Gas Shortage: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडरों को लेकर मचे हाहाकार ने अब एक बड़ा सियासी मोड़ ले लिया है.
- भोपाल से नितिन ठाकुर की रिपोर्ट
Gas Shortage: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों रसोई गैस सिलेंडरों को लेकर मचे हाहाकार ने अब एक बड़ा सियासी मोड़ ले लिया है. जहां एक तरफ आम जनता खाली टंकी लेकर दर-दर भटक रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए सडक़ों पर उतरना शुरू कर दिया है. मंगलवार को भोपाल के बरखेड़ी पठान क्षेत्र में कांग्रेस ने अनूठा प्रदर्शन किया, जिसने राहगीरों और प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. बरखेड़ी पठान की तंग गलियों से लेकर मुख्य सडक़ों तक मंगलवार को नजारा कुछ बदला हुआ था. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में गैस सिलेंडर पकड़ने के बजाय ठेलों पर कोयले की बोरियां लाद रखी थीं. कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता गलियों में घूम-घूमकर चिल्ला-चिल्लाकर कोयला बेचते नजर आए. प्रदर्शन का यह अनोखा तरीका सीधे तौर पर सरकार के डिजिटल इंडिया और उज्ज्वला योजना के दावों पर कड़ा प्रहार था.
सुबह से शाम तक लगे हैं कतार में
कांग्रेस का आरोप था कि प्रदेश भर में रसोई गैस का संकट इतना गहरा गया है कि आम आदमी के लिए दो वक्त की रोटी बनाना दूभर हो गया है. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर तंज कसते हुए पूछा क्या यही है वो अच्छे दिन जिनका वादा जनता से किया गया था. उनका कहना था कि जिस जनता को धुएं से मुक्ति दिलाने के सपने दिखाए गए थे, उसे आज सरकार ने फिर से पुराने दौर यानी कोयले और चूल्हे के युग में धकेल दिया है. बता दें कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में पिछले कुछ हफ्तों से गैस सिलेंडरों की किल्लत बनी हुई है. आलम यह है कि लोग सुबह से शाम तक गैस एजेंसियों के बाहर कतार में खड़े रहते हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.
कांग्रेस का सड़कों पर अनूठा प्रदर्शन
कांग्रेस ने इसी मुद्दे को लपकते हुए भोपाल की सड़कों पर कोयला बेचकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि अगर सप्लाई व्यवस्था जल्द दुरुस्त नहीं हुई तो जनता का यह आक्रोश उग्र आंदोलन में बदल सकता है. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि गैस एजेंसियां और खाद्य विभाग इस संकट को दूर करने में पूरी तरह विफल साबित हुए हैं. मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों के पास अब सिवाय कोयला या लकड़ी जलाने के कोई विकल्प नहीं बचा है. बरखेड़ी पठान में हुए इस प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया है कि गैस सिलेंडरों की कमी अब केवल रसोई तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक बड़ा चुनावी और सियासी मुद्दा बन चुकी है. अब देखना यह है कि कांग्रेस के इस कोयला प्रदर्शन के बाद सरकार क्या एक्शन लेती है या फिर राजधानी की जनता को आने वाले दिनों में और भी ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. फिलहाल भोपाल की इन गलियों से उठा विरोध का यह धुआं पूरे प्रदेश की सियासत में गर्माहट पैदा कर रहा है.
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