India-US Trade Deal: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से भारतीय किसानों या किसी अन्य हितधारक के संवेदनशील हितों पर कोई आंच नहीं आएगी. नई दिल्ली के ISID कैंपस में आयोजित औद्योगिक विकास अनुसंधान संघ (IDRA) के चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भरोसा दिलाया. पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा कि जब भी इस समझौते का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा, तो भारत एक बहुत मजबूत तुलनात्मक लाभ की स्थिति में होगा.
विवरण सामने आने पर देश मनाएगा जश्न
उन्होंने पूर्व में किए गए समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक देश द्वारा किए गए किसी भी एफटीए (FTA) की न तो कोई खास आलोचना हुई है और न ही उनमें कोई कमी पाई गई है. वाणिज्य मंत्री के अनुसार, अमेरिका के साथ हुए इस मुक्त व्यापार समझौते की बारीकियां सामने आने पर भारत के लोग इसका जश्न मनाएंगे, क्योंकि देश के संवेदनशील आर्थिक व कृषि हितों की पूरी रक्षा की गई है. गोयल ने कहा कि अधिकांश विकसित देशों ने पारंपरिक रूप से श्रम-प्रधान उत्पादों पर उच्च शुल्क (टैरिफ) लगा रखा है, जिसका इस्तेमाल वे बातचीत में एक हथियार की तरह करते हैं. इससे भारतीय निर्यात के लिए बाधाएं पैदा होती हैं. हालांकि, भारत ने 38 विकसित देशों के साथ व्यापार समझौते करके इन बाधाओं को दूर करने में सफलता पाई है.
समझौते से 38 देशों में विशेष पहुंच
कहा कि हमने जो नौ मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय व्यापार समझौते किए हैं, उनमें 38 ऐसे विकसित देश शामिल हैं जो हमसे कहीं अधिक समृद्ध हैं. इसलिए, वे हमारे साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करते बल्कि हम एक-दूसरे के पूरक हैं. गोयल ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत ने नौ व्यापार समझौतों के जरिए ऐसे बाजारों तक विशेष पहुंच हासिल की है, जिनकी कुल GDP 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. इसकी तुलना में, 2014 से पहले किए गए समझौतों के दायरे में केवल 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की GDP वाले बाजार आते थे. उन्होंने कहा कि हमने 60 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की कुल GDP वाली अर्थव्यवस्थाओं में विशेष दरों पर बाजार के अवसर खोले हैं. 2014 से पहले किए गए सभी समझौते केवल 10 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक ही सीमित थे, क्योंकि वे मुख्य रूप से उन देशों के साथ थे जो हमारे साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं.
वाणिज्य मंत्री ने किया RCEP का जिक्र
‘रीजनल कॉम्प्रिहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप’ (RCEP) का जिक्र करते हुए गोयल ने बताया कि इस व्यापार समूह में 15 देश शामिल हैं, जिनमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और आसियान (ASEAN) के 10 सदस्य देश शामिल हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि जब RCEP शुरू किया गया था, तब भारत इसमें कहीं भी शामिल नहीं था. उन्होंने कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत के एक सक्रिय चरण में थे और इसे आसानी से पूरा कर सकते थे. यह कोई मुश्किल समझौता नहीं था. उस समय न्यूजीलैंड के साथ हमारा व्यापार न के बराबर था. न्यूजीलैंड के साथ हमारा कुल द्विपक्षीय व्यापार 350 मिलियन अमेरिकी डॉलर था. अब बस चीन ही बचा था.
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News Source: ANI
