Home Top News हर्षद मेहता स्कैम से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक, वो ‘काला’ समय जब भारतीय शेयर बाजार हुआ क्रैश

हर्षद मेहता स्कैम से लेकर पश्चिम एशिया संकट तक, वो ‘काला’ समय जब भारतीय शेयर बाजार हुआ क्रैश

by Amit Dubey
0 comment
Share Market Crash History

Share Market Crash History: शेयर मार्केट के इतिहास में कई ऐसे पल रहे हैं, जब बाजार क्रैश हुई. इस दौरान निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए. इसका हालिया उदाहरण भारतीय शेयर बाजार के वो दो दिन (11 और 12 मई) हैं, जब मार्केट में 2700 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई. इस दौरान निवेशकों के करोड़ों रुपये डूब गए. स्टॉक मार्केट की इस घटना के पीछे की वजह पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज कर देना है. जी हां, बीते दिनों ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा था, “मैंने अभी-अभी ईरान के तथाकथित ‘प्रतिनिधियों’ की प्रतिक्रिया पढ़ी है. मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आई – यह पूरी तरह अस्वीकार्य है!”

बाजार की इस घटना ने एक बार फिर से निवेशकों और लोगों को उन दिनों की याद दिला दी, जब मार्केट में भारी गिरावट देखी गई. भारतीय शेयर बाजार के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी50 में तेजी से गिरावट दिखी और निवेशकों के करोड़ों रुपये स्वाहा हो गए. शेयर बाजार क्रैश इतिहास के पन्नों में इन्हें ‘काला दिन’ भी कहा जा सकता है. इनमें हर्षद मेहता घोटाला से लेकर कोरोना वायरस और अब ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनातनी के दौरान पश्चिम एशिया में जारी तनाव शामिल है. इन घटनाओं के बारे में हम यहां विस्तार से जानेंगे. इसकी शुरुआत ताजा मार्केट अपडेट से करते हैं.

शेयर मार्केट अपडेट

शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव की स्थिति जारी रहती है. इस दौरान बाजार के कई शेयरों में तेजी तो कई में सुस्ती देखी जाती है. आज रविवार होने की वजह से भारतीय शेयर बाजार बंद है. अब मार्केट सोमवार को खुलेगी. बीते शुक्रवार के कारोबारी सत्र पर ध्यान दें तो बाजार के दोनों अहम इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी50 में एक बार फिर से गिरावट दर्ज की गई थी. 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स शुक्रवार 15 मई को 0.21 फीसदी लुढ़का. यह 160 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ लाल निशान में 75,237.99 के स्तर पर कारोबार करते हुए बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 14 शेयर हरे में और 16 शेयर लाल निशान में बंद हुए.

वहीं, बात अब 50 शेयरों वाले निफ्टी इंडेक्स की करें तो इसमें भी बीते कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई. शुक्रवार को यह इंडेक्स 0.19 फीसदी गिर गया. यह लाल निशान में 46 अंकों की गिरावट के साथ 23,643.50 के आसपास कारोबार करते हुए दिखा. इसके कुल 50 शेयरों में से 25 में तेज दिखी, 24 में गिरावट रही, जबकि एक अपरिवर्तित रहा. अब आइए भारतीय शेयर बाजार के उस इतिहास पर नजर डालते हैं, जब मार्केट धड़ाम हुई.

यह भी पढ़ें: अब तक के सबसे निचले स्तर पर रुपया, डॉलर के मुकाबले 96.14 पर भारतीय करेंसी, क्या है वजह?

हर्षद मेहता स्कैम- 1992

यहां हम भारतीय शेयर बाजार की कुछ बड़ी गिरावटों के इतिहास के बारे में बता रहे हैं, जब बाजार के निवेशकों को तगड़ा झटका लगा. इसकी शुरुआत साल 1992 के हर्षद मेहता स्कैम से करते हैं. हर्षद मेहता एक दिग्गज स्टॉक ब्रोकर हुआ करता था, जिसने बैंकों से उधार लिए गए पैसों का इस्तेमाल करके भारतीय शेयर बाजार की कीमतों को प्रभावित करता था. बाजार को प्रभावित और नियंत्रित करने का सिलसिला उसका कई दिनों से जारी था और अचानक इसका खुलासा 1992 में हुआ.
हर्षद मेहता की इस धोखाधड़ी के बारे में जब खुलासा हुआ और बाजार सहित पूरी दुनिया को इसके बारे में पता चला तो देश का शेयर बाजार 12 फीसदी से अधिक तक गिर गया. यह गिरावट 28 अप्रैल 1992 में हुई थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घोटाला करीब 4 हजार से लेकर 5 हजार करोड़ रुपये के बीच का था, जिसमें बैंकिंग सिस्टम की आंखों में धूल झोंककर शेयर बाजार को प्रभावित किया जाता था. इस हेराफेरी में बैंकों के रसीदों का दुरुपयोग, बाजार में भारी उछाल और पैसों की हेराफेरी कर निवेश का काम आदि किया जाता था. इस घटना के बाद देश की वित्तीय सिस्टम में काफी सुधार किए गए, जिनमें बाजार नियामक सेबी की शक्तियों को और भी मजबूत किया गया. हर्षद मेहता स्कैम पर कई फिल्में भी बनी हुई हैं.

एनडीए पर यूपीए की जीत- 2004

भारतीय शेयर बाजार में एक और झटका साल 2004 में लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद लगा. बताया जाता है कि साल 2004 में केंद्र में एनडीए की सरकार पर यूपीए की अपत्याशित जीत ने देश के साथ-साथ शेयर बाजार में निवेशकों को भी चौंका दिया था. यूपीए की जीत ने देश में आर्थिक सुधारों की निरंतरता को लेकर चिंता पैदा कर दी. इस वजह से 17 मई 2004 को शेयर बाजार के सेंसेक्स इंडेक्स में 11 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी. तब बाजार 840 अंकों से अधिक टूटा था. कई मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि दिन के कारोबारी सत्र के दौरान बाजार को दो बार रोकना पड़ा था क्योंकि घबराहट में निवेशकों के द्वारा शेयरों की बिक्री बढ़ गई थी.

यह भी पढ़ें: इंपोर्ट ड्यूटी 15% बढ़ाने के बाद सरकार का बड़ा एक्शन, चांदी के आयात पर रोक; क्या है वजह?

ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस- 2008

भारतीय शेयर बाजार को साल 2008 में ग्लोबल इकोनॉमिक क्राइसिस ने काफी बुरे तरीके से प्रभावित किया. साल 2008 में अमेरिका में लेहमैन ब्रदर्स के पतन के बाद फाइनेंशियल क्राइसिस ने जन्म लिया. बैंकों ने खराब क्रेडिट वाले उधारकर्ताओं को जोखिमपूर्ण सबप्राइम मॉरगेज दिए. हाउसिंग मार्केट में अधिक कर्ज और ओवर लीवरेजिंग ने एक बहुत ही कमजोर फाइनेंशियल सिस्टम बनाया. वहीं, ग्लोबल मार्केट्स में मात्र महीने भर के अंदर ही करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ.

21 जनवरी 2008 को ग्लोबल मंदी की आशंकाओं और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से भारी मात्रा में शेयरों की बिकवाली ने स्टॉक मार्केट को 7 फीसदी से अधिक गिरा दिया. तब सेंसेक्स में 1400 से अधिक अंकों की गिरावट आई और अगले एक महीने में सेंसेक्स अपने शिखर से करीब 61 फीसदी तक नीचे आ गया था. इसे भारतीय शेयर बाजार में इतिहास की सबसे खराब मंदी और गिरावट कहा जाता है.

चीन के युआन से बाजार में गिरावट- 2015

अब बात 2015 की करेंगे. 24 अगस्त 2015 को भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स में 1600 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई थी. इसकी वजह चीन के युआन में गिरावट और इससे ग्लोबल मार्केट में हाहाकार मचना था. ब्रेक्सिट की चिंता और सस्ते तेल को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो भारत इस घटना से काफी प्रभावित हुआ था. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि शेयर बाजार की इस गिरावट में निवेशकों के एक दिन में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक डूब गए थे.

यह भी पढ़ें: सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट! गोल्ड 3 हजार तो सिल्वर 19000 से अधिक लुढ़का, जानें ताजा रेट

कोरोना महामारी

ग्लोबल मंदी के बाद भारतीय शेयर बाजार को तगड़ा झटका कोरोना महामारी के दौरान लगा था. हालांकि, इससे ग्लोबल स्तर की मार्केट भी काफी बुरी तरह से प्रभावित हुई थीं. भारतीय शेयर बाजार में 3900 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी. कोरोना वायरस की वजह देश में लॉकडाउन की घोषणा ने 23 मार्च 2020 को भारतीय शेयर बाजार के सेंसेक्स में 13 फीसदी से अधिक यानी कि 3930 अंकों से अधिक की गिरावट दिखा दी. भारत समेत दुनिया के कई देशों में भी लॉकडाउन की घोषणा की गई थी. तब कई भारतीय निवेशकों ने बाजार में शेयरों की बिक्री कर दी थी. हालांकि, कई लोगों ने गिरावट का फायदा उठाकर शेयरों में लंबी अवधि के लिए निवेश भी किया था.

पश्चिम एशिया तनाव और भारतीय शेयर बाजार

बीते 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला बोल दिया. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया.

इस युद्ध ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया. फारस और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग 33 किमी चौड़ा और करीब 167 किमी लंबा है. विश्व की एनर्जी सप्लाई इस रास्ते पर बहुत ही अधिक निर्भर है. दुनिया का करीब 20 से 25 फीसदी तेल और गैस का व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होता है. यह रास्ता एशियाई बाजारों तक करीब 80 फीसदी से अधिक तेल की सप्लाई का माध्यम है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पूरी दुनिया तो प्रभावित हुई ही है, लेकिन उससे भी अधिक इसने एशियाई बाजारों को प्रभावित किया है.

इससे भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार काफी प्रभावित हुए. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (International Monetary Fund) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (4.15 ट्रिलियन डॉलर) वाला देश है. पहले यह चौथे स्थान पर था. 32.38 ट्रिलियन डॉलर के साथ अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है. दूसरे पर चीन (20.85 ट्रिलियन डॉलर) है.

अब बात शेयर बाजार की करते हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित होने से देश की तेल कंपनियों के शेयरों में 14 फीसदी से अधिक की बड़ी गिरावट आई. पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म करने के लिए बीते दिनों ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत भी हो रही थी, लेकिन इसे तब बहुत बड़ा झटका लगा, जब ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को इनकार कर दिया. इसके बाद ग्लोबल अनिश्चितता और बढ़ गई और ऐसा लगने लगा कि यह युद्ध और तनाव इतनी जल्द खत्म नहीं होने वाला. ट्रंप के द्वारा शांति प्रस्ताव ठुकराने के बाद दुनिया के कई शेयर बाजार के साथ भारत का भी बाजार गिरा.

यह भी पढ़ें: सोने की कीमत में आई तेजी तो बढ़ा भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, PM Modi की अपील से कितनी मजबूती?

2700 अंकों से अधिक की गिरावट

बीते सोमवार 11 मई को भारतीय शेयर बाजार पर ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप के द्वारा ठुकराए जाने का बड़ा निगेटिव प्रभाव पड़ा था. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों के द्वारा बिकवाली ने शेयर बाजार को धड़ाम कर दिया. सोमवार को 30 शेयरों वाला इंडेक्स सेंसेक्स बाजार बंद के दौरान 1312.91 अंकों की गिरावट दिखाया था. यह लाल निशान में 1.70 फीसदी की सुस्ती के साथ 76,015.28 पर कारोबार करते हुए बंद हुआ था. इसके 30 शेयरों में से मात्र 6 हरे में बंद हुए थे, जबकि 24 शेयर लाल निशान में दिखे. वहीं, निफ्टी में 1.49 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. 50 शेयरों वाले इस इंडेक्स के 11 शेयर हरे और 39 शेयर लाल में बंद हुए थे. 11 मई को निफ्टी 360.30 अंकों की गिरावट के साथ 23,815.85 पर कारोबार करते हुए बंद हुआ था.

11 मई की यह गिरावट 12 मई को बढ़कर 1400 से अधिक अंकों की हो गई. मंगलवार 14 मई को सेंसेक्स बाजार बंद के दौरान 1456.04 अंकों की गिरावट दिखाया था. यह लाल निशान में 1.92 फीसदी की सुस्ती के साथ 74,559.24 पर कारोबार करते हुए बंद हुआ था. इसके 30 शेयरों में से केवल एक (State Bank of India Share (0.12%))हरे में बंद हुआ था, जबकि 29 शेयर लाल निशान में दिखे थे. वहीं, मंगलवार को बाजार बंद के दौरान निफ्टी में 1.83 फीसदी की गिरावट दिखी. 50 शेयरों वाले इस इंडेक्स के मात्र 4 शेयर हरे और 46 शेयर लाल में बंद हुए थे. 12 मई को निफ्टी 436.30 अंकों की गिरावट के साथ 23,379.55 पर कारोबार करते हुए बंद हुआ था. इस प्रकार से 11 और 12 मई की लगातार दो दिनों की बाजार की गिरावट में 2700 से अधिक अंकों की सुस्ती दर्ज की गई.

You may also like

LT logo

Feature Posts

Newsletter

@2026 Live Time. All Rights Reserved.

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?