Israel Election: इजरायल में चुनाव के नतीजों के बाद भी सरकार गठन को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन अभी बहुमत के आंकड़े से पीछे चल रहा है. वहीं, विपक्षी गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाला गुट भी बहुमत हासिल करने में नाकाम नजर आ रहा है. ऐसे में अब सबकी निगाहें ‘डबल लिफाफे’ वाले वोटों पर टिकी हैं. इसके अलावा, अरब समर्थक पार्टी के गठबंधन को लेकर भी दोनों खेमों की नजरें बनी हुई हैं. अब देखना होगा कि नेतन्याहू एक बार फिर सरकार बनाने में सफल होते हैं या विपक्षी गठबंधन सत्ता पर काबिज होने की स्थिति में पहुंचता है. बता दें कि इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए किसी पार्टी या गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है.
डबल लिफाफे की गिनती कर रहा EC
इजरायली चुनाव आयोग इस वक्त ‘डबल लिफाफे’ वाले वोटों की गिनती कर रहा है. इनमें वे मतदाता शामिल हैं जिन्होंने अनुपस्थित रहकर वोट डाला (एब्सेंटी बैलेट) हैं और इनमें मुख्य रूप से IDF सैनिक शामिल हैं. इसके अलावा कैदियों, चिकित्सा कर्मियों, स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों और विदेशों में तैनात इजरायली प्रतिनिधियों के वोट भी इसी श्रेणी में आते है. दूसरी ओर अनुमानों में बताया जा रहा है कि मौजूदा प्रधानमंत्री नेतन्याहू की पार्टी ‘लिकुड’ को 26 सीटें मिल सकती हैं, जिससे यह ‘नेसेट’ में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है. साथ ही ‘यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म’, ‘शास’ और ‘ओत्ज्मा येहुदित’ जैसी सहयोगी पार्टियों के साथ लिकुड नेतृत्व वाले गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है. हालांकि, इसके बाद भी नेतन्याहू गुट जरूरी 61 सीटों के जादुई आंकड़ों से काफी दूर रहेगी.
अनुमानों में ऐसा है नतीजों का समीकरण
वहीं, विपक्षी गुट में गादी आइसेनकोट की ‘याशर’, नफ्ताली बेनेट की ‘ब्याचाद’, एविग्डोर लिबरमैन की ‘यिसरायल बेतेनु’ और यायर गोलान की ‘द डेमोक्रेट्स’ जैसी पार्टियां शामिल हैं. इनको 48 सीटें मिलती हुई दिख रही हैं. इसके अलावा अरब समर्थक पार्टी जॉइंट लिस्ट’ और ‘राआम’ को 19 सीटें मिलने की संभावना है. अब सबकी निगाहें इस बात टिकी है कि आगामी सरकार का स्वरूप कैसा होगा? नेतन्याहू विरोधी गुट से यह मांग की जा रही है कि वे अरब दलों को अपने साथ लाएं और बहुमत जुटाकर नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखें. बुधवार की रात यायर गोलान की पार्टी के नेतृत्व में कई लोग सड़कों पर उतरे और एक ‘यहूदी-अरब गठबंधन’ बनाने की अपील की.
यहूदी-फिलिस्तीनी के एकजुट की उठी आवाज
समर्थकों का कहना है कि हम पूरे देश में सड़कों पर उतरें हैं ताकि एक संयुक्त यहूदी-फिलिस्तीनी सरकार के पक्ष में अपनी आवाज उठा सकें. हम नस्लवाद, मसीहाई सोच और वर्चस्ववाद को नकारते हैं. इजरायल के चुनावों में यहूदियों और फिलिस्तीनियों के एक ऐतिहासिक बहुमत ने एक अलग भविष्य के लिए वोट दिया. साथ ही नेतन्याहू के गुट को 53 सीटें मिल रही हैं और सरकार बनाने के लिए किसी गुट के पास 61 सीटें होनी चाहिए. हम यहूदी और फिलिस्तीनी बहुमत में है. हम एक संयुक्त सरकार की मांग करते हैं. यहूदी विपक्षी दलों को अरब दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और सभी के लिए बदलाव लाना चाहिए.
अरब पार्टियों ने आइसेनकोट को समर्थन देने का संकेत दिया
यायर गोलान की पार्टी के समर्थकों ने कहा कि यहूदी विपक्षी दलों को अरब दलों के साथ मिलकर काम करना चाहिए और सभी के लिए बदलाव लाना चाहिए. यह शांति, समानता और न्यायपूर्ण भविष्य की दिशा में पहला कदम होगा. इन चुनावों ने उस बात को साबित कर दिया है जिसे हम जानते हैं और जिसके लिए हम पिछले 11 सालों से लड़ रहे हैं. केवल यहूदी-फिलिस्तीनी साझेदारी ही वह बदलाव ला सकती है जिसके हम सभी हकदार हैं. गोलान ने खुद एक साहसिक नेतृत्व की वकालत की और अपने गुट से अरब दलों के साथ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया. गोलान ने इजरायली मीडिया से कहा कि इजरायल की अधिकांश जनता बदलाव लाने वाली सरकार और इजरायल के उद्धार की इच्छा रखती है. हमारे पास इसके लिए बहुमत है. हमें बस एक साहसिक नेतृत्व की आवश्यकता है. अरब दलों ने उम्मीदों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हुए नेसेट में 19 सीटें हासिल की हैं. ‘डबल एनवेलप’ की गिनती के बाद यह संख्या थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन अरब दलों ने आइसेनकोट के नेतृत्व वाले गुट के साथ मिलकर काम करने के संकेत दिए हैं.
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News Source: ANI
