Home Latest News & Updates महिला का पैसा हड़पना पड़ा भारीः कोर्ट ने सिखाया सबक, वित्तीय सलाहकार को 2 साल की जेल और 30 लाख जुर्माना

महिला का पैसा हड़पना पड़ा भारीः कोर्ट ने सिखाया सबक, वित्तीय सलाहकार को 2 साल की जेल और 30 लाख जुर्माना

by Sanjay Kumar Srivastava
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ठाणे कोर्ट ने सिखाया सबक, वित्तीय सलाहकार को 2 साल की जेल और 30 लाख का ठोका जुर्माना

Thane court: भरोसे में लेकर महिला को धोखा देने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. ठाणे की एक अदालत ने महिला की याचिका पर एक वित्तीय सलाहकार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और उस पर 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. पूरी राशि महाराष्ट्र के ठाणे की रहने वाली महिला को मुआवजे के रूप में दी जाएगी.

Thane court: भरोसे में लेकर महिला को धोखा देने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. ठाणे की एक अदालत ने महिला की याचिका पर एक वित्तीय सलाहकार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है और उस पर 30 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. विशेष अदालत के न्यायाधीश जीटी पवार ने आरोपी मतेश्वर राजपत गिरि पर यह कार्रवाई की. अदालत ने आदेश दिया कि 30 लाख रुपये की पूरी जुर्माना राशि महाराष्ट्र के ठाणे की रहने वाली महिला को मुआवजे के रूप में दी जाए. अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक सड़क दुर्घटना में अपने पति और भाई को खोने वाली महिला ने जुलाई 2017 और अप्रैल 2018 के बीच आरोपी गिरि के साथ अपनी पूरी मुआवजा राशि और एक वाणिज्यिक दुकान बेचने से प्राप्त 51.5 लाख रुपये का निवेश किया था.

आरोपी ने म्यूचुअल फंड में लगवाया पैसा

मुंबई के बांद्रा में एक वित्तीय फर्म चलाने वाले गिरी ने उसे म्यूचुअल फंड के जरिए 12 फीसदी का औसत वार्षिक रिटर्न देने का वादा किया था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, गिरी ने जनवरी 2021 तक नियमित लाभांश का भुगतान किया, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद कर दिया और मूल राशि वापस नहीं किया. अंततः 32.46 लाख रुपये की शेष राशि नहीं लौटाई. जमानत प्रक्रिया के दौरान अदालत के आदेश के बाद गिरि ने 13.86 लाख रुपये जमा किए, जबकि 18.6 लाख रुपये का बकाया छोड़ दिया.

जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास

न्यायाधीश पवार ने कहा कि आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध को साबित करने के लिए यह बताया जाना चाहिए कि शुरुआत से ही आरोपी का इरादा बेईमान था. लेकिन वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष ने बताया कि 2017 से 2020 तक आरोपी ने उसे लाभांश का भुगतान किया, जो दर्शाता है कि शुरू से ही आरोपी का इरादा बेईमान नहीं था. कोर्ट ने कहा कि धारा 406 के तहत आपराधिक विश्वासघात का अपराध बनता है. अदालत ने कहा कि आरोपी ने धन लेना स्वीकार किया, लेकिन निवेश का कोई सबूत नहीं दे पाया, इसलिए यह साबित होता है कि आरोपी ने राशि का दुरुपयोग किया. अदालत ने आरोपी मतेश्वर राजपत गिरि को आईपीसी की धारा 406 के तहत दोषी ठहराया और कहा कि जुर्माना नहीं देने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

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News Source: PTI

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