Home Top News गोल्ड के पास ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग! अर्थव्यवस्था डगमगाई तो कैसे सोने ने की थी भारत की मदद?

गोल्ड के पास ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग! अर्थव्यवस्था डगमगाई तो कैसे सोने ने की थी भारत की मदद?

by Amit Dubey
0 comment
India Gold Reserve

India Gold Reserve: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत के साथ पूरी दुनिया को काफी प्रभावित किया है. बीते दिनों अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को भी इनकार कर दिया और उन्होंने इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया. इससे एक बात तो साफ हो गई है कि बीते 28 फरवरी से ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह तनाव रूपी जंग इतनी जल्दी खत्म होने वाली नहीं है. इसने भारत के साथ-साथ विश्व के कई देशों को एनर्जी सप्लाई के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. इससे तेल, गैस की सप्लाई काफी प्रभावित हो रही है. हजारों की संख्या में तेल, गैस लदे जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं. कई देशों में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतें बढ़ गईं हैं और कई देशों में बढ़ने की आशंका है. इसके अलावा रूस-यूक्रेन, इजरायल-लेबनान आदि जगह भी रुक-रुक कर युद्ध जारी है.

इस भू-राजनीतिक तनाव ने भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था को काफी झटका दिया है. इस मुश्किल वैश्विक दौर में भारत को मजबूत बनाने के लिए बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से 7 खास अपील की थी, जिसमें एक अपील अगले एक साल तक सोना को ना खरीदने की भी थी. उनके द्वारा गोल्ड का जिक्र करने के बाद देश में सोने पर काफी चर्चा होने लगी है. कई जानकार सोना को ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग (दिशा तय करने वाला) भी बता रहे हैं.

इस बीच 90 के दशक की उस घटना का याद आना लाजमी सी बात है जब भारत की अर्थव्यवस्था डगमगाई थी, जब देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा था, तो कैसे भारत ने देश के गोल्ड को गिरवी रखकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के साथ-साथ बल देने का काम किया था. सोना को दुनिया की अर्थव्यवस्था की स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे के प्रतीक के रूप में माना जाता है. इतना ही नहीं, यह इस भू-राजनीतिक तनाव में एक ‘सुरक्षित निवेश’ का काम भी करता है. अब आइए जानते हैं कि सोना, ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग कैसे माना जाता है, यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए कितना जरूरी है और इसके साथ ही जानेंगे 1990 में भारत के सोना गिरवी रखने की कहानी…

Table of Content

  • पीएम मोदी की 7 अपील
  • सोना ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग कैसे?
  • सोना भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए कितना जरूरी?
  • 1990 में भारत के सोना गिरवी रखने की कहानी
  • भारत के पास कितना सोना?
  • भारत में गोल्ड का आयात और ज्वेलरी का निर्यात
  • दुनिया के सबसे बड़े सोना निर्यातक देश

पीएम मोदी की 7 अपील

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अभी कम होता हुआ नहीं दिख रहा है. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है और उन्होंने इसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है. बीते दिनों ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल पर कहा, “मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ की प्रतिक्रिया पढ़ी है. मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आई – यह पूरी तरह अस्वीकार्य है!” इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नागरिकों से खास अपील की है. उन्होंने इस मुश्किल वैश्विक दौर में भारत को मजबूत बनाने के लिए 7 अहम अपीलें की है. इनमें शामिल हैं – जहां भी मुमकिन हो, ‘वर्क फ्रॉम होम’ को प्राथमिकता दें; ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की खपत कम करें और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (मेट्रो, बस आदि) का प्रयोग करें; एक साल तक विदेश यात्रा से बचें; स्वदेशी उत्पाद अपनाएं; खाना पकाने के तेल का इस्तेमाल कम करें; प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें; और एक साल तक सोने की खरीदारी कम करें. भारत सरकार ने कहा है कि जिम्मेदारी की सामूहिक भावना भारत को और भी ज्यादा मजबूत और आत्मनिर्भर बना सकती है.

यह भी पढ़ें: दो दिनों में चांदी में 15000 रुपये का बड़ा उछाल, सोना भी 1.50 लाख के पार; जानें ताजा भाव

सोना ग्लोबल इकोनॉमी की स्टीयरिंग कैसे?

हम यहां यह समझने की कोशिश करेंगे कि सोना ग्लोबल इकोनॉमी रूपी इस गाड़ी की स्टीयरिंग कैसे है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, गोल्ड को सबसे सुरक्षित निवेशों में से एक माना जाता है. सोना, दुनिया की अर्थव्यवस्था की सुरक्षा, स्थिरता और भरोसे के लिए भी जाना जाता है. अभी जैसे पश्चिम एशिया में तनाव फैला हुआ है, उस स्थिति में करेंसी और खासकर के भारतीय रुपया में काफी उतार-चढ़ाव देखी जा रही है. इस स्थिति में सोना को एक सुरक्षित निवेश बताया जा रहा है. देश की आर्थिकी पर इस भू-राजनीतिक तनाव के दबाव को जितना हो सके उतना कम किया जा सके, उसके लिए केंद्रीय बैंक अपने सोने के भंडार(Gold Reserve) को तेजी से बढ़ा रहे हैं.

दुनिया समेत भारत में जब भी शेयर बाजार डगमगाते हैं और इसमें गिरावट आती है तो देखा जाता है कि सोने के भाव में तेजी होती है. इसलिए भी गोल्ड को दुनिया की अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए खास माना जाता है. जानकार बताते हैं कि अमेरिका, चीन और रूस जैसे कई देश अपने केंद्रीय बैंकों में गोल्ड अधिक से अधिक मात्रा में रखते हैं. इससे उनकी करेंसी और अर्थव्यवस्था को भू-राजनीतिक तनाव जैसी स्थिति में स्थिरता मिलती है. महंगाई के समय में गोल्ड देश के लिए काफी मदद करता है. कई देश ऐसे होते हैं जो डॉलर में निवेश करने की बजाय गोल्ड में निवेश करते हैं ताकि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में डॉलर का दबदबा कम हो. हालांकि, डॉलर की कीमत कम होने पर भी कई लोग सोने में ही निवेश करते हैं.

सोना भारत जैसे देशों को काफी प्रभावित करता है और इसके करेंट खाते पर असर डालता है. हम ऐसे समझ सकते हैं कि भारत गोल्ड का एक प्रमुख आयातक देश है. अभी की भू-राजनीतिक स्थिति में बाहर से अधिक सोना आयात करने पर यहां से विदशी मुद्रा का अधिक आउट फ्लो होगा, जो देश की इकोनॉमी के लिए चुनौती पैदा कर सकता है. एक कारण यह भी है कि पीएम मोदी ने देश के नागरिकों से अगले एक साल तक सोने की खरीदारी न करने या कम करने की अपील की है. इन सभी कारणों को देखें तो पता चलता है कि सोना वाकई में विश्व की अर्थव्यवस्था की स्टीयरिंग ही है.

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी ने की सोना न खरीदने की अपील, तो गोल्ड प्राइस में आई गिरावट! ज्वेलरी शेयर भी गिरे

सोना भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए कितना जरूरी?

सोना, भारत और इसके विदेशी मुद्रा भंडार के लिए बहुत ही जरूरी कीमती धातु है. इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत की इकोनॉमी भी प्रभावित हुई है और इसके लिए विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड का मजबूत होना बहुत जरूरी है. देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में चौथे स्थान से गिरकर छठे पर पहुंच गई है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट देखी जा रही है. इससे कच्चे तेल के दाम भी बढ़ रहे हैं और इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. इस स्थिति में सोना भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस विपरीत परिस्थिति में सोना विदेशी मुद्रा भंडार पर देश की निर्भरता को कम करता है और केंद्रीय बैंक को मजबूत और स्थिरता प्रदान करने में मदद करता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीते सालों में केंद्रीय रिजर्व बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए सोने के भंडारण में काफी अधिक बढ़ोतरी की है. देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गोल्ड की भागीदारी करीब 16 फीसदी (मार्च 2026 तक) तक पहुंच गई है.

विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित करने के लिए ही पीएम मोदी ने देश के नागरिकों से अगले एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है. जैसा कि आप जानते हैं कि भारत 90 फीसदी से अधिक सोने का आयात करता है, ऐसे में घरेलू सोने की मांग से आयात बढ़ेगा और यह देश के चालू खाता घाटे को और अधिक बढ़ाएगा और इसका प्रभाव देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ेगा. हालांकि, पीएम मोदी की इस अपील ने देश के ज्वेलर्स को भी प्रभावित किया है. सोने के विक्रेता परेशान हैं कि अगर कोई सोना नहीं खरीदेगा तो उनकी दुकान कैसे चलेगी, उनका कहना है कि पीएम मोदी की अपील से गोल्ड सेक्टर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है. कई लोगों की नौकरी पर भी संकट की आशंका जताई जा रही है. ज्वेलरों का कहना है कि सोने के कारीगरों पर इसका प्रभाव पड़ेगा और उनको काम न मिल पाने से उनके और उनके परिवार की जीविका पर असर पड़ेगा. पीएम मोदी की इस अपील के बीच शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में 10 फीसदी से अधिक तक की गिरावट दर्ज की गई थी.

यह भी पढ़ें: 300 प्वॉइंट्स की गिरावट के बाद आज 350 अंक लुढ़कर खुला सेंसेक्स, निफ्टी 23,706 पर

1990 में भारत के सोना गिरवी रखने की कहानी

भारत के पास कितना सोना है, इसका आयात व निर्यात कितना है और दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड निर्यातक देश कौन से हैं, इनके बारे में आगे जानेंगे, लेकिन उससे पहले कहानी 1990 की, जब भारत ने सोना गिरवी रखा था. 1990-91 में खाड़ी युद्ध हुआ था. इराक ने सद्दाम हुसैन के नेतृत्व में कुवैत के तेल भंडार पर कब्जे के लिए हमला किया था. तब अमेरिका ने कुवैत को मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म शुरू किया और उसने इसमें सफलता भी हासिल की. अमेरिका के साथ करीब 30 देशों का गठबंधन भी था. इस सैन्य कार्रवाई के बाद अमेरिका और गठबंधन की जीत हुई थी और कुवैत ईराक के कब्जे से मुक्त हो गया था. उसके बाद इराक को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा था. अगस्त 1990 से लेकर फरवरी 1991 तक चले इस युद्ध ने ग्लोबल स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को काफी प्रभावित किया था. इससे भारत भी अछूता नहीं रहा था. तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं .

तब भारत का विदेशी मुद्रा बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत को कच्चे तेल का आयात महंगे दाम पर करने पड़ रहे थे. इस वजह से भारत के पास विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम होने लग गया था. तब भारत सरकार को गोल्ड को गिरवी रखने का बड़ा फैसला करना पड़ा था. देश के पास खासकर के कच्चे तेल के आयात के लिए मात्र 15 से 20 दिनों तक के लिए ही विदेशी मुद्रा भंडार बचा था. देश की अर्थव्यवस्था डगमगा गई थी. स्थिति बद से बदतर ना हो, इसके लिए भारत सरकार ने देश के करीब 67 टन गोल्ड को गिरवी रखा था. भारत ने स्विट्जरलैंड (20 टन) और लंदन (47 टन) के बैंकों में गोल्ड को गिरवी रखकर 600 मिलियन डॉलर से अधिक का कर्ज लिया था. तब देश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री नरसिन्हा राव व वित्त मंत्री मनमोहन सिंह थे. उन्होंने देश को डिफॉल्ट से बचाने के लिए यह कदम उठाया था. इसका नतीजा यह हुआ था कि देश को तुरंत ही इससे राहत मिली थी. उसके बाद भारत ने एलपीजी नीति (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) को अपनाया, जिसने आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था को तेज गति प्रदान करते हुए एक बहुत ही सकारात्मक बदलाव किया.

भारत के पास कितना सोना है?

भारत के पास सोने का भंडार है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, फरवरी 2026 तक भारत के पास करीब 880 टन तक सोना था. सोना रखने के मामले में भारत दुनिया में नौवें स्थान पर है. इसमें भारत से आगे अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस, आईएमएफ, स्विट्जरलैंड, रूस, चीन और फ्रांस हैं. हालांकि, देश नें लोगों के पास (निजी सोना) काफी अधिक मात्रा में सोना है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के लोगों के घरों में (ज्वेलरी के रूप में) अनुमानित 24 हजार से 25 हजार टन सोना हैं. इसे दुनिया में सबसे बड़े निजी गोल्ड होल्डिंग्स में से एक माना जाता है.

यह भी पढ़ें: Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर आया रुपया, 35 पैसे लुढ़का

भारत में गोल्ड का आयात और निर्यात

रिपोर्ट के अनुसार, भारत हर साल करीब 600 से 700 टन सोने का आयात करता है. यह आयात स्विट्जरलैंड, साउथ अफ्रीका और यूएई से करता है. हालांकि, इसका निर्यात बहुत कम है. इसके पीछे की एक वजह देश के नागरिकों के द्वारा अपने घरों में सोना को जमा करना भी बताया जा रहा है. भारत सोने के आभूषणों का निर्यात करता है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 15 बिलियन डॉलर की कीमत के आभूषणों का निर्यात किया था. यह निर्यात मुख्य रूप से अमेरिका, यूएई में हुआ था.

दुनिया के सबसे बड़े सोना निर्यातक देश

दुनिया के सबसे बड़े सोना निर्यातक देशों में सबसे ऊपर स्विट्जरलैंड है. वित्त वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, स्विट्जरलैंड ने साल 2024 में करीब 116.30 बिलियन डॉलर और साल 2025 में करीब 139 बिलियन डॉलर का निर्यात किया था. इसके बाद दूसरे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम है. उसने साल 2025 में 68 बिलियन डॉलर के करीब सोने का निर्यात किया था. साल 2025 में 54 बिलियन डॉलर सोने की निर्यात के साथ तीसरे स्थान पर यूएई रहा. इनके अलावा हांगकांग, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर आदि हैं.

Follow Us On: Facebook | X | LinkedIn | YouTube Instagram

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?