले की जांच की थी, ने इस सिलसिले में नौ मुस्लिम लोगों को गिरफ्तार किया था. बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले को संभाला. NIA ने दावा किया कि विस्फोट दक्षिणपंथी चरमपंथियों का काम था और इन चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. एक विशेष अदालत ने नौ मुस्लिम लोगों को मामले से बरी कर दिया था. पिछले साल सितंबर में एक विशेष अदालत ने चारों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे. इसके बाद चारों आरोपी अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय चले गए. इस साल जनवरी में उच्च न्यायालय ने दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया हस्तक्षेप का मामला बनता है. उच्च न्यायालय ने मामले का परिणाम आने तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी. चारों आरोपियों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका में दावा किया कि एनआईए उनके खिलाफ कोई सबूत पेश करने में विफल रही है.

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News Source: PTI

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