Cyber Crime: देश में साइबर ठगी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. इसमें साइबर ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और जीवनभर की मेहनत की कमाई को पलभर में साफ कर दे रहे हैं.
Cyber Crime: देश में साइबर ठगी के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. देश के हर कोने से साइबर क्राइम के मामले सामने आ रहे हैं. इसमें साइबर ठग आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और जीवनभर की मेहनत की कमाई को पलभर में साफ कर दे रहे हैं. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) पर 2021 में साइबर क्राइम की 4.52 लाख घटनाएं दर्ज की गई थी. इस पोर्टल पर 2023 में कुल 15,96,491 मामले दर्ज किए गए. साल 2024 में देश में साइबर क्राइम के 22,68,346 मामले दर्ज किए गए.यह 2023 की तुलना में 42.08 फीसदी अधिक थे.
Case-1: हैदराबाद में साइबर ठगों ने बुजुर्ग कारोबारी (81) को ठग लिया. ठगों ने धमकाकर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगभग 7.12 करोड़ रुपयों की ठगी कर ली. यह मामला 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ, जब पीड़ित के मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आया.
Case-2: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के खोड़ा थाना क्षेत्र के राजीव नगर निवासी विजय दास को पेंशन बढ़वाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने उनके खाते से 94000 रुपये निकाल लिए. रकम तीन बार में उनके बैंक खाते से काटी गई. साइबर ठगी 26 दिसंबर 2025 को हुई. पुलिस ने साइबर सेल की जांच के बाद 9 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की है.
Case-3: अंबाला सिटी में SBI बैंक से रिटायर्ड कर्मचारी का फोन हैक कर खाते से 5.79 लाख की राशि निकाल ली गई. साइबर थाना पुलिस ने सिटी के न्यू मिलाप नगर निवासी यशपाल गेरा की तहरीर पर अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी. यशपाल ने बताया कि वह भारतीय स्टेट बैंक से रिटायर्ड हैं. 6 जनवरी को उसके मोबाइल पर फोन आया था कि आप रिटायर्ड पेंशन कार्ड बनवाना चाहते हैं.
Case-4: राजस्थान के श्रीगंगानगर में पंजाब नेशनल बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी परमजीत सिंह तनेजा के साथ ठगों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी की. ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर उन्हें डराया और करीब 25 लाख रुपये ट्रांसफर करवाए. पीड़ित ने अब साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है.
Case-5: साइबर जालसाजों ने शेयर बाजार में निवेश पर अधिक लाभ का लालच देकर दिल्ली में एक पूर्व IPS अधिकारी की पत्नी से 25.8 करोड़ रुपये की ठगी की. महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि पिछले साल नवंबर में उन्हें एक इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप पर शेयर बाजार में निवेश के जरिए भारी मुनाफा कमाने का निमंत्रण मिला था. इसके तुरंत बाद दिनेश सिंह नाम के एक व्यक्ति ने ग्रुप में विस्तृत संदेश भेजकर कक्षाएं और चर्चाएं शुरू कर दीं. जिससे महिला समेत ग्रुप के सदस्यों में काफी विश्वास पैदा हो गया. दिनेश सिंह और उनके सहयोगियों ने बताया कि उन्हें भारत में सेबी-पंजीकृत संस्था के माध्यम से व्यापार करना चाहिए और समूह में सेबी पंजीकरण प्रमाण पत्रों की प्रतियां भी भेजीं. इन निर्देशों के अनुसार पीड़िता ने अपने पति की मदद से उनके नाम पर और उन्हीं के दस्तावेजों का उपयोग करके एक ट्रेडिंग खाता खोला. बाद में दिनेश सिंह के कहने पर पीड़िता ने बड़ी मात्रा में धनराशि जमा की. 5 जनवरी को उन्होंने 10 लाख रुपये निकाले और यह राशि छह छोटी-छोटी किस्तों में जमा की गई, जिससे उनका संदेह और बढ़ गया. धोखेबाजों ने खुद को एक प्रतिष्ठित कंपनी के रूप में पेश किया और मुझसे 2.58 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की. इस शिकायत पर 6 जनवरी को एफआईआर दर्ज की गई.
तेलंगाना में 18 लोग गिरफ्तार
Hyderabad Fraud: पुलिस ने रविवार को बताया कि तेलंगाना के खम्मम जिले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ये सभी 547 करोड़ की साइबर धोखाधड़ी में शामिल थे. पुलिस ने बताया कि 24 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, जिनमें से 18 को गिरफ्तार कर लिया गया है. शेष आरोपी फरार हैं. खम्मम पुलिस आयुक्त सुनील दत्त ने कहा कि जांच में पता चला है कि आरोपी 2022 से 2025 के बीच एक बड़े और संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में शामिल थे. उन्होंने बताया कि आरोपियों ने रोजगार, व्यापार और आर्थिक प्रलोभनों का लालच देकर कई व्यक्तियों को अपने नाम से बैंक खाते खोलने और संचालित करने के लिए प्रेरित किया. आयुक्त ने बताया कि इन खातों की इंटरनेट बैंकिंग जानकारी एकत्र कर उनका दुरुपयोग किया गया. पुलिस ने कहा कि इन खातों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त धन को प्राप्त करने, छिपाने, स्थानांतरित करने और मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया, जो भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत अपराध है.
शिकायत करते ही दर्ज हो जाएगी E-FIR
दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों पर नकेल कसने के लिए एक सुपरफास्ट सिस्टम शुरू किया है. अगर अब कोई आपसे कोई एक लाख या उससे ज्यादा की ऑनलाइन ठगी कर ले तो शिकायत करते ही ऑटोमैटिक E-FIR दर्ज हो जाएगी. इससे जांच में तेजी आएगी साथ ही ठगों पर भी शिकंजा कस सकेगा. 10 लाख रुपए से ज्यादा की ठगी पर 1930 हेल्पलाइन से शिकायत आने पर दिल्ली में ZERO-FIR दर्ज होगी. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित दिल्ली के किसी भी पुलिस स्टेशन पर जाकर नए हेल्प डेस्क की मदद ले सकते हैं. अधिकारी ने बताया कि एक लाख रुपए से ज्यादा ठगे गए पीड़ित 1930 डायल करें या किसी नजदीकी थाने पहुंचें. पोर्टल पर शिकायत दर्ज होते ही ये E-FIR में बदल जाएगी. इसके बाद ये E-FIR दिल्ली के 15 साइबर पुलिस स्टेशन, क्राइम ब्रांच या IFSO तक पहुंच जाएगी.
क्या है IFSO?
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) इकाई स्पेशल सेल के अंतर्गत कार्य करती है. यह एक विशेष इकाई है जो साइबर अपराध के सभी जटिल और संवेदनशील मामलों को संभालती है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी पीड़ित होते हैं. साइबर क्राइम यूनिट अत्याधुनिक साइबर लैब से सुसज्जित है, जिसमें हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन से डिलीट किए गए डेटा को निकालने, इमेजिंग और हैश वैल्यू की गणना, फोरेंसिक सर्वर, ऑन-साइट जांच के लिए पोर्टेबल फोरेंसिक उपकरण, नवीनतम एंड्रॉइड और आईओएस फोन के साथ-साथ चीनी फोन से डेटा निकालने की सुविधा जैसी साइबर फोरेंसिक क्षमताएं मौजूद हैं.
ऑनलाइन लेनदेन में धोखाधड़ी
ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता का आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने ऑनलाइन खरीदारी के माध्यम से उसके क्रेडिट/डेबिट कार्ड से पैसे निकाले/लेनदेन किए. इनमें से अधिकांश मामलों में खरीदारी क्रेडिट/डेबिट कार्ड से इन महत्वपूर्ण जानकारियों का उपयोग करके की जाती है.
- 16 अंकों का क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर.
- क्रेडिट/डेबिट कार्ड की वैधता.
- डेबिट कार्ड धारक के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजा गया तीन अंकों का गोपनीय कार्ड सत्यापन मान (CW) या वन-टाइम-पासवर्ड (OTP). हो सकता है कि कार्ड नंबर और कार्ड की वैधता बैंक के किसी अंदरूनी सूत्र के माध्यम से धोखेबाजों को मिल जाए, लेकिन OTP वे खाताधारक को यह कहकर धोखा देकर प्राप्त करते हैं कि यह खाता सत्यापन आदि के लिए आवश्यक है.
कैसे बरतें सावधानियां?
- जब तक आप किसी भरोसेमंद कंपनी को कॉल न कर रहे हों, तब तक फोन पर किसी को भी अपना खाता नंबर न दें. अगर आपने पहले कभी उनके साथ लेन-देन नहीं किया है, तो पहले ऑनलाइन जाकर समीक्षाएं या शिकायतें देख लें.
- लेन-देन के दौरान अपने कार्ड पर नजर रखें. जाने से पहले अपना कार्ड वापस लेना सुनिश्चित करें.
- अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पर नजर रखें.
- अपनी क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर रखें.
- क्रेडिट कार्ड की जानकारी कभी भी ऑनलाइन स्टोर न करें.
- सार्वजनिक कंप्यूटर पर क्रेडिट कार्ड का उपयोग कभी न करें.
शिकायत कैसे दर्ज करें?
- संबंधित बैंक से पिछले छह महीनों का बैंक स्टेटमेंट प्राप्त करें.
- कथित लेन-देन से संबंधित प्राप्त एसएमएस की एक प्रति बनाएं.
- बैंक रिकॉर्ड में दर्ज अपने पहचान पत्र और पते के प्रमाण की एक प्रति बनाएं.
- उपरोक्त दस्तावेजों के साथ पूरी घटना का विवरण देते हुए अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करें.
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